
क्या आप जानना चाहते हैं कि महतारा जयंती 2026 में कब मनाई जाएगी और इसका महत्व क्या है? इस लेख में जानिए महतारा जयंती की सही तिथि, इसके धार्मिक महत्व और इस दिन से जुड़ी परंपराओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी।
चैत्र नवरात्रि के समय महातारा जयंती मनाई जाती है। इस खास दिन सिद्धि देने वाली मां तारा की पूजा और साधना की जाती है। तंत्र साधना करने वाले लोग इस दिन विशेष रूप से मां तारा की गहरी भक्ति करते हैं। माना जाता है कि सच्ची और कठिन साधना से प्रसन्न होकर मां तारा अपने भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी करती हैं।
तारा जयन्ती बृहस्पतिवार, मार्च 26, 2026 को है।
हिंदू धर्म में मां तारा को आदि शक्ति का एक अत्यंत शक्तिशाली रूप माना जाता है। वे संरक्षण, सही मार्ग दिखाने और गहरी ज्ञान की प्रतीक हैं। धार्मिक ग्रंथों में उनका स्वरूप उग्र होते हुए भी दयालु बताया गया है। वे अपने भक्तों को हर संकट से बचाती हैं, जैसे एक मां अपने बच्चे की रक्षा करती है।
मान्यता के अनुसार, स्वातंत्र तंत्र में बताया गया है कि मां तारा का प्रकट होना मेरु पर्वत के पश्चिमी भाग में स्थित चोलना नदी (जिसे चोलता सरोवर भी कहा जाता है) के किनारे हुआ था। उन्हें भगवान शिव के तारकेश्वर रुद्रावतार की शक्ति माना जाता है। ऋषि वशिष्ठ ने सबसे पहले तारा महाविद्या की साधना की थी, इसलिए उन्हें वशिष्ठाराधिता भी कहा जाता है।
मान्यता के अनुसार, जब सृष्टि की शुरुआत भी नहीं हुई थी और चारों ओर केवल गहरा अंधकार फैला हुआ था, तब उस अंधकार का स्वरूप मां काली मानी जाती थीं। उसी घने अंधकार के बीच एक दिव्य प्रकाश प्रकट हुआ, जिसे मां तारा के रूप में जाना गया।
मां तारा को उस पहली रोशनी का प्रतीक माना जाता है, जिसने अंधकार को दूर करने का कार्य किया। इसलिए उन्हें ज्ञान, मार्गदर्शन और उजाले की देवी भी कहा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां तारा को अक्षोभ्य नाम के ऋषि की शक्ति माना जाता है। ब्रह्मांड में मौजूद सभी लोक और पिंडों पर उनका अधिकार माना जाता है, इसलिए उन्हें अत्यंत शक्तिशाली देवी के रूप में पूजा जाता है।
कहा जाता है कि मां तारा का प्रकट होना सृष्टि के आरंभ के समय ही हुआ था। इसी वजह से उन्हें “महातारा” कहा जाता है, जो उनके महान और व्यापक स्वरूप को दर्शाता है।
मां तारा को सुंदरता और वैभव की देवी भी माना जाता है। साथ ही, वे भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति में सहायता करती हैं और उन्हें सही मार्ग दिखाती हैं।
महातारा जयंती को मां तारा की विशेष कृपा पाने का शुभ अवसर माना जाता है। इस दिन की गई पूजा और साधना से आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है और सिद्धियों की प्राप्ति का मार्ग खुलता है।
मां तारा को रक्षक देवी माना जाता है। उनकी भक्ति करने से डर, दुख और जीवन की परेशानियां कम होती हैं और मन में सुरक्षा का भाव आता है।
देवी तारा बुद्धि और मार्गदर्शन देने वाली मानी जाती हैं। इस दिन उनकी आराधना करने से व्यक्ति को सही निर्णय लेने की समझ मिलती है और जीवन में स्पष्टता आती है।
यह दिन तंत्र साधना के लिए खास माना जाता है। साधक इस दिन विशेष साधना करते हैं, जिससे उन्हें जल्दी फल और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होते हैं।
मां तारा की पूजा से मोक्ष प्राप्ति का मार्ग आसान होता है। उनकी कृपा से व्यक्ति जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ता है।
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