भक्ति की सबसे ऊँची पराकाष्ठा! जहाँ साक्षात नारायण अपनी माँ के प्रेम के वशीभूत होकर ओखली से बँध गए, उसी यशोदा जयंती पर चढ़ाव एवं सेवा अर्पित कर कान्हा का आशीष पाएं।
शास्त्र कहते हैं कि जिन्हें पाना बड़े-बड़े योगियों के लिए भी अत्यंत कठिन है, उन नारायण को मैय्या यशोदा के वात्सल्य ने प्रेम की डोर से बाँध दिया। यह उत्सव है उस ममता का, जिसके सामने ईश्वर भी नतमस्तक हो जाते हैं। यशोदा जयंती सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि उस निस्वार्थ प्रेम की वर्षगांठ है जिसके कारण वैकुंठ का स्वामी गोकुल की गलियों में नंगे पाँव दौड़ा।
पुराणों में लिखा है कि जब कान्हा से पूछा गया कि उन्हें सबसे प्रिय क्या है, तो उन्होंने द्वारकाधीश बनकर भी यही कहा, "मैय्या की गोद और उनके हाथ का माखन।" कान्हा ने हज़ारों रानियों और वैभव के बीच भी सदा अपनी यशोदा मैय्या को याद किया। मान्यता है कि यशोदा जयंती पर जो भक्त मैय्या को अर्पण करते हैं, कृष्ण उनके रक्षक स्वयं बन जाते हैं, क्योंकि जो उनकी माँ को सम्मान देता है, कान्हा उस पर अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं।
तीन धाम, एक दिव्य संकल्प
1️⃣ 84 खंबा नंद भवन: यहाँ की रज-रज में कान्हा के घुटनों के निशान हैं। यहाँ चढ़ावा अर्पण करने का अर्थ है अपने जन्म-मरण के 84 चक्रों से मुक्त होकर मोक्ष का आशीर्वाद प्राप्त करना।
2️⃣ श्री मदन मोहन मंदिर: यदि आप इस धाम की दहलीज पर चढ़ावा अर्पित करते हैं, तो आप केवल एक परंपरा नहीं निभाते, बल्कि उस चैतन्य भक्ति से जुड़ते हैं जिसने युगों से भक्तों का उद्धार किया है।
3️⃣ श्री धाम गौशाला: भगवान कृष्ण के नामों में से एक 'गोपाल' है, जिसका अर्थ है गायों की रक्षा करने वाला। गर्ग संहिता के अनुसार, यशोदा जयंती पर गौ सेवा करने से वही पुण्य मिलता है जो एक माँ को अपने बच्चे की रक्षा करने से मिलता है।
ऐसा ममतामयी पवित्र अवसर न गवाएं! चढ़ावा एवं गौ सेवा कर पहुँचें उस ममता की छाँव में जहाँ न दुख है, न दरिद्रता - सिर्फ कान्हा का प्रेम है।
इस सेवा में आप जो भी बुक करते हैं, वह केवल आपकी सेवा नहीं होती - आपकी भागीदारी हमें इस पुण्य कार्य को और अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करती है। यह योगदान किसी एक की नहीं, बल्कि एक सामूहिक सेवा का हिस्सा है।







"हम एक लाभकारी (For-Profit) तकनीकी कंपनी हैं, जो मंदिरों एवं/या पंजीकृत चैरिटेबल संस्थाओं (जैसे NGOs, सेक्शन 8 कंपनियाँ एवं ट्रस्ट्स) के लिए स्वैच्छिक दान के संग्रह और वितरण की प्रक्रिया को सुगम बनाती है। हम अपनी सेवाओं के लिए एक मामूली सेवा/प्रोसेसिंग शुल्क (यदि लागू हो) लेते हैं, और सभी लेन-देन पूर्णतः सुरक्षित एवं पारदर्शी होते हैं। हमारी भूमिका केवल दानकर्ताओं और दान प्राप्त करने वाली संस्थाओं के बीच सुरक्षित एवं पारदर्शी लेन-देन को सक्षम बनाने तक सीमित है। हम FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) के अंतर्गत अनुमति के बिना किसी भी विदेशी अंशदान को न तो आमंत्रित करते हैं और न ही स्वीकार करते हैं।"
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श्री मंदिर चढ़ावा सेवा ऐप के जरिए, आपका चढ़ावा अनुभवी पुरोहितों द्वारा श्रद्धा पूर्वक अर्पित किया जाएगा, जिसका वीडियो 24-48 घंटों में प्राप्त होगा, जिससे आपको दिव्य आशीर्वाद और समृद्धि मिलेगी।
हाँ, चढ़ावा बुक करने के बाद आपको प्रमाणपत्र तुरंत उपलब्ध कराया जाएगा। आप अपनी बुकिंग के प्रमाणपत्र को 'चढ़ावा सेवा' पेज पर 'आपकी बुकिंग्स' में देख सकते हैं।
चढ़ावा बुकिंग के बाद आपको व्हाट्सऐप के माध्यम से जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा, आप श्री मंदिर ऐप में "चढ़ावा बुकिंग" सेक्शन में जाकर अपने चढ़ावे की पूरी जानकारी देख सकते हैं।