वाराही पंचमी वाराही देवी संध्याकाल 108 दीपदान एवं चढ़ावा सेवा
वाराही पंचमी वाराही देवी संध्याकाल 108 दीपदान एवं चढ़ावा सेवा
वाराही पंचमी वाराही देवी संध्याकाल 108 दीपदान एवं चढ़ावा सेवा
वाराही पंचमी वाराही देवी संध्याकाल 108 दीपदान एवं चढ़ावा सेवा
वाराही पंचमी वाराही देवी संध्याकाल 108 दीपदान एवं चढ़ावा सेवा
वाराही पंचमी वाराही देवी संध्याकाल 108 दीपदान एवं चढ़ावा सेवा
वाराही पंचमी वाराही देवी संध्याकाल 108 दीपदान एवं चढ़ावा सेवा

वाराही पंचमी वाराही देवी संध्याकाल 108 दीपदान एवं चढ़ावा सेवा

🌅 दुर्लभ महा-संयोग - जब वाराही पंचमी शनिवार को आती है!
आषाढ़ शुक्ल पंचमी - यह केवल एक तिथि नहीं है। तंत्र शास्त्र और ललितोपाख्यान की परंपरा में मां वाराही को स्वयं 'पंचमी देवी' कहा गया है - पाँचों तत्वों की स्वामिनी, श्री ललिता त्रिपुरसुन्दरी की दिव्य सेना की सेनापति, गुप्त शत्रुओं की संहारक। और इस वर्ष 2026 में यह वाराही पंचमी शनिवार को आ रही है - शनिदेव के न्याय-दिवस पर मां वाराही की अपनी तिथि। यह संयोग वर्षों में एक बार बनता है।
🤔 यह संयोग क्यों है इतना दुर्लभ और प्रभावशाली?
आषाढ़ शुक्ल पंचमी (वाराही की अपनी तिथि) + शनिवार (कर्म और न्याय के देव का दिवस) + संध्याकाल (मां वाराही का सर्वोच्च उपासना काल) - इन तीनों का एक साथ आना अत्यंत दुर्लभ है। शास्त्रों में वर्णित है कि पंचमी तिथि नाग देवताओं की तिथि है, और मां वाराही नागशक्ति की अधिष्ठात्री होने के कारण इस दिन उनकी उपासना असाधारण फल देती है। शनिदेव कर्मफलदाता और न्यायाधीश हैं - जब शनि का दिन और मां का दिन एकसाथ आते हैं, तो शत्रु बाधा, राहु-केतु पीड़ा, काला जादू और कोर्ट-कचहरी के समस्त विवाद - माँ की एक ही दृष्टि में भस्म हो जाते हैं।
🐗 कौन हैं मां वाराही?
मां वाराही सप्तमातृकाओं में से एक हैं - भगवान वराह की शक्ति, वराहमुखी देवी जो वाराहासना पर विराजमान हैं। ललित सहस्रनाम की परंपरा में वे देवी ललिता की सेनापति हैं - जब देवासुर संग्राम में भंडासुर की सेना ने समस्त देवताओं को पराजित किया, तब मां वाराही ने अकेले उस समूची दैत्य-सेना का संहार किया। वे गुप्त शत्रुओं की नाशक हैं, रात्रि और संध्या की देवी हैं, नागशक्ति की स्वामिनी हैं। उनका उपासना काल संध्या से रात्रि तक है - इसीलिए देवीधुरा में संध्याकाल 108 दीपदान का यह अवसर अत्यंत सिद्ध और दुर्लभ है।
🛕 वाराही देवी मंदिर, देवीधुरा - 1000 वर्षों से जागृत, शत्रुंजय धाम :
उत्तराखंड के नैनीताल जनपद में 1850 मीटर की ऊँचाई पर सघन वनों के बीच स्थित यह प्राचीन मंदिर 1000 वर्षों से अगणित भक्तों की रक्षा का केंद्र है। माँ वाराही की प्रतिमा इतनी तेजोमयी और दिव्य है कि उसे ताम्रपत्र में आवृत रखा जाता है - माँ की सीधी दिव्य दृष्टि को आँखें सहन नहीं कर पातीं - ऐसी है उनकी अनंत शक्ति। जब कत्यूरी राजवंश पर शत्रुओं ने आक्रमण किया, तब राजाओं ने इन्हीं वनों में माँ का आश्रय लिया - माँ ने उन्हें अभय दिया, शत्रु परास्त हुए। तब से यह धाम भक्तों की रक्षा का, मनोकामनाओं की पूर्ति का अटूट केंद्र बना हुआ है।
🪔 108 दीपदान क्यों? - दीप-कवच मण्डल का रहस्य :
108 - यह अंक मां वाराही के 108 दिव्य नामों का प्रतीक है। घी के 108 दीप जब संध्याकाल में एकसाथ प्रज्वलित होते हैं तो एक 'दीप-कवच मण्डल' निर्मित होता है - जो भक्त के जीवन में माँ का स्थायी संरक्षण स्थापित करता है। हर दीप एक शत्रु का अंधेरा काटता है। हर दीप एक दोष को जलाता है। हर दीप एक मनौती को माँ के सामने रखता है। 108 दीपों की सम्मिलित लौ में माँ स्वयं विराजती हैं।
🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे वाराही पंचमी में सहभागी बनें :
देवीधुरा में वाराही देवी मंदिर तक पहुँचना हर भक्त के लिए संभव नहीं है - किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे इस पावन वाराही पंचमी संध्याकाल सेवा में सहभागी हो सकते हैं। मंदिर के प्रमाणित वैदिक पुरोहित आपके नाम और गोत्र से संकल्प लेकर सम्पूर्ण विधि-विधान से 108 दीपदान एवं चढ़ावा सेवा सम्पन्न कराएंगे। प्रत्येक सेवा का वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में आपके फोन पर प्राप्त होगा।
🙏 वर्ष का सबसे बड़ा वाराही उपासना मुहूर्त - शनिवार × वाराही पंचमी का यह दुर्लभ संयोग न चूकें! अभी बुक करें - मां वाराही का दीप-कवच, शत्रु-विजय और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त करें।
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श्री मंदिर ने श्रध्दालुओ, पंडितों, और मंदिरों को जोड़कर भारत में धार्मिक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया है। 100 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के साथ साझेदारी करके, हम विशेषज्ञ पंडितों द्वारा की गई विशेष पूजा और चढ़ावा सेवाएँ प्रदान करते हैं और पूर्ण की गई पूजा विधि का वीडियो शेयर करते हैं।

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