🔱 भोलेनाथ की शरण में आएं! मोक्षनगरी काशी में 'रक्षा महासेवा' संपन्न करें, जहाँ महादेव कर्म-बंधनों को काटकर, संकटों का नाश करते हैं और भक्तों को अभय प्रदान करते हैं।
🙏 महादेव की सेवा क्यों अनिवार्य है?
🌺 पुराणों में महादेव को 'भोलेनाथ' कहा गया है; वे जो सच्ची सेवा से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। महामृत्युंजय जाप, चढ़ावा और तर्पण जैसे अनुष्ठान कर्म-कष्टों को कम करने, अकाल मृत्यु या अज्ञात भय से रक्षा करने और जीवन में संतुलन लाने के लिए अमोघ माने जाते हैं।
🙏 महाशिवरात्रि का पर्व इतना शक्तिशाली क्यों है?
✨ महाशिवरात्रि शिव और शक्ति के दिव्य मिलन तथा 'लिंगोद्भव' का वह पवित्र क्षण है, जब महादेव अनंत ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। शास्त्रों के अनुसार, इस कालरात्रि में भगवान शिव सर्वाधिक जाग्रत और सुलभ होते हैं; वे पूर्ण श्रद्धा व भक्ति से अर्पित की गई प्रत्येक सेवा को स्वयं स्वीकार करते हैं।
🙏 काशी में ही यह महासेवा क्यों करें?
🛕 स्कंद पुराण के अनुसार, काशी साक्षात् 'मोक्ष नगरी' है, जहाँ महादेव मुक्तिदाता के रूप में सदैव वास करते हैं। यहाँ अर्पित की गई सेवा अक्षय पुण्य और मोक्ष का आशीर्वाद प्रदान करती है, जो इस महासेवा को सुरक्षा, मानसिक स्पष्टता और आध्यात्मिक स्वतंत्रता का सबसे शक्तिशाली माध्यम बनाती है।
✨ इस सेवा में आप जो भी बुक करते हैं, वह केवल आपकी व्यक्तिगत सेवा नहीं होती - आपकी भागीदारी हमें इस पुण्य कार्य को और अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करती है। यह योगदान किसी एक की नहीं, बल्कि एक सामूहिक सेवा का हिस्सा है।







"हम एक लाभकारी (For-Profit) तकनीकी कंपनी हैं, जो मंदिरों एवं/या पंजीकृत चैरिटेबल संस्थाओं (जैसे NGOs, सेक्शन 8 कंपनियाँ एवं ट्रस्ट्स) के लिए स्वैच्छिक दान के संग्रह और वितरण की प्रक्रिया को सुगम बनाती है। हम अपनी सेवाओं के लिए एक मामूली सेवा/प्रोसेसिंग शुल्क (यदि लागू हो) लेते हैं, और सभी लेन-देन पूर्णतः सुरक्षित एवं पारदर्शी होते हैं। हमारी भूमिका केवल दानकर्ताओं और दान प्राप्त करने वाली संस्थाओं के बीच सुरक्षित एवं पारदर्शी लेन-देन को सक्षम बनाने तक सीमित है। हम FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) के अंतर्गत अनुमति के बिना किसी भी विदेशी अंशदान को न तो आमंत्रित करते हैं और न ही स्वीकार करते हैं।"
"हम स्वयं को चैरिटेबल ट्रस्ट, धार्मिक न्यास या गैर-लाभकारी संस्था के रूप में प्रस्तुत नहीं करते हैं, जब तक कि ऐसा स्पष्ट रूप से उल्लेखित न हो और वह संस्था प्रासंगिक कानूनों के अंतर्गत विधिवत पंजीकृत न हो। आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80G के अंतर्गत कर छूट केवल तभी लागू होती है, जब दान प्राप्त करने वाली NGO के पास वैध 80G प्रमाणपत्र हो और उसने उसी के अनुरूप रसीद जारी की हो। हम किसी भी कर लाभ की गारंटी नहीं देते, जब तक कि उसे स्पष्ट रूप से उल्लेखित न किया गया हो। हमारे प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करके, आप यह स्वीकार करते हैं कि आपका दान स्वैच्छिक है और आप स्वयं अपने दान से जुड़े कानूनी, कर एवं वित्तीय प्रभावों की पुष्टि करने के लिए पूर्णतः जिम्मेदार हैं।"
चढ़ावा बुकिंग के बाद आपको व्हाट्सऐप के माध्यम से जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा, आप श्री मंदिर ऐप में "चढ़ावा बुकिंग" सेक्शन में जाकर अपने चढ़ावे की पूरी जानकारी देख सकते हैं।
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