
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
एक ही दिन में सूर्योदय से लेकर रात तक कई समयखंड बदलते हैं और पंचांग इन्हीं बदलावों को व्यवस्थित रूप से देखने का माध्यम है। 27 सितंबर 2026 के लिए तिथि, नक्षत्र, योग और करण के साथ शुभ मुहूर्त तथा राहुकाल भी ध्यान देने योग्य हैं। आज की दिनचर्या में कौन-से समय किस वजह से महत्वपूर्ण माने जाते हैं, इसे आगे करीब से देखते हैं।
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27 सितंबर 2026 को कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि रात 8:59 PM तक रहेगी और रविवार का दिन है। पूर्णिमा के अगले दिन पंचांग की गणना में एक नया पक्ष शुरू होता है, वहीं आज अमांत और पूर्णिमांत मास की गणना में भी अंतर दिखाई देता है। सुबह के समय करण, योग और नक्षत्र में बदलाव होंगे, जबकि शाम 6:05 PM पर चंद्रोदय होगा। इसलिए आज के पंचांग में दिन के अलग-अलग समय को समझना खास उपयोगी रहेगा।
विवरण | जानकारी |
तिथि | कृष्ण पक्ष प्रतिपदा (8:59 PM तक) |
वार | रविवार |
पूर्णिमांत मास | अश्विन |
अमांत मास | भाद्रपद |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | शरद |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 05:49 |
सूर्यास्त | 17:50 |
चंद्रोदय | 18:05 |
चंद्रास्त | 06:11 |
नक्षत्र | उत्तर भाद्रपद (11:09 AM तक) |
योग | वृद्धि (11:17 AM तक) |
करण | बालव (9:40 AM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:26 AM से 12:14 PM |
राहुकाल | 4:20 PM से 5:50 PM |
गुलिक काल | 2:50 PM से 4:20 PM |
यमघण्टकाल | 11:50 AM से 1:20 PM |
दिशाशूल | पश्चिम |
सूर्य राशि | कन्या |
चंद्र राशि | मीन |
चंद्र निवास | उत्तर |
आज कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि रात 8:59 PM तक रहेगी। पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष की शुरुआत होने के कारण आज चंद्रमा के घटते क्रम का नया चरण शुरू माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह समय पिछले पक्ष की पूर्णता के बाद नई दिनचर्या और साधना क्रम की शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है।
आज रविवार है, जिसका संबंध परंपरागत रूप से सूर्य देव से माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में रविवार को सूर्य उपासना, अनुशासन और आत्मबल से जुड़े कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। सुबह का समय अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करने और पूजा-पाठ के लिए रखा जा सकता है।
आज पंचांग की मास गणना में एक खास अंतर देखने को मिलता है। अमांत पद्धति के अनुसार भाद्रपद मास चल रहा है, जबकि पूर्णिमांत पद्धति के अनुसार अश्विन मास शुरू हो चुका है। इसलिए आज दोनों प्रणालियों में मास का नाम अलग दिखाई देता है।
आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) प्रभावी हैं। संवत भारतीय पारंपरिक काल गणना का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और धार्मिक तिथियों तथा व्रत-पर्व की जानकारी को समझने में इनका उल्लेख किया जाता है।
आज पंचांग में शरद ऋतु दर्ज है। मौसम के स्तर पर भी यह समय वर्षा के बाद बदलाव का दौर माना जाता है। सुबह और शाम के तापमान में अंतर हो सकता है, इसलिए यात्रा या बाहरी गतिविधियों की योजना बनाते समय स्थानीय मौसम को ध्यान में रखना उपयोगी रहेगा।
अयन की दृष्टि से दक्षिणायन चल रहा है। भारतीय परंपरा में दक्षिणायन को सूर्य की दक्षिण दिशा की ओर गति से जुड़ी अवधि माना जाता है। धार्मिक जीवन में इस अवधि को पूजा, साधना और आत्मचिंतन जैसी गतिविधियों से जोड़ा जाता है।
आज सूर्योदय 5:49 AM पर और सूर्यास्त 5:50 PM पर होगा। दोनों समयों के बीच का अंतर दिन की गतिविधियों की योजना बनाने में उपयोगी हो सकता है। सुबह की पूजा, दैनिक काम और शाम की गतिविधियां तय करते समय सूर्य के इन समयों को ध्यान में रखा जा सकता है।
आज चंद्रोदय 6:05 PM पर होगा और चन्द्रास्त अगले दिन 6:11 AM पर होगा। पूर्णिमा के बाद चंद्रमा का घटता चरण शुरू हो चुका है। चंद्रमा मीन राशि में रहेगा और पंचांग के अनुसार चंद्र निवास उत्तर दिशा में माना गया है।
आज उत्तर भाद्रपद नक्षत्र 11:09 AM तक रहेगा। इसके बाद नक्षत्र में परिवर्तन होगा। ज्योतिषीय परंपरा में उत्तर भाद्रपद को स्थिरता, गंभीरता, धैर्य और आत्मचिंतन से जुड़े गुणों के साथ देखा जाता है। इसलिए दिन के शुरुआती हिस्से में शांत मन से जरूरी योजनाओं की समीक्षा करना उपयोगी माना जा सकता है।
वृद्धि योग 11:17 AM तक रहेगा। इसके बाद योग में परिवर्तन होगा। पंचांग में योग दिन की समयगत स्थिति को समझने का एक महत्वपूर्ण आधार है। आज नक्षत्र और योग दोनों में लगभग सुबह के मध्य में बदलाव होने के कारण दोपहर से पहले का समय विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है।
आज बालव करण 9:40 AM तक रहेगा। इसके बाद करण बदल जाएगा। इस तरह सुबह 9:40 AM के बाद करण, 11:09 AM पर नक्षत्र और 11:17 AM पर योग में बदलाव होगा। दिन की पहली पाली में ये क्रमिक परिवर्तन पंचांग की स्थिति को लगातार बदलते हैं।
आज शुभ मुहूर्त 11:26 AM से 12:14 PM तक रहेगा। किसी महत्वपूर्ण कार्य का समय तय करते समय इस अवधि को पंचांग के अनुसार शुभ समय के रूप में देखा जा सकता है।
दिन के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 4:20 PM से 5:50 PM
गुलिक काल: 2:50 PM से 4:20 PM
यमघण्टकाल: 11:50 AM से 1:20 PM
पारंपरिक पंचांग मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है। आवश्यक कार्य होने पर परिस्थिति और काम की जरूरत के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।
आज दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। यदि पश्चिम दिशा की यात्रा करनी हो, तो यात्रा से पहले पंचांग की इस गणना को ध्यान में रखना पारंपरिक रूप से उचित माना जाता है। इसके साथ यात्रा की वास्तविक परिस्थितियों और स्थानीय मौसम की जानकारी देखना भी उपयोगी रहेगा।
आज सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा मीन राशि में स्थित रहेगा। चंद्रमा का निवास उत्तर दिशा में माना गया है। सूर्य और चंद्रमा की राशिगत स्थिति पंचांग के दैनिक ज्योतिषीय विवरण का हिस्सा होती है और इसे तिथि, नक्षत्र तथा योग के साथ देखा जाता है।
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