🙏 इस बसंत पंचमी, अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि में विराजमान रामलला को राजसी 56 भोग अर्पित कर अपनी भक्ति को शबरी जैसा अमर बनाएं।
🔱 बसंत पंचमी और श्रीराम: शबरी के प्रेम का प्रतीक!
🌺 बसंत पंचमी सिर्फ ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं, बल्कि "भक्ति के बसंत" के आगमन का प्रतीक है। मान्यताओं के अनुसार, इसी वसंत ऋतु के सुहावने वातावरण में माता शबरी की युगों पुरानी प्रतीक्षा समाप्त हुई थी और प्रभु श्रीराम ने उनके जूठे बेरों को 56 भोग से भी अधिक चाव से स्वीकार किया था।
✨ शबरी के लिए राम का आगमन ही उनका असली 'बसंत' था। आज वही अवसर आपके पास है! तब प्रभु वनवास में थे, तो कंद-मूल स्वीकारे; आज प्रभु अपने भव्य महल में राजा हैं, इसलिए उन्हें राजसी 56 भोग अर्पित करना ही सर्वोत्तम सेवा है।
🛕 श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या ही इस महासेवा के लिए सर्वोच्च क्यों है?
🪷 अयोध्या वह भूमि है जहाँ रघुकुल के सूर्य का उदय हुआ। शास्त्रों में कहा गया है कि "जन्मभूमि मम पूरी सुहावन" अर्थात्, प्रभु को अपनी जन्मभूमि सबसे प्रिय है। यहाँ शबरी जैसी निष्ठा के साथ अर्पित किया गया भोग सीधे रामलला के हृदय तक पहुँचता है।
✨ 56 भोग महा सेवा साधक को कैसे आशीर्वाद देती है?
📿 जब मंदिर के पुरोहितजी गर्भगृह में आपके नाम से यह राजसी भोग अर्पित करते हैं, तो प्रभु उसी प्रेम से उसे ग्रहण करते हैं जैसे उन्होंने शबरी का आतिथ्य स्वीकार किया था। इस अर्पण से
🔸 अन्नपूर्णा कृपा: घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती।
🔸 पारिवारिक प्रेम: जैसे शबरी को प्रभु का प्रेम मिला, वैसे ही कुल में प्रेम बढ़ता है।
🔸 मोक्ष का मार्ग: राम कृपा से जीवन के सारे अभाव, 'भाव' में बदल जाते हैं।
🙏 इस बसंत पंचमी, सिर्फ फूल नहीं, 'तृप्ति' अर्पित करें! आज ही 56 भोग सेवा बुक करें।







हम एक लाभकारी (For-Profit) तकनीकी कंपनी हैं, जो मंदिरों एवं/या पंजीकृत चैरिटेबल संस्थाओं (जैसे NGOs, सेक्शन 8 कंपनियाँ एवं ट्रस्ट्स) के लिए स्वैच्छिक दान के संग्रह और वितरण की प्रक्रिया को सुगम बनाती है। हम अपनी सेवाओं के लिए एक मामूली सेवा/प्रोसेसिंग शुल्क (यदि लागू हो) लेते हैं, और सभी लेन-देन पूर्णतः सुरक्षित एवं पारदर्शी होते हैं। हमारी भूमिका केवल दानकर्ताओं और दान प्राप्त करने वाली संस्थाओं के बीच सुरक्षित एवं पारदर्शी लेन-देन को सक्षम बनाने तक सीमित है। हम FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) के अंतर्गत अनुमति के बिना किसी भी विदेशी अंशदान को न तो आमंत्रित करते हैं और न ही स्वीकार करते हैं।
हम स्वयं को चैरिटेबल ट्रस्ट, धार्मिक न्यास या गैर-लाभकारी संस्था के रूप में प्रस्तुत नहीं करते हैं, जब तक कि ऐसा स्पष्ट रूप से उल्लेखित न हो और वह संस्था प्रासंगिक कानूनों के अंतर्गत विधिवत पंजीकृत न हो। आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80G के अंतर्गत कर छूट केवल तभी लागू होती है, जब दान प्राप्त करने वाली NGO के पास वैध 80G प्रमाणपत्र हो और उसने उसी के अनुरूप रसीद जारी की हो। हम किसी भी कर लाभ की गारंटी नहीं देते, जब तक कि उसे स्पष्ट रूप से उल्लेखित न किया गया हो। हमारे प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करके, आप यह स्वीकार करते हैं कि आपका दान स्वैच्छिक है और आप स्वयं अपने दान से जुड़े कानूनी, कर एवं वित्तीय प्रभावों की पुष्टि करने के लिए पूर्णतः जिम्मेदार हैं।
चढ़ावा बुकिंग के बाद आपको व्हाट्सऐप के माध्यम से जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा, आप श्री मंदिर ऐप में "चढ़ावा बुकिंग" सेक्शन में जाकर अपने चढ़ावे की पूरी जानकारी देख सकते हैं।
श्री मंदिर एक ऐसा एप्लिकेशन है जो भारत के 100 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों में घर बैठे चढ़ावा चढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।आप एक से अधिक चढ़ावे चुन सकते हैं और इन्हें एक ही ऑर्डर में शामिल कर सकते हैं।
यदि आपके चढ़ावे में कोई भी समस्या हो, तो आप हमारी श्री मंदिर ग्राहक सेवा टीम से 💬7829661119, 📞 08071174417 पर संपर्क कर सकते हैं, जो आपकी सहायता के लिए तत्पर है।
हम एक लाभकारी (For-Profit) तकनीकी कंपनी हैं, जो मंदिरों एवं/या पंजीकृत चैरिटेबल संस्थाओं (जैसे NGOs, सेक्शन 8 कंपनियाँ एवं ट्रस्ट्स) के लिए स्वैच्छिक दान के संग्रह और वितरण की प्रक्रिया को सुगम बनाती है। हम अपनी सेवाओं के लिए एक मामूली सेवा/प्रोसेसिंग शुल्क (यदि लागू हो) लेते हैं, और सभी लेन-देन पूर्णतः सुरक्षित एवं पारदर्शी होते हैं। हमारी भूमिका केवल दानकर्ताओं और दान प्राप्त करने वाली संस्थाओं के बीच सुरक्षित एवं पारदर्शी लेन-देन को सक्षम बनाने तक सीमित है। हम FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) के अंतर्गत अनुमति के बिना किसी भी विदेशी अंशदान को न तो आमंत्रित करते हैं और न ही स्वीकार करते हैं।
हम स्वयं को चैरिटेबल ट्रस्ट, धार्मिक न्यास या गैर-लाभकारी संस्था के रूप में प्रस्तुत नहीं करते हैं, जब तक कि ऐसा स्पष्ट रूप से उल्लेखित न हो और वह संस्था प्रासंगिक कानूनों के अंतर्गत विधिवत पंजीकृत न हो। आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80G के अंतर्गत कर छूट केवल तभी लागू होती है, जब दान प्राप्त करने वाली NGO के पास वैध 80G प्रमाणपत्र हो और उसने उसी के अनुरूप रसीद जारी की हो। हम किसी भी कर लाभ की गारंटी नहीं देते, जब तक कि उसे स्पष्ट रूप से उल्लेखित न किया गया हो। हमारे प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करके, आप यह स्वीकार करते हैं कि आपका दान स्वैच्छिक है और आप स्वयं अपने दान से जुड़े कानूनी, कर एवं वित्तीय प्रभावों की पुष्टि करने के लिए पूर्णतः जिम्मेदार हैं।