🔱 सूर्य ग्रहण, फाल्गुन अमावस्या की शक्ति को कई गुना बढ़ा देता है, जिससे यह दिन मंगल और पितृ शांति के लिए अत्यंत दुर्लभ बन जाता है।
⚡ सूर्य ग्रहण के साथ भौमवती अमावस्या को महायोग क्यों माना जाता है?
🙏 जब मंगलवार और अमावस्या का संयोग होता है, तब भौमवती अमावस्या का उदय होता है। स्कंद पुराण में इस संयोग का वर्णन संचित कर्मों को भस्म करने में सक्षम बताया गया है। अमावस्या पर पितृ देव और श्री विष्णु का शासन होता है, जबकि मंगलवार मंगल तत्व को सक्रिय करता है।
🔥 जब इस दिन सूर्य ग्रहण लगता है, तो राहु अस्थायी रूप से सूर्य को ग्रसित करता है, जिससे जीवन शक्ति कमजोर पड़ती है और दबे हुए कर्म दोष समाधान के लिए सतह पर आ जाते हैं।
⚡ मंगल, हनुमान, सूर्य और पितृ आध्यात्मिक रूप से कैसे जुड़े हैं?
🕉️ वायु पुराण के अनुसार, मंगल देव का प्राकट्य भगवान शिव के पसीने से हुआ था। श्री हनुमान मंगल ऊर्जा के प्रतीक हैं, अमावस्या के अधिष्ठाता पितृ देव विष्णु हैं और सूर्य प्राण शक्ति एवं वंश की जीवंतता के स्रोत हैं।
🌟 गरुड़ पुराण में उल्लेख है कि पितृ कर्म सूर्य-वंश के माध्यम से प्रवाहित होते हैं, जिससे सूर्य पूर्वजों के आशीर्वाद के वाहक बनते हैं। सूर्य ग्रहण और फाल्गुन अमावस्या के इस संगम पर, जब सूर्य की शक्ति बाधित होती है, तब पितृ, मंगल और हनुमान की संयुक्त आराधना संतुलन बहाल करती है।
⚡ इन चार पवित्र स्थानों पर आराधना क्यों करें?
📍 मंगलनाथ महादेव अपने मूल स्थान पर मंगल दोष को स्थिर करते हैं
📍 प्राचीन हनुमान गढ़ी, मंगल ऊर्जा के आध्यात्मिक अवतार श्री हनुमान से आशीर्वाद प्रदान करती है
📍 गया स्थित धर्मारण्य वेदी पितृ मोक्ष का आशीर्वाद प्रदान करती है
📍 गलता जी सूर्य मंदिर बाधित सूर्य तत्व को पुनर्जीवित करता है; इस प्रकार शक्ति, शुद्धिकरण और पितृ मुक्ति का चक्र पूर्ण होता है।
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