अहोई अष्टमी पर काशी के दुर्गा कुंड में विराजमान दस भुजाओं वाली माँ दुर्गा से अपने संतान की संपूर्ण सुरक्षा का आशीर्वाद पाएं - उसे हर बुरी नज़र, और काल से सुरक्षित रखें।
🌟जब माता की श्रद्धा ने काल को भी पराजित किया - अहोई अष्टमी की पवित्र कथा
एक साहूकार की बहू दीपावली से पहले घर को लीपने के लिए जंगल में मिट्टी खोदने गई। खोदते समय अनजाने में उसकी कुदाल से एक साही के बच्चे मर गए। साही माता का श्राप लगा और एक-एक कर उसके सातों पुत्र मृत्यु को प्राप्त होते गए। दुःख से टूटी वह माता बुजुर्गों के पास गई। उन्होंने कहा कार्तिक कृष्ण अष्टमी को अहोई माता की आराधना कर उनसे क्षमा माँगो। उस माता ने पूरी श्रद्धा से व्रत रखा, तारों को अर्घ्य दिया। अहोई माता प्रसन्न हुईं उसके सातों पुत्र जीवित हो गए। तब से यह दिन हर माँ के लिए उसकी संतान को काल से बचाने का सबसे पवित्र दिन बन गया।
🛕दुर्गा कुण्ड मंदिर, काशी माँ दुर्गा का स्वयंभू जागृत शक्ति-केंद्र
काशी के लाल मंदिर दुर्गा कुण्ड मंदिर में विराजमान माँ दुर्गा की प्रतिमा स्वयंभू है किसी मानव ने नहीं गढ़ी, स्वयं देवी यहाँ प्रकट हुईं। यहाँ माँ दुर्गा कुशमाण्डा देवी के रूप में भी पूजी जाती हैं ब्रह्माण्ड की सृजनशक्ति का स्वरूप। मंदिर के साथ लगा दुर्गा कुण्ड जो कभी पवित्र गंगा से जुड़ा था एक विशेष स्त्री-शक्ति का केंद्र है जहाँ सदियों से माताएं संतान-सुख और संतान-सुरक्षा की कामना लेकर आती रही हैं।
🔱माँ दुर्गा की दस भुजाएं संतान की दस दिशाओं से सुरक्षा
दुर्गा कुण्ड में विराजमान माँ दुर्गा दस भुजाओं में दस दिव्य अस्त्र धारण करती हैं। यह दस भुजाएं दस दिशाओं का प्रतीक हैं पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, ईशान, आग्नेय, नैऋत्य, वायव्य, ऊर्ध्व और अधो। जब आप यहाँ अपनी संतान की रक्षा के लिए संकल्प लेते हैं, तो माँ दुर्गा की दस भुजाएं आपकी संतान के चारों ओर दस-दिशाओं का अभेद्य कवच बनाती हैं। नज़र दोष हो, ग्रह-दोष हो, कुल-दोष हो, शत्रु बाधा हो या कोई अज्ञात संकट माँ दुर्गा के इस दस-दिशा कवच को कोई नहीं भेद सकता।
🙏इस अहोई अष्टमी काशी के स्वयंभू दुर्गा कुण्ड में अपनी संतान के नाम से माँ दुर्गा के चरणों में अर्पण करें। माँ दुर्गा की दस भुजाएं आपकी संतान के चारों ओर अभेद्य कवच बनाएं हर नज़र, हर संकट, हर बाधा से।