
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
पितृपक्ष का समय केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि यह परिवार और पूर्वजों के प्रति स्मरण का अवसर भी देता है। 4 अक्टूबर 2026 इसी क्रम का एक और दिन है। आज की नवमी तिथि के साथ शुभ मुहूर्त, राहुकाल और अन्य समय दिन की धार्मिक गतिविधियों को व्यवस्थित करने में मदद कर सकते हैं।
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4 अक्टूबर 2026 को कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि सुबह 5:52 AM तक रहेगी और रविवार का दिन है। आज सूर्योदय के समय ही तिथि और करण में बदलाव हो जाएगा, जबकि रात 12:14 AM तक पुनर्वसु नक्षत्र और दोपहर 12:32 PM तक परिघ योग की स्थिति रहेगी। दिन का शुभ मुहूर्त 11:24 AM से 12:10 PM तक है और चंद्रोदय रात 12:20 AM पर होगा। ऐसे में आज के पंचांग में सुबह से दोपहर और फिर शाम तक बदलती समय-स्थितियां खास ध्यान देने योग्य हैं।
विवरण | जानकारी |
तिथि | कृष्ण पक्ष अष्टमी (5:52 AM तक) |
वार | रविवार |
पूर्णिमांत मास | अश्विन |
अमांत मास | भाद्रपद |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | शरद |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 05:52 |
सूर्यास्त | 17:43 |
चंद्रोदय | 00:20 |
चंद्रास्त | 13:31 |
नक्षत्र | पुनर्वसु (12:14 AM तक) |
योग | परिघ (12:32 PM तक) |
करण | कौलव (5:52 AM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:24 AM से 12:10 PM |
राहुकाल | 4:14 PM से 5:43 PM |
गुलिक काल | 2:45 PM से 4:14 PM |
यमघण्टकाल | 11:47 AM से 1:16 PM |
दिशाशूल | पश्चिम |
सूर्य राशि | कन्या |
चंद्र राशि | मिथुन |
चंद्र निवास | पश्चिम |
आज कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि सुबह 5:52 AM तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि शुरू होगी। चूंकि तिथि परिवर्तन सूर्योदय के आसपास ही हो रहा है, इसलिए सुबह की पंचांग गणना को समझते समय 5:52 AM का समय विशेष महत्व रखता है।
आज रविवार है, जिसका संबंध परंपरागत रूप से सूर्य देव से माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में रविवार को सूर्य उपासना, अनुशासन और आत्मबल से जुड़े कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। सुबह का समय पूजा-पाठ और दिन की प्राथमिकताएं तय करने के लिए रखा जा सकता है।
आज अमांत पद्धति के अनुसार भाद्रपद मास और पूर्णिमांत पद्धति के अनुसार अश्विन मास चल रहा है। दोनों पद्धतियों की मास गणना अलग होने के कारण आज पंचांग में दोनों मासों का उल्लेख दिखाई देता है। धार्मिक तिथियों को समझते समय इस अंतर को ध्यान में रखना उपयोगी रहता है।
आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) प्रभावी हैं। पंचांग में संवत की जानकारी पारंपरिक काल गणना का हिस्सा है और इससे तिथि की पहचान अधिक स्पष्ट होती है।
आज शरद ऋतु चल रही है। मौसम में बदलाव के इस दौर में सुबह और शाम के वातावरण में अंतर महसूस हो सकता है। बाहर जाने या यात्रा की योजना बनाते समय स्थानीय मौसम की स्थिति को ध्यान में रखना व्यावहारिक रहेगा।
अयन की दृष्टि से आज दक्षिणायन है। भारतीय पंचांग परंपरा में दक्षिणायन को सूर्य की वार्षिक गति से जुड़ी अवधि माना जाता है। इसका उल्लेख पंचांग में ऋतु और संवत की जानकारी के साथ किया जाता है।
आज सूर्योदय 5:52 AM पर और सूर्यास्त 5:43 PM पर होगा। सुबह की दिनचर्या और शाम के जरूरी कामों की योजना बनाते समय इन दोनों समयों को ध्यान में रखा जा सकता है।
आज चंद्रोदय रात 12:20 AM पर होगा और चन्द्रास्त 1:31 PM पर होगा। यानी चंद्रमा का उदय देर रात होगा और अगले दिन दोपहर तक इसकी स्थिति बनी रहेगी। पंचांग के अनुसार चंद्रमा मिथुन राशि में रहेगा और चंद्र निवास पश्चिम दिशा में माना गया है।
आज पुनर्वसु नक्षत्र रात 12:14 AM तक रहेगा। इसके बाद पुष्य नक्षत्र शुरू होगा। चूंकि यह परिवर्तन सूर्योदय से पहले ही हो चुका होगा, इसलिए दिन की शुरुआत पुष्य नक्षत्र की स्थिति में होगी।
परिघ योग दोपहर 12:32 PM तक रहेगा। इसके बाद योग में परिवर्तन होगा। दिन के मध्य तक योग की स्थिति बदलने के कारण सुबह और दोपहर के समय को अलग-अलग पंचांग चरणों में देखा जा सकता है।
आज कौलव करण सुबह 5:52 AM तक रहेगा। इसी समय अष्टमी तिथि भी समाप्त होगी। यानी सूर्योदय के आसपास ही तिथि और करण दोनों में बदलाव होगा। इसके बाद दिन की नई तिथि और करण प्रभावी होंगे।
आज शुभ मुहूर्त 11:24 AM से 12:10 PM तक रहेगा। किसी महत्वपूर्ण कार्य का समय निर्धारित करते समय इस अवधि को पंचांग के अनुसार शुभ समय के रूप में देखा जा सकता है।
दिन के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 4:14 PM से 5:43 PM
गुलिक काल: 2:45 PM से 4:14 PM
यमघण्टकाल: 11:47 AM से 1:16 PM
पारंपरिक पंचांग मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है। आवश्यक कार्यों के लिए परिस्थिति और कार्य की जरूरत के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।
आज दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। यदि आज पश्चिम दिशा की यात्रा करनी हो, तो पंचांग में दी गई इस गणना को ध्यान में रखना पारंपरिक रूप से उचित माना जाता है। इसके साथ यात्रा की वास्तविक परिस्थितियों और स्थानीय जानकारी को भी देखना उपयोगी रहेगा।
आज सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित रहेगा। पंचांग के अनुसार चंद्र निवास पश्चिम दिशा में है। सूर्य और चंद्रमा की राशिगत स्थिति को तिथि, नक्षत्र और योग के साथ देखकर दिन की पारंपरिक ज्योतिषीय स्थिति को समझा जाता है।
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