वराह जयंती कब है?
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वराह जयंती कब है?

क्या आप जानना चाहते हैं कि वराह जयंती कब मनाई जाती है और इसका धार्मिक महत्व क्या है? इस लेख में जानिए भगवान विष्णु के वराह अवतार की जयंती की तिथि, पूजा-विधि, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथा, आध्यात्मिक महत्व और इस दिन किए जाने वाले विशेष उपायों की संपूर्ण जानकारी।

वराह जयंती के बारे में

वराह जयंती भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित एक पवित्र पर्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब पृथ्वी पर संकट बढ़ गया और दैत्य शक्तियों ने धरती को जल में डुबो दिया, तब भगवान विष्णु ने वराह अर्थात दिव्य सूअर का रूप धारण कर पृथ्वी की रक्षा की। उन्होंने अपने शक्तिशाली दांतों पर पृथ्वी को उठाकर उसे पुनः सुरक्षित स्थान पर स्थापित किया। यह अवतार धर्म की रक्षा और बुराई के अंत का प्रतीक माना जाता है। वराह जयंती का पर्व भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। यह पर्व सत्य, शक्ति, संरक्षण और धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है।

वराह जयंती कब है?

सनातन धर्म में वराह जयंती का विशेष महत्व माना जाता है। यह पावन पर्व भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने वराह रूप धारण कर पृथ्वी को संकट से मुक्त किया था। इसी दिव्य घटना की स्मृति में हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को वराह जयंती मनाई जाती है।

वर्ष 2026 में वराह जयंती रविवार, 13 सितम्बर को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना, व्रत और मंत्र जाप का विशेष महत्व रहेगा। भक्तजन इस अवसर पर भगवान वराह का स्मरण कर सुख-समृद्धि और रक्षा का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।

वराह जयंती 2026 शुभ मुहूर्त

  • पूजा का शुभ समय : दोपहर 01:26 बजे से 03:53 बजे तक
  • मुहूर्त की कुल अवधि : 2 घंटे 27 मिनट
  • तृतीया तिथि प्रारम्भ : 13 सितम्बर 2026 को सुबह 07:08 बजे
  • तृतीया तिथि समाप्त : 14 सितम्बर 2026 को सुबह 07:06 बजे

इस शुभ दिन भगवान विष्णु के वराह स्वरूप की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होने और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने की मान्यता है।

वराह जयंती क्या है?

वराह जयंती हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित माना जाता है। भगवान विष्णु ने सृष्टि की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए अनेक अवतार लिए, जिनमें वराह अवतार को विशेष स्थान प्राप्त है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब पृथ्वी पर संकट बढ़ गया और असुर हिरण्याक्ष ने अपनी शक्ति के बल पर पृथ्वी को समुद्र की गहराइयों में डुबो दिया, तब पूरे ब्रह्मांड में अशांति फैल गई। देवता और ऋषि चिंतित हो उठे। तब भगवान विष्णु ने वराह अर्थात विशाल सूअर का रूप धारण किया। उन्होंने समुद्र में उतरकर हिरण्याक्ष का वध किया और अपनी दिव्य दाढ़ों पर पृथ्वी को उठाकर पुनः सुरक्षित स्थान पर स्थापित किया। इस प्रकार भगवान वराह ने संसार की रक्षा कर धर्म और संतुलन को फिर से स्थापित किया।

इसी दिव्य घटना की स्मृति में हर वर्ष वराह जयंती मनाई जाती है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु के वराह स्वरूप की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और सुख-समृद्धि तथा रक्षा का आशीर्वाद मांगते हैं।

वराह जयंती का महत्व

वराह जयंती हमें यह संदेश देती है कि सत्य और धर्म की शक्ति हमेशा अन्याय और बुराई पर विजय प्राप्त करती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होने, नकारात्मक शक्तियों से रक्षा मिलने और घर में सुख-शांति आने की मान्यता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, वराह भगवान की आराधना करने से व्यक्ति को साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

वराह अवतार की कथा हमें यह भी सिखाती है कि अहंकार और शक्ति का गलत उपयोग अंततः विनाश का कारण बनता है। हिरण्याक्ष अत्यंत शक्तिशाली था, लेकिन उसके अभिमान और अधर्म के कारण उसका अंत हुआ। वहीं भगवान वराह ने धर्म, करुणा और संरक्षण का संदेश दिया। इस पावन अवसर पर भक्त व्रत रखते हैं, विष्णु मंत्रों का जाप करते हैं, कथा सुनते हैं और दान-पुण्य करते हैं। ऐसा माना जाता है कि सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, समृद्धि तथा शांति बनी रहती है।

वराह जयंती का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

वराह जयंती हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शुभ पर्व माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु के वराह अवतार की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्होंने पृथ्वी की रक्षा कर धर्म और सृष्टि के संतुलन को बनाए रखा था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

आध्यात्मिक दृष्टि से वराह अवतार हमें यह सीख देता है कि ईश्वर हमेशा अपने भक्तों और धर्म की रक्षा के लिए उपस्थित रहते हैं। यह पर्व विश्वास, भक्ति और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। भगवान वराह की कथा व्यक्ति को यह प्रेरणा देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। इस दिन मंत्र जाप, पूजा-पाठ, दान और ध्यान करने से मन को शांति मिलती है तथा आत्मिक शक्ति बढ़ती है। ऐसा माना जाता है कि सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करने पर व्यक्ति को मानसिक संतुलन, आध्यात्मिक उन्नति और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।

वराह जयंती से जुड़ी परंपराएं और मान्यताएं

  • वराह जयंती भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित पवित्र पर्व है।
  • मान्यता है कि भगवान विष्णु ने वराह रूप में पृथ्वी को हिरण्याक्ष से बचाकर धर्म की रक्षा की थी।
  • इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और भगवान वराह की पूजा-अर्चना करते हैं।
  • पूजा में पंचामृत, तुलसी दल, पीले फूल, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं।
  • वराह अवतार की कथा सुनने और विष्णु मंत्रों का जाप करने की परंपरा है।
  • कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ किया जाता है।
  • इस दिन दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है। जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन का दान दिया जाता है।
  • धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा से पूजा करने पर सुख-शांति, समृद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

वराह जयंती की तैयारी कैसे की जाती है?

वराह जयंती भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित एक पवित्र पर्व है। इस दिन भक्त पूरे श्रद्धा और भक्तिभाव से पूजा की तैयारी करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से की गई पूजा जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा लाती है।

इस पर्व की तैयारी प्रायः एक दिन पहले से ही शुरू कर दी जाती है। लोग अपने घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करते हैं, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं में स्वच्छता को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। पूजा के लिए भगवान वराह या भगवान विष्णु की मूर्ति अथवा चित्र को सजाया जाता है। पूजा स्थल को फूलों, दीपकों और रंगोली से सुंदर बनाया जाता है ताकि वातावरण भक्तिमय और पवित्र बने।

भक्त पूजा के लिए आवश्यक सामग्री पहले से एकत्र कर लेते हैं, जैसे — गंगाजल, पंचामृत, पीले फूल, तुलसी दल, धूप, दीप, फल, मिठाई और भोग की अन्य सामग्री। कई लोग इस दिन व्रत रखने का संकल्प भी लेते हैं और सात्विक भोजन का पालन करते हैं।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, कलश स्थापना की भी विशेष महत्ता होती है। पीतल या तांबे के कलश में जल भरकर उसमें आम के पत्ते और नारियल रखा जाता है। इसे शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

वराह जयंती कैसे मनाई जाती है?

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु का ध्यान करें।
  • पूजा स्थल को साफ करके भगवान वराह या भगवान विष्णु की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करें।
  • भगवान को गंगाजल तथा दूध, दही, घी, शहद और मक्खन से बने पंचामृत से स्नान कराएं।
  • पूजा में पीले फूल, तुलसी दल, धूप और दीप अर्पित करें। भगवान विष्णु को पीला रंग प्रिय माना जाता है, इसलिए पीले वस्त्र और पुष्प का विशेष महत्व होता है।
  • पूजा के दौरान श्रद्धापूर्वक “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” सहित भगवान विष्णु के मंत्रों का उच्चारण करें।
  • वराह अवतार की कथा सुनें, जिसमें भगवान विष्णु द्वारा पृथ्वी को हिरण्याक्ष से बचाने की कथा का वर्णन होता है।
  • भजन-कीर्तन, विष्णु स्तोत्र और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करें।
  • भगवान को फल, मिठाई, पंचामृत और सात्विक भोजन का भोग लगाएँ।
  • पूजा के अंत में आरती कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और रक्षा की प्रार्थना करें।
  • वराह जयंती पर व्रत रखने का भी विशेष महत्व माना जाता है। भक्त दिनभर फलाहार ग्रहण कर भगवान का ध्यान करते हैं।
  • इस दिन दान-पुण्य और सेवा कार्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है। जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन का दान किया जाता है।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा लाती है।

वराह जयंती के दिन किए जाने वाले कार्य

  • वराह जयंती के दिन भक्त प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करते हैं और भगवान विष्णु के वराह स्वरूप का स्मरण करते हैं।
  • पूजा के लिए घर या मंदिर में भगवान वराह की प्रतिमा स्थापित की जाती है। कई परंपराओं में कलश स्थापना का विशेष महत्व माना जाता है।
  • भगवान वराह को दूध, घी, शहद, मक्खन और नारियल जल से बने पवित्र पंचामृत से स्नान कराया जाता है।
  • पूजा के बाद भक्त श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करते हैं और भगवान विष्णु के भजन, स्तोत्र एवं मंत्रों का जाप करते हैं।
  • वराह जयंती पर व्रत रखने की भी परंपरा है। भक्त दिनभर सात्विक आहार ग्रहण करते हुए भगवान का ध्यान करते हैं।
  • इस दिन दान-पुण्य को अत्यंत शुभ माना गया है। लोग गरीब और जरूरतमंद लोगों को वस्त्र, भोजन और धन का दान करते हैं।
  • अनेक मंदिरों में इस दिन भगवान वराह की भव्य पूजा और विशेष अभिषेक किया जाता है, जिसमें भक्त पूरे भक्तिभाव से सम्मिलित होते हैं।
  • धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा, व्रत और दान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

वराह जयंती पूजा के लाभ

  • वराह जयंती पर भगवान वराह की पूजा करने से व्यक्ति के मन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है। यह पूजा भय, तनाव और चिंताओं को दूर करने में सहायक मानी जाती है।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान वराह सत्य और धर्म के प्रतीक हैं। उनकी आराधना करने से जीवन में न्याय और सफलता प्राप्त करने की प्रेरणा मिलती है।
  • यह पूजा व्यक्ति के भीतर ईमानदारी, शक्ति, दया और सत्य जैसे अच्छे गुणों का विकास करने में मदद करती है।
  • माना जाता है कि वराह भगवान की कृपा से घर और मन की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है तथा सकारात्मकता और शांति का वातावरण बनता है।
  • वराह जयंती की पूजा जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली लाने वाली मानी जाती है।

वराह जयंती का संदेश

वराह जयंती हमें धर्म, सत्य और अच्छाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। भगवान विष्णु के वराह अवतार की कथा यह संदेश देती है कि जब भी संसार में अन्याय और अधर्म बढ़ता है, तब ईश्वर अपने भक्तों और सृष्टि की रक्षा के लिए अवश्य आते हैं।

यह पर्व हमें सिखाता है कि अहंकार और बुराई का अंत निश्चित है, जबकि सत्य, करुणा और धर्म की हमेशा विजय होती है। वराह जयंती लोगों को साहस, सकारात्मक सोच और कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा भी देती है।

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Published by Sri Mandir·August 25, 2026

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