देवशयनी एकादशी सप्त तीर्थ दिव्य महा चढ़ावा
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देवशयनी एकादशी सप्त तीर्थ दिव्य महा चढ़ावा
देवशयनी एकादशी सप्त तीर्थ दिव्य महा चढ़ावा
देवशयनी एकादशी सप्त तीर्थ दिव्य महा चढ़ावा
देवशयनी एकादशी सप्त तीर्थ दिव्य महा चढ़ावा
देवशयनी एकादशी सप्त तीर्थ दिव्य महा चढ़ावा

देवशयनी एकादशी सप्त तीर्थ दिव्य महा चढ़ावा

🪷✨देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु योगनिद्रा में जा रहे हैं। उनके शयन से पूर्व, अपनी प्रार्थनाओं को सौंपें 'विष्णु सप्त तीर्थ' के चरणों में। पूरे चातुर्मास के लिए पाएं श्री हरि का साया और उनके 7 स्वरूपों का असीम वात्सल्य। प्रभु के सोने से पहले, उनके हृदय में अपनी जगह पक्की करें।
🔴 देवशयनी एकादशी क्यों है वर्ष की सबसे बड़ी तिथि?
आषाढ़ शुक्ल एकादशी - यह वह दिन है जब भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं। आज से चातुर्मास आरम्भ होता है। अगले 4 महीनों तक विवाह, गृहप्रवेश, मंगलाचरण बंद।
वह द्वार जिससे भगवान विष्णु भक्त की प्रार्थना सुनकर सीधे उत्तर देते हैं वह बंद हो जाएगा। देवशयनी एकादशी का दिन इसीलिए शास्त्रों में अश्वमेध यज्ञ से बड़ा बताया गया है। स्वयं श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा: "यह एकादशी पुण्यपुंज देनेवाली, सर्वपापनाशक और स्वर्ग-मोक्ष देनेवाली है। इसे रखने से तीनों लोकों के सभी तीर्थों का फल मिलता है।"
🔴एक साथ 7 विष्णु-धामों पर चढ़ावा - यह इतना दुर्लभ क्यों है?
भगवान विष्णु 7 अलग-अलग रूपों में - पादनाभ, विराट, भोग-बिहारी, युगल, शयन, कामद और कलियुग-पति - 7 पवित्र धामों में विराजमान हैं। सामान्यतः इनमें से किसी एक मंदिर तक पहुँचकर चढ़ावा करना भी बड़ा सौभाग्य है। किसी एक ही दिन गया, मथुरा, वृन्दावन, पन्ना, काशी, चित्रकूट और हैदराबाद - सातों धामों पर शारीरिक रूप से उपस्थित होकर चढ़ावा देना किसी भी व्यक्ति के लिए संभव नहीं।
ऐसे में देवशयनी एकादशी पर श्री मंदिर ऐप के माध्यम से यह असंभव संभव हो रहा है। एक संकल्प से - आपके नाम और गोत्र से भगवान विष्णु के 7 स्वरूपों को एकसाथ प्रसन्न करने का यह अवसर वर्ष में केवल इसी एकादशी पर मिलता है।
🔴 देवशयनी एकादशी पर ही क्यों?
देवशयनी एकादशी के बाद से चातुर्मास शुरू - 4 महीने के लिए भगवान विष्णु का योगनिद्रा में चले जाएँगे। अगला अवसर देवउठनी एकादशी के बाद। इन 4 महीनों में यदि जीवन में कोई अटकाव है, कोई समस्या है, कोई मनोकामना है- तो आज का यह सप्त-तीर्थ चढ़ावा उस अटकाव के बीच भगवान विष्णु का संरक्षण-कवच बन जाता है। जो आज नहीं किया, वह 4 महीने प्रतीक्षा।
🙏देवशयनी एकादशी वर्ष में एक बार आती है। 7 धाम, 7 स्वरूप, 7 कृपाएँ - एक दिन, एक संकल्प। श्री हरि के योगनिद्रा में जाने से पहले सप्त-तीर्थ महा चढ़ावा करें - अभी सहभागी बनें।
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अब तक1,50,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा संचालित चढ़ावा सेवा में भाग ले चुके है।
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