
धूमावती जयन्ती 2025 पर मां धूमावती की पूजा और व्रत करें। जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व संकट निवारण के लिए आवश्यक जानकारी।
धूमावती जयंती माँ धूमावती के प्रकट होने का पर्व है, जो दस महाविद्याओं में से एक हैं। यह जयंती ज्येष्ठ अमावस्या को मनाई जाती है। साधना, त्याग और आत्मबल की प्राप्ति के लिए यह दिन विशेष माना जाता है।
धूमावती जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। माता धूमावती दुर्गा जी का सातवां अवतार हैं। यह माता शक्ति का सबसे क्रोधित रूप माना जाता है।
चलिए इस लेख में जानते हैं,
| मुहूर्त | समय |
| ब्रह्म मुहूर्त | 03:44 ए एम से 04:26 ए एम तक |
| प्रातः सन्ध्या | 04:05 ए एम से 05:07 ए एम तक |
| अभिजित मुहूर्त | 11:29 ए एम से 12:24 पी एम तक |
| विजय मुहूर्त | 02:13 पी एम से 03:07 पी एम तक |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:44 पी एम से 07:05 पी एम तक |
| सायाह्न सन्ध्या | 06:45 पी एम से 07:47 पी एम तक |
| अमृत काल | 06:02 पी एम से 07:46 पी एम तक |
| निशिता मुहूर्त | 11:35 पी एम से 12:17 ए एम, जून 04 तक |
| रवि योग | 12:58 ए एम, जून 04 से 05:07 ए एम, जून 04 तक |
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार एक बार देवी पार्वती तीव्र क्षुधा के कारण अत्यंत व्याकुल हो उठीं। वो भगवान शिव से भोजन के लिए बार बार आग्रह करने लगीं, परंतु ध्यानमग्न होने के कारण शंकर जी को माता पार्वती की आग्रह का आभास ही नहीं हुआ। जैसे जैसे समय व्यतीत होने लगा, वैसे वैसे माता की क्षुधा और क्रोध दोनो बढ़ते गए। माता पार्वती ने क्रोध के कारण अत्यंत तीव्र श्वास ली, और भगवान शिव को ही निगल गईं। शिव जी के कंठ में विष होने के कारण उन्हें निगलने पर देवी की देह से धुआँ निकलने लगा। उनका स्वरूप विकृत एवं श्रृंगार विहीन हो गाया, इस कारण उन्हें धूमावती कहा गया। भगवान शिव को खाने के कारण माता धूमावती को विधवा माना जाता है, और इसी स्वरूप में उनकी पूजा की जाती है।
धूमावती जयंती पर विशेष रूप से निम्न पूजन सामग्री का प्रयोग किया जाता है:
देवी धूमावती की आराधना से जीवन में निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
देवी का आशीर्वाद प्राप्त होने से आर्थिक संकट समाप्त होते हैं और सुख-समृद्धि आती है।
देवी धूमावती शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों का नाश करती हैं।
तांत्रिक दोष या ऊपरी बाधा से परेशान व्यक्ति को शांति मिलती है।
धूमावती उपासना से दीर्घकालिक रोगों में राहत मिलती है।
साधक को जीवन में स्पष्टता और आत्मबल की प्राप्ति होती है।
देवी धूमावती को प्रसन्न करने के लिए भक्त निम्न उपाय कर सकते हैं:
तो भक्तों, ये थी धूमावती जयंती से जुड़ी विशेष जानकारी। हमारी कामना है कि आपकी पूजा व व्रत सफल हो, माता आप पर प्रसन्न हों और आजीवन अपनी कृपा बनाएं रखें। ऐसे ही व्रत, त्यौहार व अन्य धार्मिक जानकारियां निरंतर पाते रहने के लिए बने रहिए 'श्री मंदिर' पर।
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