क्या आप जानते हैं पितृ पक्ष में श्राद्ध के समय कौवे को भोजन कराने की परंपरा क्यों निभाई जाती है? जानें इसका महत्व और धार्मिक मान्यता।
शास्त्रों में कौवे का विशेष महत्व बताया गया है, क्योंकि उन्हें पितरों का दूत माना जाता है। मान्यता है कि पितृ पक्ष या श्राद्ध के समय कौवे को भोजन अर्पित करने से वह पितरों तक पहुँचता है और उनकी आत्मा को तृप्ति मिलती है। कौवे को संतुष्ट करना पूर्वजों की सेवा के समान माना जाता है, जिससे घर में शांति और समृद्धि बनी रहती है। इस लेख में जानिए शास्त्रों में कौवे का महत्व, पितरों से उसका संबंध और धार्मिक दृष्टि से उसकी खास भूमिका।
शास्त्रों में कौवे को पितृ और यमराज का रूप माना जाता है और पितृ पक्ष में उन्हें भोजन कराने से पूर्वजों की आत्माएं तृप्त होती हैं। कौवे को यमराज का दूत माना जाता है, जो श्राद्ध का भोजन पितरों तक पहुंचाता है। पितृ पक्ष के दौरान कौवे का घर के आंगन में आकर भोजन ग्रहण करना शुभ माना जाता है और इससे पितरों की प्रसन्नता का संकेत मिलता है। यदि पितृ पक्ष में कौवा घर के आंगन में आकर भोजन कर ले तो यह बहुत शुभ माना जाता है। कई ग्रंथों में कौवे की आवाज या उसकी दिशा में उड़ान को शुभ-अशुभ संकेतों से जोड़ा गया है। माना जाता है घर के आंगन में कौवा बोलता है तो अक्सर मेहमान आने या शुभ समाचार मिलने का संकेत माना जाता है। इसके अतिरिक्त, कौवे को शनि दोष दूर करने और आर्थिक संकट से मुक्ति दिलाने वाला भी माना जाता है।
पितृ पक्ष में कौवे को भोजन कराने के पीछे धार्मिक मान्यता यह है कि कौवे पितरों का प्रतीक होते हैं और उन्हें श्राद्ध का भोजन देने से पितर प्रसन्न होते हैं और उन्हें शांति मिलती है। शास्त्रों के अनुसार, पितृ लोक से पितरों की आत्माएं कौवे के रूप में आकर भोजन ग्रहण करती हैं। कौवे को यम का रूप भी माना जाता है और उन्हें भोजन कराने से यमराज भी प्रसन्न होते हैं। यह भी कहा जाता है कि कौआ पितृ-दूत है और उसके द्वारा भोजन चख लेने से पितृ तृप्त हो जाते हैं। इस प्रकार, कौवे को भोजन कराना श्राद्ध कर्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पितृ पक्ष या श्राद्ध के समय कौवे को भोजन कराने की विधि शास्त्रों में विस्तार से बताई गई है। इसका उद्देश्य पितरों की तृप्ति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना है। यहां इसकी सरल और सही विधि दी गई है-
भोजन कब और कहां कराना चाहिए?
भोजन में क्या रखना चाहिए?
विधि
पितृ तृप्ति और आशीर्वाद
पितृ दोष से मुक्ति
यमराज और शनि की प्रसन्नता
शुभ संकेत और संतोष
दान और सेवा का भाव
मानसिक शांति और संतोष
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