🪷 जिस मंदिर का नाम ही है "भोग + शयन" उसमें चढ़ावा उसी दिन
जब श्री हरि स्वयं शयन में जाते हैं। यह संयोग वर्ष में केवल एक बार होता है।
🔴 पद्मनाभन यह स्वरूप क्यों है देवशयनी एकादशी का सर्वोच्च प्रतीक?
भागवत पुराण और पद्म पुराण बताते हैं: जब सृष्टि के आरम्भ में सब कुछ जल था श्री हरि शेषनाग पर शयन में थे। उनकी
नाभि से कमल प्रकट हुआ। उस कमल से ब्रह्मा उत्पन्न हुए।
सम्पूर्ण सृष्टि इस शयन से ही निर्मित हुई। "पद्मनाभ" =
जिनकी नाभि से पद्म (कमल) प्रकट होता है। यह शयनस्वरूप
प्रभु का मूल, शाश्वत रूप है। देवशयनी एकादशी पर जब
श्री हरि योगनिद्रा में जाते हैं - वे इसी पद्मनाभस्वरूप में
लौटते हैं। पद्म पुराण का वचन: "पद्मनाभ के ध्यान से शाश्वत
शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।" आज उनके इसी रूप को
चढ़ावा चढ़ाना उनकी उस स्थिति को सम्मान देना है जिसमें
वे सृष्टि को धारण करते हैं।
🔴 काशी में भोग चढ़ावा यह सामान्य नहीं है
स्कंद पुराण, काशी खंड का वचन है: "भगवान विष्णु भक्तों पर
कृपालु होकर काशी में सदा विराजमान रहते हैं। शिव के साथ
मिलकर वे सभी प्राणियों को मोक्ष देते हैं।" काशी में दो
महान शक्तियाँ सदा सक्रिय हैं शिव तारक मंत्र देते हैं,
विष्णु मोक्ष देते हैं। इस नगरी में किया जाने वाला कोई भी
भक्तिकर्म चाहे छोटा हो या बड़ा इन दोनों शक्तियों के
साक्ष्य में संपन्न होता है। देवशयनी एकादशी पर काशी के
भोग शयन मंदिर में चढ़ावा = शिव + विष्णु + देवशयनी
एकादशी तीनों की एकसाथ कृपा।
🔴 इस चढ़ावे में सहभागी होने से आपको क्या मिलेगा?
पापनाश: काशी में चढ़ावा = स्कंद पुराण के अनुसार
समस्त पापों का क्षय।
मोक्षमार्ग: पद्मनाभन को अर्पण = पद्म पुराण के अनुसार
शाश्वत शांति और मोक्ष।
अश्वमेध पुण्य: देवशयनी एकादशी पर विष्णुचढ़ावा
= पद्म पुराण: अश्वमेध यज्ञ से बड़ा फल।
चातुर्मास कवच: शयन से पहले सेवा = 4 महीनों के लिए
प्रभु का संरक्षण।
🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे काशी के भोग शयन मंदिर में
देवशयनी एकादशी चढ़ावा:
काशी पहुँचना हर भक्त के लिए सम्भव नहीं। लेकिन श्री हरि
की कृपा की कोई सीमा नहीं। श्री मंदिर ऐप के माध्यम से
आपके नाम और गोत्र से मंदिर के प्रमाणित पुरोहित देवशयनी
एकादशी के सिद्ध मुहूर्त में सम्पूर्ण विधिविधान सहित
चढ़ावा सेवा सम्पन्न कराएँगे। वीडियो प्रमाण
24-48 घंटों में प्राप्त होगा।
🙏 वर्ष में एक बार जिस मंदिर का नाम "भोग शयन" है
वहाँ उसी दिन चढ़ावा जब श्री हरि शयन में जाते हैं।
यह संयोग कोई साधारण संयोग नहीं है। काशी के श्री विष्णु पद्मनाभन भोग शयन
मंदिर में देवशयनी एकादशी चढ़ावा में अभी सहभागी बनें।