जन्माष्टमी श्री कृष्ण प्रिय 101 गौ माता महासेवा
जन्माष्टमी श्री कृष्ण प्रिय 101 गौ माता महासेवा
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जन्माष्टमी श्री कृष्ण प्रिय 101 गौ माता महासेवा
जन्माष्टमी श्री कृष्ण प्रिय 101 गौ माता महासेवा
जन्माष्टमी श्री कृष्ण प्रिय 101 गौ माता महासेवा
जन्माष्टमी श्री कृष्ण प्रिय 101 गौ माता महासेवा

जन्माष्टमी श्री कृष्ण प्रिय 101 गौ माता महासेवा

🦚गोलोक के स्वामी श्री कृष्ण के जन्मोत्सव पर वृन्दावन (जिसे पृथ्वी का गोलोक कहा जाता है) - जहाँ बाल-कृष्ण स्वयं प्रतिदिन प्रातःकाल गायों को लेकर वन-वन घूमते थे और यहाँ की हर गाय कृष्ण की अपनी 'प्रिया' है - वहाँ श्री कृष्ण प्रिय गौ माताओं की सेवा करें।
जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में, निशीथ काल की बेला एवं रोहिणी नक्षत्र के दुर्लभ संयोग में, देवकी माता की कोख से जगत के पालनहार का जन्म हुआ। शास्त्र इस संयोग को 'जन्माष्टमी' (कृष्ण जन्म की अष्टमी तिथि) कहते हैं और घोषणा करते हैं कि इस दिन की जाने वाली सेवा का पुण्य अनन्त गुना हो जाता है।
🐄 कृष्ण की सेवा का सबसे सीधा, सबसे प्रिय मार्ग गौ माता की सेवा!
भगवद् गीता के दशम अध्याय, 28वें श्लोक में स्वयं श्रीकृष्ण ने कहा "धेनूनाम् अस्मि कामधुक्" - "गायों में मैं कामधेनु हूँ।" स्कन्द पुराण ने घोषणा की "गौ सेवा से प्राप्त पुण्य अश्वमेध यज्ञ के समान है।" और यह केवल शास्त्र-वाक्य नहीं, कृष्ण के तीन सर्वाधिक प्रसिद्ध नाम स्वयं साक्षी हैं: गोपाल - गायों के पालनहार, गोविन्द - गायों को आनन्द देने वाले, गोवर्धनधारी - गायों की रक्षा के लिए सात दिन तक पर्वत उठाने वाले। तीनों नामों में 'गो' है। जब आप गौ माता की सेवा करते हैं, वह सेवा सीधे उनके चरणों तक पहुँचती है।
🤔 101 गौ माता यह संख्या इतनी पवित्र क्यों है?
हिन्दू परम्परा में संख्याएँ केवल गिनती नहीं, वे धर्म का बोध हैं। 100 = 'शतम्' - सम्पूर्णता। वेदों में "शतं जीव शरदः" सम्पूर्ण आयु का आशीर्वाद है। 1 = 'एकम्' कृष्ण स्वयं, "एकम् एवाद्वितीयम् ब्रह्म।" 100 + 1 = 101 वह सेवा जो सम्पूर्णता को लाँघकर ईश्वर तक पहुँचती है। जैसे दक्षिणा सदा '₹101' या '₹1001' होती है, वह '1' ईश्वर का अंश है। 101 गौ माता की सेवा = पूर्ण सेवा जिसमें कृष्ण का स्पर्श है।
🛕 श्री धाम गौशाला, वृन्दावन - जहाँ हर गाय कृष्ण की 'प्रिया' है!
वृन्दावन, वह अलौकिक भूमि जहाँ बाल-कृष्ण की बाँसुरी की धुन आज भी वायु में गूँजती है, जहाँ हर कण में उनकी स्मृति है। श्री धाम गौशाला की 101 गौ माताएँ गोकुल-वृन्दावन की सुरभि-परम्परा की वंशज हैं, कृष्ण की अपनी गोकुल-लीला का जीवित स्वरूप। वृन्दावन में गौ माता की सेवा करना = साक्षात् गोलोक को स्पर्श करना।
जन्माष्टमी पर वृन्दावन जाकर 101 गायों की सेवा करना किसी भी एक भक्त के लिए सम्भव नहीं है किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे इस महासेवा में सहभागी हो सकते हैं। श्री धाम गौशाला के प्रमाणित वैदिक पुजारी जी आपके नाम से संकल्प लेकर जन्माष्टमी के सिद्ध जयंती योग मुहूर्त में सम्पूर्ण विधि-विधान से 101 गौ माताओं की सेवा सम्पन्न करेंगे। गौ सेवा का वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में आपके फोन पर प्राप्त होगा।
🙏जन्माष्टमी पर वृन्दावन में 101 गौ माताओं की महासेवा का यह अवसर वर्षों में एक बार आता है। कृष्ण के जन्म के सिद्ध मुहूर्त में उनकी अपनी पावन भूमि पर उनकी प्रिय गायों की सेवा करें और उनकी अनन्त कृपा अपने जीवन में उतरने दें। अभी बुक करें!
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