माँ कूष्मांडा के मंत्र
image
downloadDownload
shareShare
ShareWhatsApp

माँ कूष्मांडा के मंत्र | Maa Kushmanda Ke Mantra

जानें माँ कूष्मांडा के पूजन विधि और मंत्र के लाभ।

माँ कूष्मांडा के बारे में

मां कूष्मांडा, मां दुर्गा के नौ रूपों में से एक है, जिनकी पूजा नवरात्र के चौथे दिन की जाती है। मां कूष्मांडा को ब्रह्मांड की निर्माता कहा जाता है। मां कूष्मांडा को सृष्टि की आदि स्वरूपा यानी आदिशक्ति कहते हैं। मां दुर्गा के इस स्वरूप का निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में है। मां कूष्माण्डा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग मिट जाते हैं। मां के इस स्वरूप की भक्ति से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है।

मां कूष्मांडा के स्वयं सिद्ध बीज मंत्र

मां कूष्मांडा के स्वयं सिद्ध बीज मंत्र का महत्त्व अत्यधिक है। देवी कूष्मांडा मां दुर्गा के चौथे रूप में पूजित हैं। इनके बीज मंत्र का जाप करने से साधक को सुख, समृद्धि और उन्नति की प्राप्ति होती है।

share
मंत्र: ऐं ह्री देव्यै नम:

अर्थ: इस मंत्र का अर्थ यह है कि "ज्ञान, शक्ति और माया स्वरूपिणी देवी को मेरा नमन है।" इस मंत्र के जाप से भक्त को देवी का आशीर्वाद, ज्ञान और आंतरिक शक्ति की प्राप्ति होती है।

माँ कूष्मांडा का पूजन मंत्र

share
मंत्र: सुरासम्पूर्णकलशं, रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां, कूष्मांडा शुभदास्तु मे।।

अर्थ: यह श्लोक माँ कूष्मांडा को समर्पित है और इस श्लोक के माध्यम से उनका ध्यान करते हुए उनकी कृपा का आह्वान किया है।

इसका अर्थ है कि जो देवी अपने हाथों में अमृत से भरा हुआ कलश और रक्त से सिक्त माला धारण करती हैं, वे माँ कूष्मांडा हमें शुभ और कल्याणकारी आशीर्वाद प्रदान करें।

share
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

अर्थ: यह श्लोक माँ कूष्मांडा की महिमा का वर्णन करता है और उन्हें समर्पित है इस श्लोक के माध्यम से भक्त माँ कूष्मांडा से आशीर्वाद और कृपा की प्रार्थना करते हैं, और उन्हें सर्वव्यापी शक्ति के रूप में मानते हैं। यह श्लोक शक्ति और आध्यात्मिकता का प्रतीक है।

जाप विधि

मां कुष्मांडा के बीज मंत्रों का जाप एक माला यानी 108 बार करना चाहिए। मां कूष्माण्डा के बीज मंत्रों का जाप करने से आप जीवन में हमेशा उन्नति की ओर अग्रसर होते हैं। मां दुर्गा अपने कूष्मांडा स्वरूप में सात हाथों में कमंडल, धनुष-बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र और गदा धारण किए हुए हैं। मां के आठवें हाथ में सभी सिद्धियों को देने वाली जपमाला है। मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना से सभी प्रकार के रोग और शारीरिक परेशानियां दूर होती है। मां कूष्मांडा अपने भक्तों की थोड़ी सी भक्ति से भी प्रसन्न हो जाती हैं, और यश-बल और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

श्रीमंदिर के साथ Online Puja बुक करना आसान और सुविधाजनक है, जहाँ आप घर बैठे अपनी पसंद की पूजा या हवन कुछ ही क्लिक में बुक कर सकते हैं। अनुभवी पंडितों द्वारा विधि-विधान से पूजा संपन्न की जाती है, जिससे आपको बिना कहीं जाए दिव्य आशीर्वाद और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।

divider
Published by Sri Mandir·April 7, 2026

Did you like this article?

आपके लिए लोकप्रिय लेख

और पढ़ेंright_arrow
Card Image

अम्बे गौरी की आरती

अम्बे गौरी की आरती एक भक्तिपूर्ण स्तुति है, जो देवी दुर्गा के शक्ति स्वरूप को समर्पित है। यह आरती देवी गौरी (माँ पार्वती) की महिमा का गुणगान करती है और उनके भक्तों को उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है।

right_arrow
Card Image

चैत्र नवरात्रि कब है और शुभ मुहूर्त 2026

चैत्र नवरात्रि 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त जानें। देवी दुर्गा की उपासना के लिए महत्वपूर्ण दिन और पूजा विधि की जानकारी प्राप्त करें।

right_arrow
Card Image

माँ शैलपुत्री की कथा

माँ शैलपुत्री की कथा पढ़ें और जानें उनके जन्म, महत्व और पूजा विधि के बारे में। नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की आराधना से मिलते हैं शक्ति, शांति और समृद्धि के आशीर्वाद।

right_arrow
srimandir-logo

श्री मंदिर ने श्रध्दालुओ, पंडितों, और मंदिरों को जोड़कर भारत में धार्मिक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया है। 100 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के साथ साझेदारी करके, हम विशेषज्ञ पंडितों द्वारा की गई विशेष पूजा और चढ़ावा सेवाएँ प्रदान करते हैं और पूर्ण की गई पूजा विधि का वीडियो शेयर करते हैं।

हमारा पता

फर्स्टप्रिंसिपल ऐप्सफॉरभारत प्रा. लि. 2nd फ्लोर, अर्बन वॉल्ट, नं. 29/1, 27वीं मेन रोड, सोमसुंदरपल्या, HSR पोस्ट, बैंगलोर, कर्नाटक - 560102
YoutubeInstagramLinkedinWhatsappTwitterFacebook