निर्जला एकादशी त्रिविक्रम 108 तुलसी अर्चना एवं पंचामृत चढ़ावा
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निर्जला एकादशी त्रिविक्रम 108 तुलसी अर्चना एवं पंचामृत चढ़ावा
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निर्जला एकादशी त्रिविक्रम 108 तुलसी अर्चना एवं पंचामृत चढ़ावा

निर्जला एकादशी त्रिविक्रम 108 तुलसी अर्चना एवं पंचामृत चढ़ावा

🌺✨ वर्ष की सर्वोच्च एकादशी-निर्जला एकादशी! उसी भगवान के चरणों में जो इस एकादशी के अधिष्ठाता हैं - विष्णु त्रिविक्रम स्वरूप!
निर्जला एकादशी वर्ष की सबसे कठोर और सबसे पुण्यदायी एकादशी है। शास्त्रों में ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को 'त्रिविक्रमा एकादशी' भी कहा जाता है क्योंकि यही वह दिव्य पुण्यतिथि है जब भगवान विष्णु ने वामन त्रिविक्रम स्वरूप धारण कर महाराज बलि से तीन पगों में तीनों लोक वापस लिए थे। यही कारण है कि उन्हें इस एकादशी का अधिष्ठाता कहा जाता है।
🛕श्री दीर्घ विष्णु - वह स्वरूप जिसका वर्णन चारों पुराणों में है:
'दीर्घ' - वह विराट् विस्तृत रूप। जब भगवान ने 84 योजन का दीर्घ रूप धारण कर पृथ्वी को बचाया। जब भगवान ने वामन से त्रिविक्रम बनकर तीन पगों में सम्पूर्ण सृष्टि को नापा। नारद पुराण और वराह पुराण में स्पष्ट वर्णन है - "जो श्री दीर्घ विष्णु के दर्शन करता है, उसके समस्त पूर्वजन्मों के पाप भस्म हो जाते हैं।" 🌿 108 तुलसी अर्चना - शास्त्र का सर्वोत्तम निर्देश:
पद्म पुराण घोषित करता है - "तुलसी के बिना विष्णु की आराधना अधूरी है।" एकादशी पर 108 तुलसी से अर्चना करना भगवान को सम्पूर्ण भाव-समर्पण है। प्रत्येक तुलसी-पत्र की अर्चना एक जन्म के पाप को नष्ट करती है - 108 अर्चनाएँ = 108 जन्मों की कर्म-शुद्धि।
🥛पंचामृत चढ़ावा (पंचामृत-भाव) - पाँच-शक्ति आशीर्वाद:
मार्कंडेय पुराण और विष्णु पुराण में निर्जला एकादशी पर पंचामृत अभिषेक विशेष रूप से विहित है। दूध (पवित्रता), दही (समृद्धि), घृत (शक्ति-तेज), मधु (अनंत आनंद), शर्करा (जीवन की मधुरता) - ये पाँचों मिलकर पाँच प्रकार का दिव्य आशीर्वाद देते हैं।
🙏 निर्जला एकादशी वर्ष में एक बार आती है। उसी दिन मथुरा में - त्रिविक्रम के चरणों में जिनके लिए यह एकादशी है, 108 तुलसी की अर्चना और पंचामृत का प्रवाह आपके नाम से होगा। यह सबसे शास्त्र-सम्मत, सबसे सटीक और सबसे सम्पूर्ण चढ़ावा है - अभी बुक करें।
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अब तक1,50,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा संचालित चढ़ावा सेवा में भाग ले चुके है।
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