पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा अष्ट तीर्थ 8 पवित्र नदी दीपदान
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा अष्ट तीर्थ 8 पवित्र नदी दीपदान
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा अष्ट तीर्थ 8 पवित्र नदी दीपदान
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा अष्ट तीर्थ 8 पवित्र नदी दीपदान
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा अष्ट तीर्थ 8 पवित्र नदी दीपदान
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा अष्ट तीर्थ 8 पवित्र नदी दीपदान
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा अष्ट तीर्थ 8 पवित्र नदी दीपदान
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा अष्ट तीर्थ 8 पवित्र नदी दीपदान
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा अष्ट तीर्थ 8 पवित्र नदी दीपदान

पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा अष्ट तीर्थ 8 पवित्र नदी दीपदान

पितृपक्ष के प्रथम दिन जब पहली बार पितृ अपने वंशजों से संपर्क करने धरती पर आयेंगे और अपनी मुक्ति के लिए अपने वंशजों यानी आपके ऊपर निर्भर रहेंगे तब उनके लिए अष्ट तीर्थों की अष्ट नदियों में दीपदान करें और उनके मुक्ति एवं मोक्ष को प्रकाशित करें।
🌕पूर्णिमा - चंद्रलोक का द्वार सर्वाधिक विस्तृत
हमारे शास्त्र कहते हैं, पितर चंद्रलोक में निवास करते हैं और पूर्णिमा से ही पितृ पक्ष की ऊर्जा का आरंभ माना जाता है, ग्रंथों के अनुसार, इसी दिन यमराज पितरों को मुक्त करते हैं ताकि वे अपने वंशजों से अन्न और जल (स्वधा) ग्रहण करने के लिए पृथ्वी लोक की ओर प्रस्थान कर सकें। पूर्णिमा की रात पूर्ण चंद्रमा जो पितृलोक का अधिष्ठाता है, पृथ्वी के सबसे निकट होता है और इसलिए इस दिन किया गया पितृ संकल्प चंद्रलोक के माध्यम से सीधे पितरों तक पहुँचता है।
🪔🌊नदी पर दीपदान - जल और अग्नि का अद्भुत सम्मिलन
मृत्यु के पश्चात जीवात्मा को यमलोक तक 86,000 योजन का भयानक, तप्त और घोर अंधकारमय मार्ग तय करना पड़ता है। वायु पुराण के 'श्राद्ध कल्प' में यह स्पष्ट निर्देश है कि पितरों के निमित्त किया गया दीपदान उस महा-अंधकार को नष्ट कर पितरों के मार्ग को प्रकाशित करता है। जो मनुष्य श्रद्धापूर्वक पितरों के लिए दीप प्रज्वलित करता है, उसे एक हजार 'निष्क' (स्वर्ण मुद्राओं) के दान के बराबर अक्षय पुण्य प्राप्त होता है और पितरों को परम शांति मिलती है। नदी पर दीपदान एक अद्वितीय कर्म है। इसमें जल तत्व (नदी) और अग्नि तत्व (दीप) एक साथ उपस्थित होते हैं। प्रवाहित दीप स्थिर नहीं रहता - वह बहता है, आगे बढ़ता है, जैसे हमारा प्रेम पितरों की यात्रा में उनके साथ चलता है।
🛕 8 तीर्थ - भारत का सम्पूर्ण पितृ-मोक्ष मानचित्र
यह 8 तीर्थ कोई साधारण सूची नहीं हैं। इनमें से 5 स्वयं मोक्षदायिनी 'सप्तपुरी' की नगरियाँ हैं - अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी और अवन्तिका (उज्जैन)। साथ है सर्व तीर्थों का राजा तीर्थराज प्रयागराज जहाँ अग्नि पुराण कहता है: "यहाँ का पुण्य अक्षय है।" साथ है ओंकारेश्वर जहाँ नर्मदा की धारा में स्वयं मोक्ष दाता शिव विराजमान हैं। और अंत में फल्गु नदी, गया - जहाँ गरुड़ पुराण स्वयं कहता है - जिसने गया श्राद्ध नहीं किया, उसने पितृ-ऋण नहीं चुकाया। 🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे 8 तीर्थों पर दीपदान:
एक ही दिन हरिद्वार, उज्जैन, मथुरा, प्रयागराज, काशी, अयोध्या, ओंकारेश्वर और गया - इन सभी नदी तटों पर जाकर दीपदान करवाना किसी भी व्यक्ति के लिए असंभव है। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे अपने पितरों के लिए आठों तीर्थों पर दीपदान करवा सकते हैं। प्रत्येक तीर्थ के प्रमाणित वैदिक पुरोहित सम्पूर्ण विधि-विधान से दीपदान सम्पन्न कराएंगे। वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में प्राप्त होगा।
🙏 पितृ पक्ष के इस प्रथम दिन को सार्थक करें। 8 पावन नदी तीर्थों पर महादीपदान में सहभागी बनें - अपने पितरों के अंधेरे पथ को प्रकाशित करें।
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