
शाकम्भरी नवरात्रि 2025: क्या आप जानते हैं इसकी तिथि और महत्व? जानें माँ की कृपा पाने का तरीका।
शाकंभरी नवरात्रि मां शाकंभरी देवी को समर्पित एक पवित्र पर्व है, जो पौष मास की शुक्ल पक्ष अष्टमी से पूर्णिमा तक मनाया जाता है। मां शाकंभरी को प्रकृति और अन्न की देवी माना जाता है। इन दिनों में देवी की पूजा-अर्चना, व्रत, और भजन-कीर्तन किए जाते हैं।
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शाकम्भरी उत्सव का आरंभ आमतौर पर चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को होता है। यह उत्सव मुख्य रूप से राजस्थान के शाकम्भरी देवी मंदिर में मनाया जाता है। इस उत्सव में भक्तजन देवी शाकम्भरी की पूजा-अर्चना करते हैं और विशेष हवन-यज्ञ का आयोजन किया जाता है। शाकम्भरी नवरात्रि पौष शुक्ल अष्टमी से शुरू होती है और पौष पूर्णिमा पर समाप्त होती है।
आरंभ, पौष शुक्ल अष्टमी को बाणदा अष्टमी या बाणदष्टमी भी कहा जाता है। शुक्ल प्रतिपदा को शुरू होने वाली अधिकांश नवरात्रि के विपरीत, शाकंभरी नवरात्रि अष्टमी को शुरू होती है और पूर्णिमा तक चलती है, जो कुल आठ दिनों तक चलती है।
शाकम्भरी नवरात्रि मंगलवार, 7 जनवरी, 2025 को मनाई जाएगी। वहीं, शाकम्भरी जयन्ती सोमवार, 13 जनवरी, 2025 को मनाई जाएगी।
शाकम्भरी नवरात्रि मंगलवार, 13 जनवरी, 2025 से प्रारम्भ होगी और शाकम्भरी नवरात्रि का समापन सोमवार, 13 जनवरी, 2025 को होगा।
अष्टमी तिथि प्रारम्भ - जनवरी 06, 2025 को 06:23 PM बजे
अष्टमी तिथि समाप्त - जनवरी 07, 2025 को 04:26 PM बजे
देवी शाकम्भरी को समृद्धि, सुख-समृद्धि और कल्याण की देवी माना जाता है। मान्यता है कि देवी शाकम्भरी ने एक बार पृथ्वी पर अकाल पड़ने पर साग-पात उगाकर लोगों को भूख से बचाया था। इसलिए उन्हें शाकम्भरी या साग वाली देवी के नाम से भी जाना जाता है।
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