
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
शुक्रवार को देवी पूजा के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानने की परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है। इस बार इसी दिन नवरात्रि का छठा दिन पड़ रहा है, जब मां कात्यायनी की आराधना की जाएगी। भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक रीति के अनुसार पूजा, व्रत या भोग अर्पित कर सकते हैं। चलिए जानते हैं आज का पंचांग क्या कहता है?
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16 अक्टूबर 2026 को शुक्रवार है और शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि सुबह 5:55 AM तक रहेगी। आज के पंचांग में एक खास बात यह है कि नक्षत्र और तिथि के समय को अलग-अलग समझना जरूरी है, क्योंकि दोनों की अवधि एक जैसी नहीं है। ज्येष्ठा नक्षत्र सुबह 6:48 AM तक रहेगा, जबकि शोभन योग रात 10:05 PM तक प्रभावी रहेगा। दिन में 11:21 AM से 12:07 PM तक शुभ मुहूर्त है। पूजा-पाठ, व्रत या किसी धार्मिक आयोजन की तैयारी कर रहे हैं, तो तिथि के साथ इन समयों को देखना दिन की योजना बनाने में मदद कर सकता है।
विवरण | जानकारी |
तिथि | शुक्ल पक्ष षष्ठी (5:55 AM तक) |
वार | शुक्रवार |
पूर्णिमांत मास | अश्विन |
अमांत मास | अश्विन |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | शरद |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 05:58 |
सूर्यास्त | 17:31 |
चंद्रोदय | 11:02 |
चंद्रास्त | 21:27 |
नक्षत्र | ज्येष्ठा (6:48 AM तक) |
योग | शोभन (10:05 PM तक) |
करण | कौलव (4:39 PM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:21 AM से 12:07 PM |
राहुकाल | 10:18 AM से 11:44 AM |
गुलिक काल | 7:24 AM से 8:51 AM |
यमघण्टकाल | 2:38 PM से 4:04 PM |
दिशाशूल | पश्चिम |
सूर्य राशि | कन्या |
चंद्र राशि | वृश्चिक |
चंद्र निवास | उत्तर |
आज शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि सुबह 5:55 AM तक रहेगी। इसके बाद सप्तमी तिथि आरंभ होगी। चूंकि तिथि का परिवर्तन सुबह जल्दी हो रहा है, इसलिए आज के धार्मिक कार्यों के लिए केवल कैलेंडर की तारीख पर निर्भर रहने के बजाय पंचांग में दी गई तिथि की अवधि देखना उपयोगी है।
शुक्रवार का संबंध परंपरागत रूप से माता लक्ष्मी और शुक्र ग्रह से जोड़ा जाता है। इस दिन कई परिवारों में लक्ष्मी पूजन, घर की साफ-सफाई और सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करने की परंपरा है। यदि आप शुक्रवार को कोई विशेष पूजा करना चाहते हैं, तो संबंधित पूजा-विधि और उसके लिए निर्धारित समय को भी ध्यान में रखें।
आज अमांत और पूर्णिमांत, दोनों पद्धतियों के अनुसार अश्विन मास है। भारतीय पंचांग में इन दोनों प्रणालियों का उपयोग चंद्र मास की गणना के लिए किया जाता है। इनके आधार अलग होने के बावजूद आज की दी गई गणना में मास का नाम समान है।
वर्तमान काल गणना के अनुसार विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) चल रहे हैं। संवत का उल्लेख धार्मिक तिथियों, पर्वों और पारंपरिक आयोजनों को वर्ष के संदर्भ में समझने में सहायक होता है। पंचांग में तिथि, मास और संवत को एक साथ देखने से किसी दिन की पहचान अधिक स्पष्ट होती है।
16 अक्टूबर को शरद ऋतु है और सूर्य की वार्षिक गति से संबंधित पारंपरिक गणना के अनुसार दक्षिणायन चल रहा है। शरद ऋतु में सुबह और शाम का वातावरण दिन के मुकाबले अलग महसूस हो सकता है। दैनिक गतिविधियों, यात्रा और बाहर के कामों की योजना बनाते समय स्थानीय मौसम का ध्यान रखना व्यावहारिक रहेगा।
पंचांग में ऋतु और अयन का उल्लेख केवल मौसम के संदर्भ में नहीं, बल्कि पारंपरिक काल गणना के हिस्से के रूप में भी किया जाता है। इन विवरणों से तिथि और वार के साथ उस समय की मौसमी तथा खगोलीय पृष्ठभूमि को समझने में मदद मिलती है।
आज सूर्योदय 5:58 AM पर और सूर्यास्त 5:31 PM पर होगा। सुबह की दिनचर्या, सूर्य उपासना और शाम की गतिविधियों के लिए इन समयों को ध्यान में रखा जा सकता है। दिन के उजाले की अवधि समझने के लिए सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों का समय उपयोगी रहता है।
चंद्रमा का उदय 11:02 AM पर और चंद्रास्त 9:27 PM पर होगा। इस प्रकार चंद्रमा दिन के दौरान उदित होगा और रात में अस्त होगा। आज चंद्रमा वृश्चिक राशि में है और चंद्र निवास उत्तर दिशा में बताया गया है। चंद्रमा से जुड़े धार्मिक नियमों या किसी विशेष व्रत का पालन करते समय उस व्रत की निर्धारित परंपरा के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
आज ज्येष्ठा नक्षत्र सुबह 6:48 AM तक रहेगा। इसके बाद नक्षत्र में परिवर्तन होगा। दिन की शुरुआत में नक्षत्र की यह स्थिति महत्वपूर्ण है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो किसी संस्कार, पूजा या अन्य धार्मिक गतिविधि का समय नक्षत्र के आधार पर तय करते हैं।
शोभन योग रात 10:05 PM तक रहेगा। पंचांग में योग की गणना तिथि और नक्षत्र के साथ दिन की पारंपरिक ज्योतिषीय स्थिति समझने के लिए की जाती है। आज इसकी अवधि देर रात तक बनी रहेगी।
कौलव करण शाम 4:39 PM तक रहेगा। करण तिथि का आधा भाग होता है, इसलिए इसकी अवधि तिथि की अवधि से अलग हो सकती है। आज तिथि सुबह ही बदल जाएगी, जबकि कौलव करण शाम तक रहेगा। इससे स्पष्ट होता है कि पंचांग के प्रत्येक घटक का समय अलग-अलग देखना चाहिए, न कि सभी बदलावों को एक ही समय से जोड़कर समझना चाहिए।
आज शुभ मुहूर्त सुबह 11:21 AM से दोपहर 12:07 PM तक है। पंचांग के अनुसार किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए समय चुनते हुए इस अवधि पर विचार किया जा सकता है। विवाह, गृह प्रवेश या अन्य विशेष संस्कारों के लिए केवल सामान्य शुभ मुहूर्त पर्याप्त नहीं होता; उनके लिए अलग मुहूर्त की आवश्यकता हो सकती है।
आज के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 10:18 AM से 11:44 AM
गुलिक काल: 7:24 AM से 8:51 AM
यमघण्टकाल: 2:38 PM से 4:04 PM
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए या महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने से बचने की सलाह दी जाती है। आज राहुकाल और शुभ मुहूर्त के समय में कुछ अंतराल का मेल भी ध्यान देने योग्य है, इसलिए किसी काम के लिए समय तय करते हुए दोनों अवधियों को अलग-अलग देखना चाहिए।
आज दिशाशूल पश्चिम दिशा में है। पारंपरिक पंचांग में इसे यात्रा की दिशा से संबंधित विवरण माना जाता है। यदि पश्चिम दिशा की यात्रा की योजना है, तो इस मान्यता को ध्यान में रखा जा सकता है। हालांकि, यात्रा की वास्तविक जरूरतों और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेना भी जरूरी है।
ग्रहों की राशिगत स्थिति के अनुसार सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा। चंद्र निवास उत्तर दिशा में है, जबकि दिशाशूल पश्चिम दिशा में बताया गया है। दोनों का उल्लेख पंचांग में अलग-अलग उद्देश्यों से किया जाता है, इसलिए इन्हें एक ही गणना नहीं समझना चाहिए।
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