🌺✨ महानवरात्रि महाअष्टमी नवरात्रि की नौ रातों में सबसे शक्तिशाली दिन और इस दिन 8 शक्तिपीठों पर एक साथ कुमकुम-चुनरी महार्पण 8 दिशाओं से माँ का अभेद्य कवच!
🤔 8 शक्तिपीठ क्यों और 'अष्ट-दिक् कवच' क्या है?
हिन्दू ब्रह्मांड विज्ञान में ब्रह्मांड की 8 दिशाओं के 8 दिव्य रक्षक विराजते हैं अष्ट दिक्पाल। पूर्व में इन्द्र, दक्षिण में यम, पश्चिम में वरुण, उत्तर में कुबेर और चार विदिशाओं में अग्नि, निऋति, वायु, ईशान। जब 8 शक्तिपीठों पर एकसाथ माँ की पूजा होती है अष्ट दिक्पाल स्वयं माँ के सम्मुख झुकते हैं और भक्त की 8 दिशाओं से रक्षा करते हैं। जीवन की कोई भी दिशा से कोई भी बाधा, कोई भी शत्रु, कोई भी कष्ट आप तक नहीं पहुँच सकता।
🌺 कुमकुम और चुनरी माँ की दो सर्वप्रिय सामग्री एक साथ क्यों?
कुमकुम माँ दुर्गा का अपना रंग, सिन्दूरी लाल, उनकी शक्ति, विजय और सौभाग्य का प्रतीक। जो माँ को कुमकुम अर्पित करता है, माँ उस भक्त को कभी भी जीवन में हारने नहीं देती और उसकी सभी समस्याओं का समाधान स्वयं तय करती हैं।
चुनरी माँ का दिव्य आँचल। जो माँ को चुनरी अर्पित करता है, 'माँ उस भक्त को अपने आँचल की छाया में ले लेती हैं। 'एक तरफ कुमकुम माँ की शक्ति जागृत, तो वहीं दूसरी तरफ चुनरी माँ का संरक्षण स्वीकार। दोनों एकसाथ सम्पूर्ण माँ-स्वीकृति भक्त माँ की सन्तान बन जाता है।
🏛️ ये 8 शक्तिपीठ क्यों विशेष हैं?
इन 8 शक्तिपीठों में माँ सती के 8 अलग-अलग पवित्र अंग गिरे थे। तृतीय नेत्र (तारापीठ), पाद-अंगुलियाँ (कालीघाट), स्तन (मंगला गौरी), सह-शरीर (विंध्यवासिनी), नेत्र (अम्बाबाई), हस्त-अंगुलियाँ (ललिता देवी), दायाँ टखना (भद्रकाली), केशपाश (उमा कात्यायनी)। ये 8 पीठ मिलकर माँ सती का 'अष्ट-दिक् दिव्य शरीर' बनाते हैं। 8 दिशाओं में माँ के 8 अंग 8 दिशाओं से माँ की सम्पूर्ण उपस्थिति।
🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे 8 शक्तिपीठों पर महाअष्टमी में महार्पण:
एक ही दिन में कोल्हापुर से कोलकाता तक, गया से कुरुक्षेत्र तक 8 शक्तिपीठों की यात्रा करना किसी के लिए सम्भव नहीं। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे महाअष्टमी के सिद्ध मुहूर्त में अपने नाम से आठों शक्तिपीठों पर कुमकुम-चुनरी महार्पण करवा सकते हैं। प्रत्येक मंदिर के प्रमाणित वैदिक पुरोहित सम्पूर्ण विधि-विधान से अर्पण सम्पन्न कराएंगे। वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में प्राप्त होगा।
🙏 महाअष्टमी वर्ष में एक बार आती है और यह नवरात्रि का सर्वोच्च दिन है। 8 शक्तिपीठों पर कुमकुम-चुनरी महाअर्पण का यह अवसर न चूकें। अभी संकल्प करें - 8 दिशाओं से माँ का अभेद्य कवच प्राप्त करें।