गुरु गोचर पीतांबर वस्त्र, शास्त्र-ज्ञान सामग्री व पीत-भोजन महा सेवा
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🪐✨ 12 वर्षों में केवल एक बार - जब गुरु अपनी उच्च राशि में आते हैं और साथ में पुरुषोत्तम मास भी हो! काशी की उस सुबह की कल्पना करें - जब गंगा की लहरें असी घाट की सीढ़ियों को छू रही हों, पुरोहितों के मंत्र-उच्चार आकाश में गूँज रहे हों, पीले वस्त्र पहने ब्राह्मण संकल्प के लिए हाथ उठाए बैठे हों - और उसी क्षण आसमान में देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश कर रहे हों। यह कोई साधारण दिन नहीं है। 🤔 क्यों है यह अवसर 12 वर्षों में एक बार? वैदिक ज्योतिष में गुरु (बृहस्पति) की उच्च राशि कर्क है। जब गुरु अपनी उच्च राशि में होते हैं, तो उनकी शक्ति सर्वोच्च होती है - ज्ञान, धन, धर्म, विवाह, संतान - सभी क्षेत्रों में उनकी अनुकम्पा सबसे अधिक सुलभ होती है। यह गोचर 2 जून 2026 को हो रहा है - ठीक 12 वर्षों बाद। गुरु का उच्च राशि प्रवेश + अधिक ज्येष्ठ मास (पुरुषोत्तम मास) का एक साथ होना - यह त्रि-संयोग अत्यंत दुर्लभ है। 📖 पुरुषोत्तम मास - एक सेवा, एक वर्ष का पुण्य: स्कंद पुराण में भगवान विष्णु स्वयं कहते हैं - "मल मास मेरा है। इस मास में की गई एक भी सेवा-पुण्य, पूरे वर्ष की सेवा के बराबर फल देता है।" जो मास संसार ने अशुभ माना - उसे विष्णु ने अपना नाम दिया और 'पुरुषोत्तम मास' बनाया। इस मास में सेवा और श्रद्धा का पुण्य-मान अनंतगुना है। 🛕 काशी के असी घाट पर सेवा क्यों? काशी खण्ड (स्कंद पुराण) में वर्णित है - "काश्यां दत्तं अक्षयं भवति" - काशी में की गई सेवा अक्षय (अविनाशी) होती है। असी घाट काशी का पवित्रतम दक्षिण-द्वार है - जहाँ माँ दुर्गा की शक्ति और गंगा का पावन प्रवाह एक साथ विद्यमान हैं। यहाँ किया गया ब्राह्मण-भोजन, वस्त्र-सेवा और ज्ञान-सेवा - तीनों का पुण्य सीधे गुरु-लोक में दर्ज होता है। 🌼 पाँच सेवाएँ - पाँच कारण - गुरु की पाँच कृपाएँ: पीतांबर वस्त्र → गुरु का वर्ण पीला है। पीत-वस्त्र की सेवा करने से गुरु प्रसन्न होते हैं और कुण्डली में गुरु की दशा बलवान होती है। शास्त्र-ग्रंथ → गुरु ज्ञान के देवता हैं। ग्रंथ-सेवा गुरु का सर्वश्रेष्ठ सम्मान है। शिक्षा-सामग्री → विद्यार्थी को ज्ञान-साधन देना = गुरु-सेवा का साक्षात् रूप। केला → पीत-फल, गुरु का प्रिय - केला सेवा करने से गुरु-दोष शांत होता है, पितृ-दोष भी। चना दाल / हल्दी / गुड़ / बेसन लड्डू → पीत-अन्न सेवा से कुण्डली का गुरु बलवान होता है - विवाह-बाधा, संतान-बाधा और धन-बाधा का निवारण होता है। 🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे असी घाट, काशी में सेवा: काशी के असी घाट पर स्वयं उपस्थित होकर सेवा करवाना सबके लिए संभव नहीं है। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे अपने नाम और गोत्र से यह पुण्य-सेवा करवा सकते हैं। अस्सी घाट के प्रमाणित वैदिक पुरोहित सम्पूर्ण विधि-विधान से आपके संकल्प के साथ सेवा सम्पन्न करेंगे। वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में प्राप्त होगा। 🙏12 वर्षों में एक बार आने वाले इस दुर्लभ त्रि-संयोग को न चूकें - उच्च गुरु गोचर × पुरुषोत्तम मास × काशी। अभी बुक करें - असी घाट, काशी में ब्राह्मण/जरूरतमंद महासेवा में सहभागी बनें और देवगुरु बृहस्पति की असीम कृपा प्राप्त करें। 🪐✨ 12 वर्षों में केवल एक बार - जब गुरु अपनी उच्च राशि में आते हैं और साथ में पुरुषोत्तम मास भी हो! काशी की उस सुबह की कल्पना करें - जब गंगा की लहरें असी घाट की सीढ़ियों को छू रही हों, पुरोहितों के मंत्र-उच्चार आकाश में गूँज रहे हों, पीले वस्त्र पहने ब्राह्मण संकल्प के लिए हाथ उठाए बैठे हों - और उसी क्षण आसमान में देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश कर रहे हों। यह कोई साधारण दिन नहीं है। 🤔 क्यों है यह अवसर 12 वर्षों में एक बार? वैदिक ज्योतिष में गुरु (बृहस्पति) की उच्च राशि कर्क है। जब गुरु अपनी उच्च राशि में होते हैं, तो उनकी शक्ति सर्वोच्च होती है - ज्ञान, धन, धर्म, विवाह, संतान - सभी क्षेत्रों में उनकी अनुकम्पा सबसे अधिक सुलभ होती है। यह गोचर 2 जून 2026 को हो रहा है - ठीक 12 वर्षों बाद। गुरु का उच्च राशि प्रवेश + अधिक ज्येष्ठ मास (पुरुषोत्तम मास) का एक साथ होना - यह त्रि-संयोग अत्यंत दुर्लभ है। 📖 पुरुषोत्तम मास - एक सेवा, एक वर्ष का पुण्य: स्कंद पुराण में भगवान विष्णु स्वयं कहते हैं - "मल मास मेरा है। इस मास में की गई एक भी सेवा-पुण्य, पूरे वर्ष की सेवा के बराबर फल देता है।" जो मास संसार ने अशुभ माना - उसे विष्णु ने अपना नाम दिया और 'पुरुषोत्तम मास' बनाया। इस मास में सेवा और श्रद्धा का पुण्य-मान अनंतगुना है। 🛕 काशी के असी घाट पर सेवा क्यों? काशी खण्ड (स्कंद पुराण) में वर्णित है - "काश्यां दत्तं अक्षयं भवति" - काशी में की गई सेवा अक्षय (अविनाशी) होती है। असी घाट काशी का पवित्रतम दक्षिण-द्वार है - जहाँ माँ दुर्गा की शक्ति और गंगा का पावन प्रवाह एक साथ विद्यमान हैं। यहाँ किया गया ब्राह्मण-भोजन, वस्त्र-सेवा और ज्ञान-सेवा - तीनों का पुण्य सीधे गुरु-लोक में दर्ज होता है। 🌼 पाँच सेवाएँ - पाँच कारण - गुरु की पाँच कृपाएँ: पीतांबर वस्त्र → गुरु का वर्ण पीला है। पीत-वस्त्र की सेवा करने से गुरु प्रसन्न होते हैं और कुण्डली में गुरु की दशा बलवान होती है। शास्त्र-ग्रंथ → गुरु ज्ञान के देवता हैं। ग्रंथ-सेवा गुरु का सर्वश्रेष्ठ सम्मान है। शिक्षा-सामग्री → विद्यार्थी को ज्ञान-साधन देना = गुरु-सेवा का साक्षात् रूप। केला → पीत-फल, गुरु का प्रिय - केला सेवा करने से गुरु-दोष शांत होता है, पितृ-दोष भी। चना दाल / हल्दी / गुड़ / बेसन लड्डू → पीत-अन्न सेवा से कुण्डली का गुरु बलवान होता है - विवाह-बाधा, संतान-बाधा और धन-बाधा का निवारण होता है। 🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे असी घाट, काशी में सेवा: काशी के असी घाट पर स्वयं उपस्थित होकर सेवा करवाना सबके लिए संभव नहीं है। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे अपने नाम और गोत्र से यह पुण्य-सेवा करवा सकते हैं। अस्सी घाट के प्रमाणित वैदिक पुरोहित सम्पूर्ण विधि-विधान से आपके संकल्प के साथ सेवा सम्पन्न करेंगे। वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में प्राप्त होगा। 🙏12 वर्षों में एक बार आने वाले इस दुर्लभ त्रि-संयोग को न चूकें - उच्च गुरु गोचर × पुरुषोत्तम मास × काशी। अभी बुक करें - असी घाट, काशी में ब्राह्मण/जरूरतमंद महासेवा में सहभागी बनें और देवगुरु बृहस्पति की असीम कृपा प्राप्त करें।
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