इतिहास गवाह है, काशी का दान कभी खाली नहीं जाता! इस महाशिवरात्रि महादेव के प्रिय ब्राह्मणों का व्रत खुलवाएं और उनकी साधना का पुण्य अपने नाम करें।
🌙महाशिवरात्रि का व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता, जब तक सूर्योदय के पश्चात विधि-विधान से पारण न किया जाए। और यदि यह पारण स्वयं महादेव की नगरी काशी में हो, तो उसका फल अनंत गुना बढ़ जाता है।
🔱 अविमुक्त क्षेत्र काशी: जहाँ सेवा सीधे महादेव स्वीकारते हैं
स्कंद पुराण के काशी खंड में कहा गया है कि काशी पृथ्वी का हिस्सा नहीं, बल्कि महादेव के त्रिशूल पर टिकी एक ऐसी नगरी है जो प्रलय में भी नष्ट नहीं होती। इसे अविमुक्त क्षेत्र कहा जाता है क्योंकि महादेव इसे कभी नहीं छोड़ते।
काशी में किया गया पारण सेवा का महत्व इसलिए सर्वोपरि है क्योंकि प्रत्येक ब्राह्मण को शिव का अंश माना जाता है। जब आप महाशिवरात्रि के कठिन उपवास के बाद इन तपस्वियों का व्रत खुलवाते हैं, तो वह सेवा सीधे विश्वनाथ महादेव के चरणों में पहुँचती है।
✨ शास्त्रों का प्रमाण: पारण का अक्षय फल
शिव रहस्य और लिंग पुराण के अनुसार, काशी में महाशिवरात्रि व्रत का पारण करवाने वाले जातक के सात जन्मों के दरिद्र योग कट जाते हैं। जब कोई साधक ठंडाई, खीर और सात्विक भोजन से किसी तपस्वी ब्राह्मण का व्रत खुलवाता है, तो उस ब्राह्मण द्वारा की गई पूरी रात की साधना का एक अंश उस साधक के खाते में स्वतः जुड़ जाता है।
🌸 इस महाशिवरात्रि, काशी के ब्राह्मणों का व्रत पूर्ण करवाकर महादेव की विशेष कृपा के पात्र बनें। काशी पारण महाप्रसाद सेवा में अपना स्थान अभी सुरक्षित करें!
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