दूसरा श्राद्ध 2025 कब है?
image
downloadDownload
shareShare
ShareWhatsApp

दूसरा श्राद्ध 2025 कब है?

दूसरा श्राद्ध 2025 कब है? यहां जानें इसकी सही तिथि, पूजा विधि और महत्व। पितरों की कृपा और जीवन में सुख-समृद्धि पाने के लिए श्राद्ध करने का महत्व।

दूसरे श्राद्ध के बारे में

दूसरे श्राद्ध का अर्थ है पितृपक्ष के दूसरे दिन किया जाने वाला श्राद्ध कर्म। इस दिन उस तिथि पर श्राद्ध किया जाता है, जिस पर परिवार के दिवंगत पूर्वज का निधन हुआ हो। विधिवत तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन से पितरों को श्रद्धांजलि दी जाती है।

दूसरा श्राद्ध क्या है?

सनातन धर्म में पितरों की कृपा पाने और उनकी आत्मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में श्राद्ध करने का विधान है। इस दौरान पितरों के निमित्त किए गए श्राद्ध-तर्पण से उनका ऋण उतरता है, साथ ही उनकी आत्मा वर्ष भर के लिए तृप्त हो जाती है। मान्यता है कि पितृपक्ष समाप्त होने के बाद पितृ जब प्रसन्न होकर पृथ्वी लोक से वापस जाते हैं, तो वह अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। ‘द्वितीया श्राद्ध’ पितृपक्ष की द्वितीया तिथि पर किया जाता है। इस दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध करने का विधान है, जिनकी मृत्यु द्वितीया तिथि पर हुई थी।

दूसरा श्राद्ध कब है?

  • दूसरा श्राद्ध सितंबर 9, 2025 (मंगलवार) को किया जाएगा।
  • कुतुप मुहूर्त - सुबह 11:53 से दोपहर 12:43 बजे तक
  • रौहिण मुहूर्त - दोपहर 12:43 से 01:33 बजे तक
  • अपराह्न काल - दोपहर 01:33 से 04:03 बजे तक

द्वितीया श्राद्ध कैसे करें?

  • द्वितीया श्राद्ध करने के लिए प्रातः काल स्नान करके शुद्ध हो जाएं, और पितरों का स्मरण करें।
  • इस दिन जल के साथ-साथ सत्तू व तिल से भी पितरों का तर्पण करने का विधान है।
  • किसी विद्वान पंडित के मार्गदर्शन में तर्पण-पिंडदान आदि कर्म करें।
  • श्राद्ध कर्म करने के लिए दोपहर का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है।
  • श्राद्ध कर्म गंगा तट पर कारण विशेष फलदायक माना जाता है, हालांकि यदि वहां जाना संभव न हो तो आप घर पर भी यह अनुष्ठान कर सकते हैं।
  • पितरों को गंगाजल, जौ, तुलसी व शहद मिश्रित जल देने के बाद उनके नाम से दीपक जलाएं।
  • इसके बाद पिता से लेकर (यदि पिता स्वर्गवासी हों) जितने पितरों के नाम याद हैं, उन सभी का स्मरण करें, और उन्हें अन्य जल अर्पित करें।
  • तृतीया श्राद्ध पर गाय, कौवा, चींटी आदि के लिए भोजन का एक अंश निकालने के बाद तीन ब्राह्मणों को भी भोजन कराएं।
  • इन जीवों को भोजन देते समय अपने पितरों का स्मरण करें, और मन में ही उनसे भोजन ग्रहण करने के लिए प्रार्थना करें।
  • श्राद्ध कर्म संपन्न करने के बाद ब्राह्मण को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दक्षिणा दें।
  • इस दिन किसी निर्धन व्यक्ति की सहायता करने से आपके पितरों को विशेष प्रसन्नता होगी।

द्वितीया श्राद्ध का महत्व

जिन पूर्वजो का स्वर्गवास द्वितीया तिथि पर हुआ हो उनके लिए द्वितीय श्राद्ध का विशेष महत्व है। पितृपक्ष में जिनके घर श्राद्ध नहीं होता है, उनके पितरों की आत्माएं बिना तृप्त हुए ही वापस जाती हैं, जिससे परिवार को पितरों का श्राप लगता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितरों के श्राप के कारण व्यक्ति के जीवन की प्रगति रुक जाती है, साथ ही नौकरी-व्यापार में असफलता, रोग, निर्धनता व परिवार में कलह बनी रहती है।

ऐसे में पितरों का आशीर्वाद पाने और उनकी आत्मा को संतुष्ट रखने के लिए उनकी मृत्यु तिथि पर श्राद्ध करना विशेष महत्वपूर्ण माना गया है। पितरों का श्राद्ध पुत्र, पौत्र या भांजा कोई भी कर सकता है, यदि इनमें से कोई ना हो तो बेटी का पति, यानी दामाद भी पितरों का श्राद्ध कर सकता है। इसके अलावा परिवार में कोई भी पुरुष न होने पर स्त्रियां भी अपने पितरों का श्राद्ध कर सकती हैं

divider
Published by Sri Mandir·August 29, 2025

Did you like this article?

srimandir-logo

श्री मंदिर ने श्रध्दालुओ, पंडितों, और मंदिरों को जोड़कर भारत में धार्मिक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया है। 50 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के साथ साझेदारी करके, हम विशेषज्ञ पंडितों द्वारा की गई विशेष पूजा और चढ़ावा सेवाएँ प्रदान करते हैं और पूर्ण की गई पूजा विधि का वीडियो शेयर करते हैं।

हमारा पता

फर्स्टप्रिंसिपल ऐप्सफॉरभारत प्रा. लि. 435, 1st फ्लोर 17वीं क्रॉस, 19वीं मेन रोड, एक्सिस बैंक के ऊपर, सेक्टर 4, एचएसआर लेआउट, बेंगलुरु, कर्नाटका 560102
YoutubeInstagramLinkedinWhatsappTwitterFacebook