
क्या आप जानना चाहते हैं कि रामकृष्ण जयंती 2026 कब है और इस दिन का आध्यात्मिक महत्व क्या है? इस लेख में जानिए जयंती की सही तिथि, पूजा-विधि, स्वामी रामकृष्ण परमहंस के जीवन संदेश और उनसे जुड़ी प्रमुख बातें एक ही जगह।
भारत का इतिहास सदियों से संतों और महापुरुषों की शिक्षाओं से समृद्ध रहा है। ऐसे ही दिव्य संतों में श्री रामकृष्ण परमहंस का नाम अत्यंत श्रद्धा के साथ लिया जाता है। उनका जीवन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं था, बल्कि वे मानव सेवा और सभी धर्मों के प्रति सम्मान रखने में भी विश्वास रखते थे। रामकृष्ण जयंती उनके जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। इस दिन भक्त उनके जीवन, शिक्षाओं और आदर्शों को याद कर अपने जीवन में सादगी, प्रेम और सेवा का भाव अपनाने का संकल्प लेते हैं।
वर्ष 2026 में रामकृष्ण जयंती 17 फरवरी, मंगलवार को मनाई जाएगी। यह तिथि हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास में पड़ती है और इसी दिन श्री रामकृष्ण परमहंस का जन्मोत्सव मनाया जाता है। चूंकि यह पर्व चंद्र कैलेंडर पर आधारित है, इसलिए हर वर्ष इसकी तिथि में बदलाव हो सकता है।
इस दिन प्रातःकाल से ही रामकृष्ण मिशन और विभिन्न आश्रमों में विशेष पूजा, ध्यान, भजन-कीर्तन और प्रवचन का आयोजन शुरू हो जाता है। कई जगहों पर सामूहिक प्रार्थना और सेवा कार्य भी किए जाते हैं। भक्त इस दिन उपवास रखते हैं, सत्संग में भाग लेते हैं और आध्यात्मिक शांति प्राप्त करने के उपाय करते हैं। कुल मिलाकर, यह दिन श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पावन और प्रेरणादायक माना जाता है।
रामकृष्ण जयंती प्रतिवर्ष फाल्गुन मास (फरवरी–मार्च) के दौरान मनाई जाती है। इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और घर या मंदिर में श्री रामकृष्ण की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप प्रज्वलित कर पूजा करते हैं, साथ ही भजन, मंत्र जाप और धार्मिक ग्रंथों का पाठ किया जाता है। रामकृष्ण मिशन में विशेष रूप से सत्संग, आध्यात्मिक चर्चा और उनके जीवन पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
इसके साथ ही, इस दिन सेवा कार्यों को विशेष महत्व दिया जाता है। गरीबों को भोजन कराना, जरूरतमंदों को वस्त्र देना और दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है।
रामकृष्ण जयंती का महत्व धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत गहरा माना जाता है। श्री रामकृष्ण परमहंस ने सिखाया था कि ईश्वर को पाने के लिए बाहरी दिखावे की आवश्यकता नहीं, बल्कि सच्चे मन और पवित्र भाव की जरूरत होती है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि सभी धर्म सत्य की ओर ले जाते हैं। उन्होंने स्वयं विभिन्न धर्मों का पालन कर यह अनुभव किया कि ईश्वर हर रूप में मौजूद है। आज के समय में जब समाज धर्म और जाति के नाम पर बंट जाता है, तब उनकी शिक्षाएं हमें एकता और भाईचारे की राह दिखाती हैं।
इसके अलावा, रामकृष्ण जयंती सेवा और करुणा का भी पर्व है। उनके विचारों से प्रेरित होकर रामकृष्ण मिशन शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के अनेक कार्य करता है। श्री रामकृष्ण जी के अनुयायी मानते हैं कि भूखे को भोजन देना, दुखी को सांत्वना देना और जरूरतमंद की मदद करना ही सच्ची पूजा है।
ये थी ‘रामकृष्ण जयंती’ से जुड़ी विशेष जानकारी’। श्री रामकृष्ण परमहंस का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा धर्म इंसानियत में बसता है और ईश्वर हर हृदय में निवास करता है। यदि हम उनके बताए मार्ग पर चलें और दूसरों के जीवन में खुशी लाने का प्रयास करें, तो यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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