जब पितृ लोक का द्वार खुलता है - मोक्ष तीर्थ मथुरा में गौ माता की सेवा करें और आपके पितरों को वैतरणी पार का वह सहारा दीजिए जो उन्हें सबसे अधिक आवश्यकता है।
इन 2 दिनों में आपके पितृ आपकी श्रद्धा की प्रतीक्षा में होती हैं। किन्तु पहुँचने से पहले उन्हें एक भयंकर ब्रह्माण्डीय नदी पार करनी होती है - वैतरणी। और गरुड़ पुराण कहता है कि इस नदी को पार करने का एक ही सहारा है - गौ माता की पूँछ।
गौ सेवा क्यों? - क्योंकि गरुड़ पुराण ने इसे एकादश महादान में सर्वप्रथम स्थान दिया है।
गरुड़ पुराण में पितृ कल्याण के लिए एकादश महादान (ग्यारह महान दान)- निर्धारित किए गए हैं। इनमें गोसेवा सर्वप्रथम और सर्वश्रेष्ठ है। गौ माता अपनी पूँछ को कृपा का सेतु बनाकर बढ़ाती है - और आपके पितर को शांति और मुक्ति की ओर - पहुँच जाती है।
गौ माता में 33 करोड़ देवता - एक सेवा से सभी प्रसन्न।
हिन्दू शास्त्रों का विधान है कि गौ माता में 33 करोड़ देवताओं का निवास है - उनके चार खुरों में चारों वेद, पेट में पृथ्वी, पीठ में सूर्य और चन्द्रमा, सींगों में हिमालय निवास करते हैं। जब आप गौ माता को गुड़-हरा-चारा अर्पित करते हैं - आप एकसाथ 33 करोड़ दिव्य शक्तियों की सेवा करते हैं। पितृ पक्ष में इसका अर्थ है - आपके पितरों के लिए 33 करोड़ दिव्य शक्तियाँ एकसाथ आह्वानित होती हैं। ऐसा दूसरा कोई कार्य नहीं।
घर बैठे करें मथुरा गौ माता सेवा - श्री मंदिर के माध्यम से।
पितृ पक्ष में मथुरा जाकर गौशाला में 101kg गुड़-हरा-चारा अर्पित करना प्रत्येक परिवार के लिए सम्भव नहीं है। किन्तु श्री मंदिर के माध्यम से आप घर बैठे मथुरा की प्रमाणित गौशाला में अपने नाम-गोत्र का संकल्प लेकर 101 किलो गुड़-हरा-चारा गौ माता सेवा करवा सकते हैं। सम्पूर्ण विधि-विधान से सेवा सम्पन्न कराई जाएगी और वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में आपके फोन पर प्राप्त होगा।







हम एक टेक्नोलॉजी कंपनी हैं, जो मंदिरों या पंजीकृत चैरिटेबल संस्थाओं (जैसे एनजीओ, सेक्शन 8 कंपनियां और ट्रस्ट) को स्वैच्छिक दान संग्रहण और वितरण की सुविधा प्रदान करती है। हम (यदि लागू हो) एक छोटी सी सेवा/प्रोसेसिंग फीस लेते हैं, और सभी लेन-देन पूरी तरह पारदर्शी होते हैं। हमारी भूमिका केवल दाताओं और प्राप्तकर्ता संस्थाओं के बीच सुरक्षित और पारदर्शी लेन-देन को सक्षम करने तक सीमित है।
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महासेवा एक अत्यंत पुण्यदायी और फलदायी सेवा है, जिसका उल्लेख वेद-पुराणों में बार-बार हुआ है। जब किसी व्यक्ति द्वारा भोजन, वस्त्र एवं अन्न जैसे उच्चतम कार्य श्रद्धा और निष्काम भाव से किए जाते हैं, तो उसे महादान कहा जाता है। यह सेवा न केवल दाता के पापों का क्षय करता है, बल्कि पितृ, देवता और ऋषियों को संतुष्ट कर जन्म-जन्मांतर के कर्मबंधन से मुक्ति दिलाता है!
गरुड़ पुराण का स्पष्ट वचन है, पितर पितृलोक में "वायु-रूप" में रहते हैं और पितृ पक्ष में अपने वंशजों के पास आते हैं। पितरों का निवास चंद्रलोक में है और पितृपक्ष के समय वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों ही स्वरूपों में पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी सबसे कम होती है। पूर्णिमा को जब चंद्रमा पूर्ण होता है, पितर सर्वाधिक सक्रिय और ग्रहणशील होते हैं। यह श्रद्धा-विज्ञान है, जब एक वंशज नाम संकल्प लेकर अपने पूर्वज स्मरण करता है, तब उस आत्मा तक निमंत्रण पहुँचता है।
सेवा बुकिंग के बाद आपको WhatsApp के माध्यम से अपडेट्स मिलते रहेंगे। इसके अलावा, आप श्री मंदिर ऐप के "सेवा बुकिंग" सेक्शन में जाकर अपनी सेवा की पूरी जानकारी देख सकते हैं।
हर मनुष्य पाँच ऋणों के साथ जन्म लेता है। पितृ ऋण उनमें से सबसे बड़ा है। यदि इसे पितृ पक्ष में श्राद्ध-तर्पण से नहीं चुकाया जाता तो यह धीरे-धीरे "पितृ दोष" का रूप ले लेता है। कम या ज़्यादा, कुछ न कुछ पितृ ऋण सभी के जीवन में होता है। किन्तु नियमित पितृकार्य करने वाले परिवारों में यह दोष सक्रिय नहीं होता। जो परिवार कई पीढ़ियों से श्राद्ध नहीं कर रहे उनमें यह दोष प्रभावी हो जाता है।
हाँ बिल्कुल। यह एक सबसे बड़ी गलत धारणा है कि श्राद्ध केवल पुरुष कर सकते हैं। रामायण का प्रमाण: जब राम और लक्ष्मण सामग्री लेने गए, तब माता सीता ने अकेले फल्गु नदी के तट पर राजा दशरथ के लिए पिण्ड दान किया। यह श्राद्ध इतना शक्तिशाली था कि राम का संकल्प-पत्र गवाह बना।"ये के चास्मत्कुले जाता अपुत्ता गोत्रविग्रहाः" इस श्लोक में स्पष्ट है कि पुत्र न हो तो भी पुत्री या कोई भी वंशज श्राद्ध कर सकता है।
हाँ! श्राद्ध केवल मृत माता-पिता के लिए नहीं दादा-दादी, नाना-नानी, परनाना-परदादा और कुल के किसी भी दिवंगत पूर्वज के लिए होता है। यदि सभी तीन पीढ़ियाँ जीवित हों, तब भी उनके पूर्वज (परदादा आदि) श्राद्ध की प्रतीक्षा में हो सकते हैं। पितृ पक्ष का संकल्प हमेशा "कुल के सभी पितरों के लिए" होता है।
यदि आपकी सेवा में कोई भी समस्या हो, तो आप हमारी श्री मंदिर ग्राहक सेवा टीम से 📞918296948051 पर संपर्क कर सकते हैं। हमारी टीम आपकी सहायता के लिए हमेशा तत्पर है।
कोई भी पितृकार्य तर्पण, और श्राद्ध वर्षभर किए जा सकते हैं, किन्तु पितृ पक्ष में इनका फल सहस्रों गुना अधिक होता है। कारण यह है कि इस पखवाड़े में पितर स्वयं पृथ्वी के निकट होते हैं, इसलिए अर्पण उन तक सीधे और तुरंत पहुँचता है। जैसे फोन करने और सामने बात करने में अंतर होता है वैसे ही पितृ पक्ष में श्राद्ध = सामने बात करना। मार्कण्डेय पुराण का वचन है कि पितृ पक्ष में किया गया तर्पण पितरों को वर्षभर तृप्त रखता है।
हाँ, शास्त्र में इसकी स्पष्ट आज्ञा है। गोकर्ण में श्राद्ध की सूची में गुरु, शिष्य, मित्र, ससुर, साले, मामा, भाई, बहन सभी शामिल हैं। "आत्मीय जन" जो आपके जीवन में प्रिय थे, जिनके जाने का दुख आपने उठाया उन सभी के लिए श्राद्ध किया जा सकता है। पितृ पक्ष में विशेष संकल्प में उनका नाम लें और उनकी आत्मा की शांति हेतु कार्य करें। प्रेम की कोई सीमा नहीं और श्राद्ध प्रेम का ही सर्वोच्च रूप है।
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