☀️🌑12 अगस्त 2026 को सावन कृष्ण अमावस्या पर सूर्य ग्रहण लग रहा है अश्लेषा नक्षत्र में। अश्लेषा - वह नक्षत्र जो सर्प-देवताओं का है, राहु की ऊर्जा का क्षेत्र है। सावन का पवित्र मास + अमावस्या तिथि + सूर्य ग्रहण + अश्लेषा नक्षत्र - यह अत्यंत दुर्लभ संयोग है। इस दिन राहु की शक्ति अपने चरम पर होती है और सूर्य की ऊर्जा खंडित होती है। इसलिए राहु शांति और सूर्य शांति - दोनों एक साथ करना सर्वाधिक फलदायी है।
जब राहु सूर्य को ग्रसता है, हवन की पवित्र अग्नि में राहु बीज मंत्र की आहुतियाँ देने से राहु का कोप शांत होता है; और सूर्य गायत्री व आदित्य हृदयम् की आहुतियाँ देने से सूर्य की ज्योति पुनः प्रज्ज्वलित होती है।
🔥 हवन ही क्यों?
शास्त्र कहते हैं - "अग्निर्वै देवानां मुखम्"- अग्नि देवताओं का मुख है। हवन की अग्नि में दी गई आहुति सीधे संबंधित देव तक पहुँचती है - कोई माध्यम नहीं, कोई विलंब नहीं। कर्म-अग्नि शुद्धि का सर्वोच्च उपाय।
🛕दो पवित्र धाम - दो दैवी शक्तियाँ:
नवग्रह शक्तिपीठ, डबरा (मध्य प्रदेश): विश्व का प्रथम और एशिया का सबसे बड़ा नवग्रह शक्तिपीठ - जहाँ राहु सहित सभी नव-ग्रह अपनी-अपनी पत्नियों के साथ वैदिक विधान से विराजमान हैं। यहाँ राहु शांति हवन होगा - प्रतिष्ठा के बाद प्रथम सूर्य ग्रहण पर।
श्री गालतजी सूर्य देव मंदिर, जयपुर (राजस्थान): यह एकमात्र सूर्य मंदिर है जिस पर जयपुर की प्रथम और अंतिम सूर्य किरण पड़ती है। महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने अश्वमेध यज्ञ के उपरांत भगवान सूर्यनारायण को पत्नी रोहिणी सहित यहाँ विराजित कराया। यहाँ सूर्य शांति हवन होगा।
🛕 श्री मंदिर ऐप से घर बैठे 2 मंदिरों पर हवन आहुति:
श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे आपके नाम से दोनों मंदिरों पर हवन आहुति करवा सकते हैं। प्रत्येक मंदिर के प्रमाणित वैदिक पुरोहित सम्पूर्ण विधि-विधान से हवन सम्पन्न कराएंगे। हवन आहुति का वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में प्राप्त होगा।
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