
इस अमावस्या जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और लाभ।
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को पितृ विसर्जनी अमावस्या या सर्वपितृ अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन पितृ पक्ष का समापन होता है और पितृजन वापस अपने लोक (पितृलोक) लौट जाते हैं। इस दिन ब्राह्मण को भोजन कराने तथा दान-पुण्य आदि करने से पितृजन तृप्त होते हैं, और अपने वंशजों को सुखमय जीवन का आशीर्वाद देकर जाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आश्विन अमावस्या पर ज्ञात व अज्ञात पितरों के निमित्त श्राद्धकर्म करने का विशेष महत्व है, इसलिए इसे सर्व पितृजनी अमावस्या और महालय विसर्जन भी कहा जाता है। वहीं श्राद्धकर्म के साथ-साथ आश्विन अमावस्या तंत्र साधना के लिये भी विशेष मानी जाती है।
आश्विन अमावस्या की समाप्ति पर अगले दिन यानि प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि का आरंभ हो जाता है। इस दौरान माँ दुर्गा के उपासक और तंत्र साधना करने वाले साधक इस अमावस्या की रात्रि को विशेष तांत्रिक साधनायें करते हैं।
इस दिन जातक अमावस्या व्रत का भी अनुष्ठान करते हैं, और पितरों के साथ साथ भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की उपासना करते हैं।
तो यह थी आश्विन अमावस्या व्रत से जुड़ी पूरी जानकारी। हमारी कामना है कि इस दिन पितरों के निमित्त किये श्राद्धकर्म सफल हों, और आप तथा आपके परिवार पर सदा उनका आशीर्वाद बना रहे। व्रत, त्यौहार व अन्य धार्मिक जानकारियों के लिए जुड़े रहिए 'श्री मंदिर' पर।
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