विंध्यवासिनी जयंती विशेष माँ विंध्यवासिनी शक्तिपीठ चढ़ावा
विंध्यवासिनी जयंती विशेष माँ विंध्यवासिनी शक्तिपीठ चढ़ावा
विंध्यवासिनी जयंती विशेष माँ विंध्यवासिनी शक्तिपीठ चढ़ावा
विंध्यवासिनी जयंती विशेष माँ विंध्यवासिनी शक्तिपीठ चढ़ावा
विंध्यवासिनी जयंती विशेष माँ विंध्यवासिनी शक्तिपीठ चढ़ावा
विंध्यवासिनी जयंती विशेष माँ विंध्यवासिनी शक्तिपीठ चढ़ावा

विंध्यवासिनी जयंती विशेष माँ विंध्यवासिनी शक्तिपीठ चढ़ावा

🔱✨ विंध्यवासिनी जयंती — वर्ष में एक बार आती है माँ की जन्म-तिथि — आज वह पावन दिन है!
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी — यह केवल एक तिथि नहीं — माँ विंध्यवासिनी की जन्मतिथि है। [1][2] इसी पावन अष्टमी को, द्वापर युग में, माँ योगमाया ने यशोदा माता की कोख से जन्म लिया था। जब अत्याचारी कंस ने शिशु-रूपा देवी के पैर पकड़कर उन्हें पत्थर पर पटकने का प्रयास किया — वे उसके हाथों से फिसल गईं, आकाश में उठीं, और अपने अष्टभुजा दिव्य स्वरूप में प्रकट हो हँसकर बोलीं — "हे कंस! जो तेरा काल बनने के लिए आया है, वह सुरक्षित है गोकुल में।" तत्पश्चात् उन्होंने विन्ध्य पर्वत को अपना शाश्वत निवास चुना। [2][3] यह उनका जन्मोत्सव है — और इस दिन उनकी अपनी पावन भूमि में किया गया चढ़ावा सर्वाधिक शक्तिशाली है। दुर्गा सप्तशती का स्पष्ट वचन है — "जो भक्त कृष्ण पक्ष की अष्टमी को देवी को अर्पण करे — देवी प्रसन्न होती हैं।" और जब यह अष्टमी स्वयं माँ की जन्म-तिथि हो — तो वह कृपा अनन्त गुना हो जाती है!
🔱 'सिद्ध पीठ' — 51 शक्तिपीठों से भी ऊपर!
भारत के 51 शक्तिपीठों में माँ सती के शरीर के अंग गिरे थे। किन्तु विन्ध्याचल उन सभी से भिन्न और विशिष्ट है। [3] यहाँ आदि परा-शक्ति अपने सम्पूर्ण रूप में स्वयं अवतरित हुई थीं — किसी शरीर-अंश के गिरने से नहीं, बल्कि अपनी स्वेच्छा से। [3] इसीलिए यह 'सिद्ध पीठ' है — जहाँ माँ की पूर्ण चेतना विराजमान है। [3] देवी भागवत पुराण की घोषणा है — "विन्ध्य पर्वत पृथ्वी का आध्यात्मिक हृदय है — यहाँ साधना और प्रार्थना का फल तीव्र गति से मिलता है।" [3] तांत्रिक ग्रन्थों में विन्ध्याचल को कामाख्या और ज्वालामुखी के साथ ब्रह्माण्ड के तीन महाशक्ति-त्रिकोण बिन्दुओं में से एक बताया गया है — पृथ्वी की तीन सर्वोच्च शक्ति-धाराओं का एक बिन्दु। [3]
🤔 त्रिशक्ति — एक स्थान पर तीनों दिव्य माताएँ क्यों?
विन्ध्याचल का सबसे अद्भुत रहस्य यह है — यहाँ एक ही धाम में माँ के तीनों महास्वरूप विराजमान हैं। [2][4] माँ विंध्यवासिनी मंदिर में महालक्ष्मी — धन, समृद्धि और कल्याण की देवी। काली खोह में महाकाली — शत्रु-नाश, बाधा-निवारण और आत्मबल की देवी। अष्टभुजा मंदिर में महासरस्वती — ज्ञान, विद्या और आत्मज्ञान की देवी। [4] इन तीनों का त्रिकोण पूर्ण करना चारों धामों की यात्रा के बराबर माना जाता है। [2][4] और विंध्यवासिनी जयंती पर माँ के चढ़ावे में सहभागी होना = तीनों स्वरूपों की एक साथ कृपा — महालक्ष्मी का धन + महाकाली की रक्षा + महासरस्वती का ज्ञान।
🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे — विंध्यवासिनी जयंती पर सिद्ध पीठ में चढ़ावा में सहभागी बनें!
विंध्यवासिनी जयंती पर विन्ध्याचल जाकर माँ को चढ़ावा अर्पण करना हर भक्त के लिए सम्भव नहीं है। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे इस महाचढ़ावे में सहभागी हो सकते हैं। शक्तिपीठ विंध्यवासिनी धाम के प्रमाणित वैदिक पुजारी जी आपके नाम-गोत्र से संकल्प लेकर विंध्यवासिनी जयंती के सिद्ध मुहूर्त में सम्पूर्ण विधि-विधान से चढ़ावा सम्पन्न करेंगे। चढ़ावे का वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में आपके फोन पर प्राप्त होगा।
🙏 विंध्यवासिनी जयंती वर्ष में केवल एक बार आती है। माँ की जन्म-तिथि पर — उनके अपने सिद्ध पीठ में — उनकी सम्पूर्ण त्रिशक्ति की उपस्थिति में — यह चढ़ावा अर्पण करें और माँ की अनन्त कृपा अपने जीवन में उतरने दें। अभी बुक करें!
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
अब तक1,50,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा संचालित चढ़ावा सेवा में भाग ले चुके है।
अपनी सेवा चुनें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों

srimandir-logo

श्री मंदिर ने श्रध्दालुओ, पंडितों, और मंदिरों को जोड़कर भारत में धार्मिक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया है। 100 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के साथ साझेदारी करके, हम विशेषज्ञ पंडितों द्वारा की गई विशेष पूजा और चढ़ावा सेवाएँ प्रदान करते हैं और पूर्ण की गई पूजा विधि का वीडियो शेयर करते हैं।

हमारा पता

फर्स्टप्रिंसिपल ऐप्सफॉरभारत प्रा. लि. 2nd फ्लोर, अर्बन वॉल्ट, नं. 29/1, 27वीं मेन रोड, सोमसुंदरपल्या, HSR पोस्ट, बैंगलोर, कर्नाटक - 560102
YoutubeInstagramLinkedinWhatsappTwitterFacebook