सावन का महीना कब से है?
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सावन का महीना कब से है?

क्या आप जानना चाहते हैं कि सावन का महीना कब से शुरू हो रहा है और इसका धार्मिक महत्व क्या है? इस लेख में जानिए सावन मास की तिथियां, भगवान शिव की पूजा का महत्व, व्रत विधि और इस पावन महीने में किए जाने वाले विशेष उपायों की पूरी जानकारी।

सावन माह के बारे में

सावन का महीना बहुत ही पवित्र और शुभ माना जाता है, जिसमें मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है। इस समय भगवान शिव की विशेष पूजा, व्रत और आराधना करने से इच्छित फल मिल सकता है। यह महीना शिव भक्ति, वर्षा और प्रकृति की हरियाली के लिए प्रसिद्ध है। इसे पवित्रता, प्रेम और नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान खासकर सावन के सोमवार के व्रत और विभिन्न त्योहारों का विशेष महत्व होता है।

सावन का महीना कब से शुरू है?

साल 2026 में सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। इस बार श्रावण मास लगभग 28 दिनों का रहेगा। सावन के सोमवार के अलावा इस महीने में आने वाली कुछ तिथियां बहुत खास मानी जाती हैं, जैसे त्रयोदशी (प्रदोष व्रत), चतुर्दशी (सावन शिवरात्रि), नाग पंचमी, सावन अमावस्या और सावन पूर्णिमा। इन दिनों जलाभिषेक और भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है।

सावन सोमवार कब-कब हैं?

गुरुवार, 30 जुलाई: सावन महीने की शुरुआत

  • सोमवार, 03 अगस्त: पहला सावन सोमवार व्रत
  • सोमवार, 10 अगस्त: दूसरा सावन सोमवार व्रत
  • सोमवार, 17 अगस्त: तीसरा सावन सोमवार व्रत
  • सोमवार, 24 अगस्त: चौथा सावन सोमवार व्रत
  • शुक्रवार, 28 अगस्त: सावन महीने का समापन

सावन सोमवार क्या है?

श्रावण मास, जिसे सावन भी कहा जाता है, भगवान शिव की भक्ति और उनका आशीर्वाद पाने के लिए खास माना जाता है। इस पूरे महीने में सोमवार का दिन विशेष रूप से शुभ होता है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करता है, उसकी इच्छाएं पूरी होती हैं।

सावन सोमवार का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

धार्मिक महत्व: सावन के सोमवार भगवान शिव को समर्पित माने जाते हैं। इस दिन व्रत रखकर और सच्चे मन से पूजा करने पर भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की इच्छाएं पूरी करते हैं। माना जाता है कि इस व्रत से जीवन में सुख, शांति और खुशहाली आती है।

सांस्कृतिक महत्व: सावन का महीना हरियाली, बारिश और खुशियों का प्रतीक होता है। इस समय लोग झूले झूलते हैं, गीत गाते हैं और त्योहार मनाते हैं। खासकर महिलाओं में इस महीने को लेकर विशेष उत्साह देखा जाता है, जिससे इसका सांस्कृतिक महत्व और बढ़ जाता है।

सावन सोमवार से जुड़ी परंपराएं और मान्यताएं

पौराणिक मान्यता (पार्वती की तपस्या): कहा जाता है कि माता पार्वती ने सावन के हर सोमवार व्रत रखकर भगवान शिव को प्रसन्न किया था। इसी कारण इस महीने को शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक माना जाता है।

चंद्रदेव की कथा: एक मान्यता के अनुसार चंद्रमा ने शिवजी का अपमान किया, जिससे उनका तेज कम हो गया। बाद में उन्होंने सावन के सोमवार को शिव की पूजा की और अपना तेज वापस पाया। इसलिए यह व्रत मानसिक शांति के लिए भी किया जाता है।

शिवाभिषेक और पूजा: भक्त सुबह स्नान करके शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद, चीनी (पंचामृत) और गंगाजल चढ़ाकर पूजा करते हैं।

प्रिय सामग्री और भोग: भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, मौली और इत्र बहुत प्रिय माने जाते हैं, इसलिए इन्हें अर्पित किया जाता है।

व्रत के नियम: इस दिन लोग निर्जल या फलाहार व्रत रखते हैं, जिसमें फल, साबूदाना और सेंधा नमक का सेवन किया जाता है। साथ ही सात्विक भोजन करने का नियम होता है।

क्या न करें: सावन में पत्तेदार सब्जियां, बैंगन, प्याज-लहसुन जैसे तामसिक भोजन और मांसाहार से परहेज किया जाता है।

मंत्र जाप: पूजा के समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

सावन सोमवार कैसे मनाया जाता है?

इस दिन की शुरुआत भगवान शिव का नाम लेकर करें। फिर स्नान करके सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद पूजा स्थान या मंदिर को साफ करके गंगाजल से पवित्र करें।

भगवान शिव का अभिषेक करें और घी का दीपक जलाकर पूजा करें। उन्हें चंदन, फूल, धूप, बेलपत्र और अक्षत अर्पित करें। व्रत कथा पढ़ें और शिव मंत्रों व शिव चालीसा का पाठ करें। अंत में फल और मिठाई का भोग लगाएं।

ध्यान रखने वाली बातें

  • सावन में तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांसाहार) से बचें।
  • काले रंग के कपड़े पहनने से परहेज करें।
  • किसी से झगड़ा या विवाद न करें।
  • किसी के बारे में बुरा न सोचें।
  • घर और आसपास की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

सावन सोमवार में किए जाने वाले पवित्र कार्य

शिवलिंग का अभिषेक: मंदिर या घर पर शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चा दूध, दही, घी, शहद और गन्ने के रस से अभिषेक करें।

प्रिय चीजें चढ़ाएं: भगवान शिव को बिना टूटे बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल, सफेद चंदन और अक्षत (चावल) अर्पित करें।

मंत्र और पाठ: “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके साथ शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र या रुद्राष्टक का पाठ भी करें।

व्रत और उपवास: सावन सोमवार का व्रत रखें और दिनभर फल, दूध या साबूदाना जैसे फलाहार लें। शाम की आरती के बाद व्रत खोलें।

विशेष उपाय: शादी में रुकावट हो तो शिव-पार्वती को गुलाब चढ़ाएं, धन-समृद्धि के लिए 108 बेलपत्र अर्पित करें और मन की शांति के लिए चंदन लगाएं।

जरूरी नियम: इस दिन प्याज-लहसुन जैसे तामसिक भोजन से दूर रहें, किसी का अपमान न करें और पूरे दिन मन में भगवान शिव का ध्यान बनाए रखें।

सावन सोमवार का ज्योतिषीय महत्व

चंद्रमा का लाभ: सावन में भगवान शिव की पूजा करने से कुंडली में कमजोर चंद्रमा मजबूत होता है। इससे मानसिक तनाव कम होता है और सोचने-समझने की क्षमता बेहतर होती है।

कर्ज और परेशानियों से राहत: सावन सोमवार को खास उपाय, जैसे दूध और जल से अभिषेक करने पर आर्थिक दिक्कतें, कर्ज और वैवाहिक समस्याएं कम होती हैं।

इच्छाओं की पूर्ति: इस समय व्रत और पूजा करने से जीवन में स्थिरता, धन, सुख और अच्छा स्वास्थ्य मिलने की मान्यता है।

शिवामूठ उपाय: सावन के चार सोमवारों में क्रम से चावल, सफेद तिल, मूंग और जौ चढ़ाने से घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है।

विवाह से जुड़ी मान्यता: अविवाहित लड़कियां अच्छे जीवनसाथी की कामना से और विवाहित महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं।

हिंदू धर्म में सावन सोमवार का महत्व

शिव-पार्वती की कृपा: सावन सोमवार के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की साथ में पूजा करने से वैवाहिक जीवन सुखी रहता है और अच्छा जीवनसाथी मिलने की मान्यता है।

इच्छा पूर्ति: लोग अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए सावन के सोमवार को सोलह सोमवार का व्रत भी रखते हैं।

कर्ज से राहत और समृद्धि: इस दिन विशेष पूजा करने से कर्ज और आर्थिक परेशानियां कम होने की मान्यता है और जीवन में खुशहाली आती है।

आध्यात्मिक महत्व: सावन का महीना आत्मसंयम, पवित्रता और मन की शुद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

पौराणिक मान्यता: कहा जाता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सावन के सोमवार से ही कठोर तपस्या की थी।

सावन सोमवार का आध्यात्मिक महत्व

आत्मिक शुद्धि और शांति: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दौरान सोमवार का व्रत और पूजा करने से मन शांत होता है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं।

समुद्र मंथन से जुड़ी मान्यता: कहा जाता है कि सावन में ही भगवान शिव ने हलाहल विष पिया था। इसलिए इस महीने शिवजी को जल चढ़ाकर उनका आभार जताया जाता है।

भक्ति और समर्पण का समय: यह महीना भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा, ध्यान और साधना के लिए खास माना जाता है। इससे व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक बदलाव मिलते हैं।

वैवाहिक सुख और इच्छा पूर्ति: मान्यता है कि माता पार्वती ने सावन में व्रत रखकर शिवजी को पति के रूप में पाया था। इसी वजह से अविवाहित लड़कियां अच्छे वर के लिए और विवाहित महिलाएं सुखी दांपत्य जीवन के लिए व्रत रखती हैं।

मन को नियंत्रित करना: सोमवार का संबंध चंद्रमा से माना जाता है, जो मन का प्रतीक है। भगवान शिव को चंद्रशेखर कहा जाता है, इसलिए सावन सोमवार का व्रत मन को शांत और संतुलित रखने में मदद करता है।

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Published by Sri Mandir·May 28, 2026

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