श्री कृष्ण जन्माष्टमी 21 वैष्णव ब्राह्मण भोजन सेवा
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श्री कृष्ण जन्माष्टमी 21 वैष्णव ब्राह्मण भोजन सेवा

श्री कृष्ण जन्माष्टमी 21 वैष्णव ब्राह्मण भोजन सेवा

🌸✨श्री कृष्ण के जन्मोत्सव पर उन्हीं की जन्मभूमि मथुरा में कृष्ण प्रिय 21 वैष्णव ब्राह्मणों को अपनी तरफ़ से भोजन सेवा प्रदान करें - जन्मों के कष्टों, पापों एवं दोषों से शांति पाकर मोक्ष का आशीर्वाद पाएं।
ऋग्वेद के पुरुष सूक्त में घोषणा है, "ब्राह्मणो अस्य मुखमासीत्" ब्राह्मण परमपुरुष का मुख है। इसी सिद्धान्त पर वैष्णव परम्परा की स्थापना है - "ब्राह्मण को भोजन कराने का अर्थ है, कृष्ण उस ब्राह्मण के मुख के द्वारा भोजन ग्रहण करते हैं।" शास्त्र यह भी कहते हैं, "ब्राह्मणों और वैष्णवों को भोजन कराना, अग्नि में आहुति देने से भी अधिक प्रभावशाली है।" क्योंकि अग्नि जड़ है, लेकिन वैष्णव ब्राह्मण साक्षात् ईश्वर का जीवित प्रतिनिधि है, और यह सेवा हो रही है कृष्ण के जन्मदिन पर श्रीमद् भागवतम् का प्रमाण है कि माता यशोदा ने कृष्ण के जन्मोत्सव पर स्वयं विद्वान ब्राह्मणों को अन्न-सेवा किया। जन्माष्टमी पर ब्राह्मण भोजन = माता यशोदा की पवित्र परंपरा का अनुसरण।
🏛️ विश्राम घाट - पुराणों में जिसकी महिमा तीन तीर्थों से बढ़कर है!
विश्राम घाट: मथुरा का हृदय, मथुरा परिक्रमा का प्रारम्भ और समापन। यही वह पवित्र तट है जहाँ श्रीकृष्ण ने अत्याचारी कंस का वध कर धर्म की विजय के बाद यमुना के पावन तट पर विश्राम किया। सौर पुराण की घोषणा है, "विश्रान्ति-तीर्थ समस्त पापों को नष्ट करता है और संसार के कष्टों से मुक्ति देता है।"
पद्म पुराण का प्रमाण है, "विश्राम घाट पर स्नान, माघ मेले में त्रिवेणी संगम के स्नान से 100 गुना अधिक श्रेष्ठ है।" स्कन्द पुराण का वचन है, "मथुरा में श्री कृष्ण की जन्मस्थली पर जहाँ विश्राम घाट जैसे तीर्थ हैं, वहाँ ऐसा कौन-सा फल है जो प्राप्त नहीं होता?" यहाँ ब्राह्मण भोजन = सर्वाधिक पवित्र स्थान एवं सर्वाधिक शक्तिशाली सेवा = अनन्त गुना पुण्य।
🤔 21 वैष्णव ब्राह्मण - सम्पूर्णता का दिव्य अंक क्यों?
21 = 3 × 7, तीन गुण (सत्व, रज, तम) × सात लोक। जब 21 ब्राह्मण एक साथ भोजन करते हैं, तीनों गुण-धाराएँ और सातों लोक एक साथ तृप्त होते हैं। पद्म पुराण का वचन है, "जिस घर में ब्राह्मण भोजन करे, वहाँ विष्णु स्वयं निवास करते हैं। साथ ही समस्त देव, पितर और दिव्य ऋषि भी।" 21 वैष्णव ब्राह्मणों को भोजन = सम्पूर्ण देव-मण्डल, पितृ-लोक और ऋषि-गण सभी की एक साथ तृप्ति प्रदान करता है।
कृष्ण के जन्मोत्सव पर 21 वैष्णव ब्राह्मणों की सेवा कर-कृष्ण को प्रत्यक्ष भोजन कराएँ और उनकी अनन्त कृपा अपने जीवन में लाएं। अभी बुक करें!
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