
शनिवार व्रत के दौरान सात्विक और हल्का आहार लेना चाहिए। यहां जानें, क्या खाएं और कैसे व्रत का सही पालन करें।
अगर आप नियमित रूप से हर शनिवार का व्रत करते हैं, तो आपको इसके नियमों को जानना बेहद जरूरी है। जैसे व्रत के दौरान क्या करें? कौन-कौन से खाद्य पदार्थों को ग्रहण करें? और ये व्रत पूरी तरह से सफल हो इसके लिए कब भोजन करें? इस लेख में हम इन्हीं सारी बातों को विस्तार से जानेंगे।
शनिवार का व्रत न्याय और कर्म के देवता शनिदेव के लिए रखा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में किसी भी जातक की कुंडली में शनि की दशा का बहुत महत्व होता है। शनि की दशा, चाल और यह कुंडली के किस भाव में उपस्थित हैं, इस से व्यक्ति के जीवन में कई शुभ अशुभ संयोग बनते रहते हैं। हमारे शास्त्रों में भी शनिदेव को क्रूर ग्रह कहा जाता है, क्योंकि वे व्यक्ति को उसके बुरे कर्मों का दंड देते हैं। जबकि वास्तव में शनिदेव क्रूर नहीं हैं, बल्कि वे व्यक्ति को अनुशासन, कर्तव्य और धर्म- कर्म का महत्व समझाते हैं। इसलिए यदि इस दिन आप व्रत रख रहें हैं तो व्रत का पारण पूरे विधि विधान के साथ और सही समय पर करें। सामान्यतः, शनिवार के व्रत के लिए भोजन से जुड़ी कुछ खास बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
इस दिन सूर्यास्त के बाद ही भोजन करें। संध्या पूजन का व्रत में विशेष महत्व होता है। शाम में संभव हो तो शनि मंदिर जाकर दर्शन करें और फिर घर आकर सात्विक भोजन से व्रत का पारण करें।
मंदिर में पूजा करने और शनि देव को तेल, काले तिल, और काले वस्त्र अर्पित करने के बाद भोजन करना भी व्रत को अधिक फलदायी बनाता है।
शनिवार के व्रत के दौरान सात्विक भोजन ही करना चाहिए, जिसमें अनाज और प्याज-लहसुन ना हो। फल, दूध या व्रत के विशेष खाद्य पदार्थ जैसे साबूदाने की खिचड़ी खाई जा सकती है।
इस व्रत में पूरे दिन अन्न ग्रहण करना वर्जित माना जाता है। शाम के समय पूजा के बाद उड़द की दाल की खिचड़ी खाकर व्रत खोला जा सकता है।
अपनी क्षमता के अनुसार आप केवल जल पीकर या केवल फलाहार खाकर व्रत कर सकते हैं। चूँकि एक बार नमक वाला भोजन किया जा सकता है, इसलिए आप व्रत के अंत में रात को नमक वाला भोजन ग्रहण करके भी व्रत का पारण कर सकते हैं।
शनिवार के व्रत में आप अपनी परंपरा, समयवधि और परिवार के नियमों का पालन करें।
स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए व्रत और भोजन करें।
यदि शनिवार के व्रत में आप किसी विशेष पूजा विधि का पालन कर रहे हैं, तो इसके लिए किसी जानकार ज्योतिषी या पंडित से सलाह अवश्य लें।
इस दिन व्रती को अपने मन में भोजन के प्रति संयम बनाना बहुत जरूरी होता है। साथ ही जो भी फीका या फलाहार भोजन ग्रहण करें, पूरी श्रद्धा से इसे प्रसाद समझकर ग्रहण करें।
ध्यान रहें कि शनिदेव हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। ये न्यायप्रिय देवता माने जाते हैं जो धर्म एवं सत्य के प्रति कठोर हैं। अच्छे कर्म करने वालों को शनिदेव का आशीर्वाद मिलता है, जबकि बुरे कर्म करने वालों को जीवन में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उनके प्रति श्रद्धा और सच्चे मन से की गई पूजा जीवन में कठिनाइयों को कम करती है और आपकी सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है। शनिवार व्रत के पारण में इन बातों का अवश्य ध्यान रखें।
ऐसी ही अन्य धार्मिक जानकारियों के लिए जुड़े रहिये श्री मंदिर के साथ।
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