कूर्म जयंती कब है 2026?
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कूर्म जयंती कब है 2026?

क्या आप जानना चाहते हैं कि 2026 में कूर्म जयंती कब मनाई जाएगी और इसका क्या महत्व है? इस लेख में जानिए कूर्म जयंती की तिथि, भगवान विष्णु के कूर्म अवतार का धार्मिक महत्व, पूजा विधि, परंपराएँ और इस दिन किए जाने वाले विशेष उपायों की पूरी जानकारी।

कूर्म जयंती के बारे में

सनातन धर्म में कूर्म जयंती का खास महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने अपना दूसरा अवतार कूर्म यानी कछुए के रूप में धारण किया था। कहा जाता है कि इस रूप की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन तीर्थ स्नान करना और दान-पुण्य करना भी बहुत शुभ माना जाता है।

कूर्म जयंती कब है?

कूर्म जयंती शुक्रवार, 1 मई 2026 को मनाई जाएगी।

  • इस दिन पूजा का शुभ समय शाम 4:25 बजे से 6:59 बजे तक रहेगा, जिसकी कुल अवधि 2 घंटे 34 मिनट है।
  • पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल 2026 को रात 9:12 बजे से शुरू होगी और 1 मई 2026 को रात 10:52 बजे समाप्त होगी।

कूर्म जयंती क्या है?

कूर्म जयंती एक पवित्र हिंदू पर्व है, जो भगवान विष्णु के कूर्म (कछुआ) अवतार को समर्पित है। मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के समय भगवान विष्णु ने कछुए का रूप धारण किया था और मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर टिकाकर देवताओं और असुरों की मदद की थी।

इस दिन भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और उनसे सुख, शांति व समृद्ध जीवन की प्रार्थना करते हैं। साथ ही, इस अवसर पर स्नान, दान और अन्य धार्मिक कार्य करना भी शुभ माना जाता है।

कूर्म जयंती का महत्व

कूर्म जयंती भगवान विष्णु के कूर्म (कछुए) अवतार से जुड़ा एक खास और पवित्र पर्व है। इस दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से बहुत महत्व माना जाता है। आइए इसे सरल बिंदुओं में समझते हैं:

1. कूर्म अवतार की याद: इस दिन भगवान विष्णु के कछुआ रूप को याद किया जाता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय उन्होंने मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर संभालकर पूरी प्रक्रिया को सफल बनाया। यह उनके अद्भुत रूप और शक्ति का प्रतीक है।

2. धैर्य और स्थिरता की सीख: कूर्म अवतार हमें सिखाता है कि जीवन में किसी भी परिस्थिति में घबराना नहीं चाहिए। जैसे कछुआ शांत और स्थिर रहता है, वैसे ही हमें भी संयम और धैर्य के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

3. सुख-समृद्धि का आशीर्वाद: कूर्म जयंती के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से घर में खुशहाली, शांति और समृद्धि आने की मान्यता है। भक्त इस दिन व्रत और पूजा करके उनकी कृपा पाने की कोशिश करते हैं।

4. पापों से छुटकारा और पुण्य लाभ: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए अच्छे कर्म, जैसे पूजा, दान और स्नान से व्यक्ति को अपने पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

5. स्नान और दान का विशेष महत्व: इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना और जरूरतमंदों को दान देना बहुत शुभ माना जाता है। इससे मन की शुद्धि होती है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

कूर्म जयंती का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

कूर्म जयंती एक पवित्र दिन है, जो भगवान विष्णु के कूर्म (कछुए) अवतार को समर्पित है। इस दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से विशेष महत्व माना जाता है।

धार्मिक महत्व: धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने कूर्म रूप लेकर समुद्र मंथन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और दान करते हैं। ऐसा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आने की मान्यता है।

आध्यात्मिक महत्व: कूर्म अवतार हमें धैर्य और संतुलन बनाए रखने की सीख देता है। जैसे कछुआ हर स्थिति में शांत और स्थिर रहता है, वैसे ही हमें भी जीवन की कठिनाइयों में संयम रखना चाहिए। यह दिन मन को शांत करने, भक्ति बढ़ाने और अपने भीतर सकारात्मक सोच विकसित करने का अवसर देता है।

कूर्म जयंती से जुड़ी परंपराएं और जागरूकता

व्रत और उपवास: इस दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और पूरे दिन व्रत रखते हैं। व्रत के दौरान अनाज नहीं खाया जाता।

विशेष पूजा: भगवान विष्णु के कूर्म रूप की पूजा तुलसी, चंदन, फूल और मिठाई के भोग के साथ की जाती है।

जागरण: कई लोग रात में जागकर भगवान विष्णु का स्मरण करते हैं और ‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करते हैं।

दान-पुण्य: इस दिन गरीबों या ब्राह्मणों को भोजन, कपड़े या धन देना बहुत शुभ और पुण्यदायक माना जाता है।

नया काम शुरू करना: कूर्म अवतार स्थिरता का प्रतीक है, इसलिए इस दिन घर बनवाना, नींव रखना या कोई नया कार्य शुरू करना अच्छा माना जाता है।

कछुए की स्थापना: समृद्धि के लिए लोग इस दिन चांदी या धातु का कछुआ घर में लाकर उत्तर दिशा में रखते हैं।

जागरूकता और महत्व

धैर्य और स्थिरता की सीख: कूर्म अवतार हमें सिखाता है कि कठिन समय में भी शांत और मजबूत बने रहना चाहिए।

वास्तु लाभ: घर में कछुए की मूर्ति रखने से नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।

आध्यात्मिक लाभ: यह दिन लोगों को अहंकार छोड़कर भगवान विष्णु की भक्ति करने के लिए प्रेरित करता है।

बाधाओं से मुक्ति: मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और रास्ते आसान बनते हैं।

कूर्म जयंती की तैयारी कैसे की जाती है?

सुबह की शुरुआत: सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल या फलाहार व्रत रखने का संकल्प लें।

पूजा स्थान की तैयारी: पूजा करने की जगह को अच्छी तरह साफ करें और गंगाजल या गौमूत्र से शुद्ध करें। फिर एक चौकी पर तांबे का कलश रखें, जिसमें पानी, दूध, गुड़, तिल और चावल डालें।

मूर्ति की स्थापना: भगवान विष्णु या कछुए की मूर्ति स्थापित करें। चांदी का कछुआ रखना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। मूर्ति पर कुमकुम का तिलक लगाएं।

मंत्र और पाठ: पूजा के समय ‘ॐ आं ह्रीं क्रों कूर्मासनाय नम:’ मंत्र का जाप करें। साथ ही विष्णु सहस्रनाम या कूर्म स्तोत्र का पाठ भी करें।

भोग और आरती: भगवान को रेवड़ी का भोग लगाएं और फिर श्रद्धा से आरती करें।

दान और आचरण: इस दिन जरूरतमंद लोगों को भोजन या दान देना बहुत पुण्यदायक माना जाता है। पूरे दिन सात्विक भोजन करें और शांत व संयमित रहें।

कूर्म जयंती के दिन किए जाने वाले कार्य

विशेष पूजा: भगवान विष्णु के कूर्म (कछुए) रूप की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। उसे पीले फूल और वस्त्र से सजाएं और केसर का तिलक लगाएं।

अभिषेक: मूर्ति को दूध, गंगाजल और शहद से स्नान कराएं, जिसे अभिषेक कहा जाता है।

मंत्र और पाठ: पूजा के दौरान विष्णु सहस्रनाम, कूर्म स्तोत्र और ‘ॐ आं ह्रीं क्रों कूर्मासनाय नम:’ मंत्र का जाप करें।

कथा सुनना या पढ़ना: इस दिन समुद्र मंथन और कूर्म अवतार से जुड़ी कथा सुनना या पढ़ना शुभ माना जाता है।

व्रत और उपवास: भक्त इस दिन निर्जल या फलाहार व्रत रखते हैं और शाम को आरती के बाद व्रत खोलते हैं।

दान-पुण्य: जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े या धन देना इस दिन बहुत पुण्यदायक माना जाता है।

सात्विक भोजन: व्रत खत्म करने के बाद सादा और सात्विक भोजन करें, जिसमें प्याज-लहसुन न हो।

कूर्म यंत्र की स्थापना: घर या काम की जगह पर कूर्म यंत्र स्थापित करना शुभ माना जाता है, इससे सुख और समृद्धि बढ़ती है।

कूर्म जयंती का संदेश

धैर्य और स्थिरता का संदेश: जैसे भगवान विष्णु ने कछुए का रूप लेकर समुद्र मंथन में सहारा दिया, वैसे ही आप भी अपने जीवन की हर मुश्किल को धैर्य और मजबूत इरादे से पार करें। कूर्म जयंती की शुभकामनाएं!

सकारात्मकता का संदेश: भगवान कूर्म की कृपा से आपके जीवन में खुशियां, शांति और तरक्की बनी रहे। आपको कूर्म जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं!

सबके लिए शुभकामनाएं: भगवान विष्णु के इस पावन अवतार दिवस पर आपको और आपके परिवार को ढेरों शुभकामनाएं। ईश्वर आपको शक्ति और सही मार्ग दिखाएं।

आध्यात्मिक संदेश: इस शुभ दिन पर भगवान विष्णु की कृपा आप पर बनी रहे, आपके कष्ट दूर हों और जीवन में आध्यात्मिक उन्नति मिले। कूर्म जयंती की शुभकामनाएं!

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Published by Sri Mandir·April 16, 2026

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