माघ मेले में कितने लोग आयेंगे 2026?
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माघ मेले में कितने लोग आयेंगे?

माघ मेले में कितने लोग आयेंगे 2026 में और संगम पर कितनी भीड़ जमा होती है? इस लेख में जानिए माघ मेला 2026 में अनुमानित श्रद्धालुओं की संख्या, प्रमुख स्नान पर्व, आस्था की वजह और प्रयागराज माघ मेले के आयोजन की तैयारियों के बारे में

माघ मेले में कितने लोग आयेंगे, इसके बारे में

कोहरे में डूबा संगम, नावों की सजी कतारें, घाटों पर जलते दीप और आस्था की डुबकी लगाते श्रद्धालु यह दृश्य माघ मेले को एक दिव्य उत्सव का रूप दे रहा है। संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती दिखाई दे रही है, जहां देश के अलग-अलग राज्यों से आए श्रद्धालु, संत और कल्पवासी पावन संगम में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। चारों ओर भक्ति और श्रद्धा का अनुपम वातावरण बना हुआ है। इस लेख में मिलेगी आपको मेले के अद्भुत संगम का नज़ारा, प्रमुख स्नान पर्वों की जानकारी, आस्था का सैलाब और मेले की व्यापक तैयारी की जानकारी तो आइए जानें।

माघ मेला

सर्द हवाओं और कोहरे की मोटी चादर के बीच भोर की पहली किरण संगम तट पर उतरने लगी है और दिखने लगा है प्रयागराज में माघ मेले का वास्तविक और दिव्य स्वरूप। त्रिवेणी यानि गंगा, यमुना और सरस्वती के पावन संगम पर श्रद्धा, तपस्या और साधना का ऐसा दृश्य बन रहा है जो शब्दों से बिल्कुल परे है।

इस साल की नइ शुरूआत के तीसरे दिन यानि 3 जनवरी 2026 को पौष पूर्णिमा के साथ माघ मेला 2026 का शुभारंभ हो चुका है और इसी के साथ पूरा मेला क्षेत्र हर-हर गंगे और जय संगम के उद्घोष से गूंज उठा। वहीं, कड़ाके की ठंड और गलन के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। सिर पर गठरी, हाथों में पूजा-सामग्री और मन में मोक्ष की आकांक्षा लिए लाखों श्रद्धालु संगम की ओर निरंतर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। जैसा कि जानते हैं कि माघ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की जीवंत परंपरा है। यहां कल्पवासी कठिन तप का संकल्प लेकर एक माह तक संयमित जीवन जीते हैं तो वहीं साधु-संत अपनी साधना में लीन रहते हैं और सामान्य श्रद्धालु कुछ क्षणों के लिए सांसारिक भागदौड़ से दूर आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं। देश-विदेश से आने वाले साधख इस अद्भुत क्षण के बनना चाहते हैं।

इस बार माघ मेला 2026 का आयोजन 3 जनवरी 2026 से 15 फरवरी 2026 तक किया जा रहा है। यह मेला महाशिवरात्रि स्नान के साथ संपन्न होगा। इस अवधि में संगम क्षेत्र ने एक अस्थायी धार्मिक नगर का रूप लिया हुआ है। जहां कल्पवास, प्रवचन, यज्ञ, भजन-कीर्तन और साधना का निरंतर क्रम चल रह हैे।

उमड़ सकता है करोड़ों श्रद्धालुओं का जनसैलाब

माघ मेला 2026 की शुरुआत यह संकेत दे चुकी है कि इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती है। पहले दिन पौष पूर्णिमा स्नान पर्व पर संगम और आसपास के घाटों पर अभूतपूर्व भीड़ देखने को मिली। जानकारी के अनुसार, पहले स्ननान के दिन शाम तक 20 लाख से अधिक श्रद्धालु संगम में पवित्र स्नान कर चुके थे। सामान्य दिनों में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाने पहुंच रहे हैं और यह सिलसिला जारी है। वहीं, मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी जैसे पर्व के दिन संगम क्षेत्र में जनसैलाब और अधिक बढ़ सकता है। मौनी अमावस्या को माघ मेले का सबसे बड़ा स्नान पर्व माना जाता है, जब संगम पर एक करोड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति होने का अनुमान है।

अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, माघ मेला 2026 के दौरान लगभग 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के प्रयागराज आने की संभावना है। इनमें देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ विदेशों से आने वाले भक्त भी शामिल होंगे। पहले दिन की भारी भीड़ यह साफ संकेत देती है कि इस बार माघ मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि जनसंख्या और व्यवस्थाओं के लिहाज से भी ऐतिहासिक साबित होने वाला है।

इन विशेष दिनों पर दिखेगी अद्भुत छटा

माघ मेले में कुल छह प्रमुख स्नान पर्व होते हैं, जिन्हें स्नान-दान के लिए अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है और इन विशेष तिथियों पर साधु-संतों, कल्पवासियों तथा श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक रहने की उम्मीद रहती है। मकर संक्रांति (14 जनवरी 2026) के दिन सूर्य के उत्तरायण होने के कारण संगम में स्नान का विशेष महत्व होता है, जबकि मौनी अमावस्या (18 जनवरी 2026) को माघ मेले का सबसे प्रमुख स्नान पर्व माना जाता है, जब आस्था का जनसैलाब संगम तट पर उमड़ पड़ता है। बसंत पंचमी (23 जनवरी 2026) ज्ञान, ऋतु परिवर्तन और साधना का प्रतीक पर्व है, वहीं माघी पूर्णिमा (1 फरवरी 2026) माघ मास के पूर्ण होने का संकेत देती है। महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026) को भगवान शिव की आराधना के साथ माघ मेले का समापन होता है। मान्यता है कि इन पावन पर्वों पर संगम में स्नान करने से पापों का नाश होता है, पुण्य की प्राप्ति होती है और आत्मा की शुद्धि के साथ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

मोक्ष की आकंक्षा लिए आ रहे हैं साधक

माघ मेला भारतीय आस्था की जड़ों से जुड़ा हुआ है। धर्मशास्त्रों में माघ मास को स्नान, दान और तपस्या के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। मान्यता है कि संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। यही कारण है कि यहां देश-विदेश से लोग मोक्ष की आकंक्षा लिए आते हैं। इसके अलावा कल्पवास की परंपरा इसी आस्था का विस्तार है, जहां श्रद्धालु कठिन जीवनचर्या अपनाकर संयम, सेवा और साधना का मार्ग चुनते हैं। साधु-संतों की उपस्थिति माघ मेले को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है, जिससे यह आयोजन केवल एक मेला न रहकर आत्मिक यात्रा बन जाता है। वहीं, माघ मेले के दौरान पूरे मेला क्षेत्र को विशेष साज-सज्जा से सजाया गया है, जिससे संगम तट और आसपास का वातावरण और अधिक आकर्षक व आध्यात्मिक प्रतीत हो रहा है। रंग-बिरंगी रोशनी से घाटों, पॉन्टून पुलों और प्रमुख मार्गों को सजाया गया है, जो रात के समय मेले की सुंदरता को कई गुना बढ़ा रही है।

माघ मेले में सुरक्षा और व्यवस्थाएं पूरी तरह चाक-चौबंद

माघ मेला 2026 के लिए प्रशासन ने व्यापक और बहुस्तरीय तैयारियां की हैं। मेला क्षेत्र का विस्तार किया गया है, स्नान घाटों की लंबाई बढ़ाई गई है और सेक्टरों की संख्या में इजाफा किया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अस्थायी सड़कें, पॉन्टून पुल, पार्किंग स्थल और आवासीय शिविर विकसित किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को अत्यंत मजबूत बनाया गया है। पूरे मेला क्षेत्र में आधुनिक निगरानी प्रणाली, ड्रोन और नियंत्रण कक्ष के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है। जल सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती की गई है, जबकि भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त पुलिस बल को लगाया गया है। स्वच्छता के लिए हजारों सफाईकर्मी चौबीसों घंटे कार्यरत हैं, ताकि मेला क्षेत्र स्वच्छ और सुव्यवस्थित बना रहे। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य यही है कि श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के श्रद्धा और शांति के साथ स्नान कर सकें।

2025 में 30 करोड़ से अधिक का आंकड़ा हुआ था पार

जानकारी के अनसार, दिव्य, भव्य महाकुंभ 2025 में प्रयागराज ने एक बार फिर वैश्विक धार्मिक मानचित्र पर स्थापित किया। उस आयोजन में 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने प्रशासन को भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और सुविधाओं के नए अनुभव दिए। महाकुंभ की ऐतिहासिक सफलता ने यह सिद्ध कर दिया कि आस्था और आधुनिक प्रबंधन का संतुलन संभव है। अंत: माघ मेला 2026 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और सामूहिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। ठंड, कोहरा और कठिन परिस्थितियों के बावजूद संगम पर उमड़ती भीड़ यह साबित करती है कि आस्था की गर्माहट कभी कम नहीं होती। माघ मेला हर वर्ष यह संदेश देता है कि भारत की आत्मा आज भी अपनी परंपराओं में जीवित है और संगम उसका सबसे पवित्र साक्षी है।

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Published by Sri Mandir·January 8, 2026

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