हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी कब है?
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हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी कब है?

क्या आप जानना चाहते हैं कि हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी कब मनाई जाती है और इसका क्या महत्व है? इस लेख में जानिए भगवान गणेश के हेरम्ब स्वरूप की संकष्टी चतुर्थी की तिथि, पूजा विधि, व्रत कथा और इस दिन किए जाने वाले विशेष उपायों की पूरी जानकारी।

हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी के बारे में

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दोनों में आने वाली चतुर्थी तिथि भगवान गणेश जी की पूजा के लिए बहुत शुभ मानी जाती है। लेकिन जब यह चतुर्थी भाद्रपद महीने में आती है, तो इसे खास रूप से हेरंब संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। यह दिन भगवान गणेश जी, जो रिद्धि-सिद्धि के देने वाले हैं, उनकी पूजा और व्रत के लिए बहुत फलदायक माना जाता है। अगर यह चतुर्थी मंगलवार को पड़ती है, तो इसे अंगारकी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है।

हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी कब है?

31 अगस्त 2026, सोमवार को बहुला चतुर्थी और हेरंब संकष्टी का व्रत रखा जाएगा।

यह तिथि भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी है। चतुर्थी तिथि की शुरुआत 31 अगस्त सुबह 8:50 बजे से होगी और इसका समापन 1 सितंबर सुबह 7:41 बजे पर होगा।

हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी क्या है?

हेरंब संकष्टी चतुर्थी भाद्रपद महीने में मनाई जाती है। इस साल यह व्रत 31 अगस्त को पड़ रहा है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है और उनके लिए व्रत रखा जाता है।

मान्यता है कि भगवान गणेश की सच्चे मन से पूजा करने से पैसों की परेशानी और जीवन के कई दुख दूर हो जाते हैं। इससे जीवन में शुभता और खुशहाली आती है। लोग अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए इस दिन गणेश जी की पूजा करते हैं। साथ ही इस पवित्र दिन दान-पुण्य करना भी शुभ माना जाता है।

हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

हेरंब रूप की पूजा: ‘हेरंब’ का मतलब होता है कमजोरों की रक्षा करने वाला। हेरंब गणपति के पांच मुख और दस हाथ बताए जाते हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि वे हर दिशा से अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।

संकट दूर करने वाला व्रत: यह व्रत जीवन की परेशानियों और रुकावटों को कम करने और खुशहाली लाने के लिए रखा जाता है।

तांत्रिक महत्व: तंत्र शास्त्र में हेरंब रूप को बहुत शक्तिशाली माना गया है, इसलिए इस दिन विशेष पूजा की जाती है।

पूजा की परंपरा: इस दिन सुबह जल्दी उठकर घर और पूजास्थल को साफ किया जाता है। फिर गणेश जी को दूर्वा और फूल चढ़ाकर पूजा की जाती है। ‘गणेश अथर्वशीर्ष’ का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।

उपवास और चंद्र दर्शन: भक्त पूरे दिन व्रत रखते हैं और शाम को चंद्रमा के दर्शन करके पूजा के बाद व्रत खोलते हैं। यह मन को शांति देने वाला माना जाता है।

परिवार की खुशहाली: इस दिन की पूजा से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और परिवार में प्रेम बढ़ता है।

हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी से जुड़ी परंपराएं और मान्यताएं

1. धार्मिक महत्व और मान्यताएं

संकट दूर करने वाला व्रत: मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर हेरंब रूप में गणेश जी की पूजा करने से जीवन की परेशानियां, रुकावटें और दुख दूर हो जाते हैं।

शक्ति और निडरता: हेरंब गणपति को साहस देने वाला माना जाता है। कहा जाता है कि यह व्रत आत्मविश्वास बढ़ाता है और विरोधियों पर जीत दिलाने में मदद करता है।

मनोकामना पूर्ति: इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर भक्तों को सुख, समृद्धि और काम में सफलता का आशीर्वाद मिलता है।

बुध ग्रह की शांति: ऐसी मान्यता है कि इस चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है।

2. व्रत और पूजा की परंपराएं

उपवास का नियम: भक्त सूर्योदय से चंद्रमा निकलने तक निर्जल या फलाहार व्रत रखते हैं।

हेरंब रूप की पूजा: इस दिन खास तौर पर पंचमुखी हेरंब गणेश की पूजा की जाती है।

दूर्वा और मोदक का भोग: गणेश जी को दूर्वा, लाल फूल और मोदक चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है।

स्तोत्र पाठ: भक्त ‘संकटनाशन गणेश स्तोत्र’ या ‘गणेश अथर्वशीर्ष’ का पाठ करते हैं।

चंद्र दर्शन: शाम को चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने और गणेश जी की आरती के बाद व्रत पूरा किया जाता है।

हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी कैसे मनाई जाती है?

संकल्प: सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और हाथ में जल व फूल लेकर व्रत रखने का संकल्प लें।

पूजा स्थापना: घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर रखें। हेरंब रूप में गणेश जी के पांच मुख माने जाते हैं।

पूजा सामग्री: गणेश जी को हल्दी-कुमकुम का तिलक लगाएं। उन्हें पीले वस्त्र, दूर्वा घास, लाल फूल, चंदन, मोदक, नारियल, गन्ना और मोतीचूर के लड्डू अर्पित करें।

मंत्र और कथा: “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें। साथ ही गणेश चालीसा, गणेश अष्टक या हेरंब गणपति स्तोत्र का पाठ करें और व्रत कथा सुनें या पढ़ें।

चंद्र दर्शन: शाम को चंद्रमा के दर्शन करें, उन्हें जल, चंदन, चावल और फूल से अर्घ्य दें। इसके बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत पूरा करें।

महत्व: यह व्रत दुखों और परेशानियों को दूर करने, सुख-समृद्धि पाने और शत्रुओं पर विजय के लिए किया जाता है।

हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी की तैयारी कैसे की जाती है?

सुबह की शुरुआत: सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। लाल रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।

पूजा की तैयारी: घर के मंदिर में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश के हेरंब (पंचमुखी) रूप की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

गणेश जी को अर्पण: गणेश जी को हल्दी-कुमकुम का तिलक लगाएं और दूर्वा, मोदक, मोतीचूर के लड्डू, केला व नारियल चढ़ाएं।

पूजा विधि: धूप, अगरबत्ती और घी का दीपक जलाकर पूजा करें। इस दौरान गणेश चालीसा, गणेश अष्टक या हेरंब चतुर्थी की कथा का पाठ करें।

व्रत और उपवास: व्रत रखने वाले लोग दिन भर उपवास करते हैं और शाम की पूजा के बाद ही भोजन करते हैं।

शाम की पूजा और चंद्र दर्शन: शाम को चंद्रमा के दर्शन करके उन्हें अर्घ्य दें। इसके बाद प्रसाद लेकर व्रत पूरा करें।

हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी में किए जाने वाले पवित्र कार्य

व्रत और संकल्प: सूर्योदय से लेकर चंद्रमा निकलने तक व्रत रखें और सुबह पूजा का संकल्प लें।

गणेश पूजा: गणेश जी की मूर्ति को लाल या पीले कपड़े पर रखकर धूप, दीप, चंदन और रोली से पूजा करें।

विशेष अर्पण: गणेश जी को 21 दूर्वा, शमी के पत्ते, गुड़, तिल के लड्डू, मोदक और लाल फूल चढ़ाएं।

मंत्र जाप: “ॐ गं गणपतये नमः” जैसे गणेश मंत्रों का जाप करें।

चंद्र दर्शन और अर्घ्य: रात में चंद्रमा को जल या दूध से अर्घ्य दें और फिर गणेश जी की आरती करें।

दान: इस दिन तिल, गुड़ और कपड़ों का दान करना बहुत शुभ और फलदायक माना जाता है।

हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी का ज्योतिषीय महत्व

भय और शत्रुओं पर जीत: हेरंब रूप में गणेश जी को साहस का प्रतीक माना जाता है। उनकी पूजा से डर और नकारात्मकता दूर होती है।

चंद्र दोष से राहत: इस दिन चंद्रमा की पूजा करने से मानसिक तनाव कम होता है और घर में शांति बनी रहती है।

बुध ग्रह मजबूत होता है: मान्यता है कि इस दिन गणेश जी की पूजा करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है, जिससे बुद्धि तेज होती है और व्यापार में लाभ मिलता है।

संकट दूर करने वाला व्रत: यह व्रत जीवन की परेशानियों को कम करता है और सुख-समृद्धि लाता है।

विशेष उपाय: ज्योतिष के अनुसार इस दिन गणेश जी को दूर्वा, तिल के लड्डू, मोदक और गन्ना चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है।

हिंदू धर्म में हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी का महत्व

विघ्नहर्ता का विशेष रूप: हेरंब गणेश जी पांच मुख वाले रूप में माने जाते हैं, जो हर दिशा से रक्षा करते हैं और डर को दूर करते हैं।

संकट दूर करने वाला व्रत: यह व्रत खास तौर पर कठिन समय में मानसिक शक्ति बढ़ाने और बाधाओं से छुटकारा पाने के लिए रखा जाता है।

कैरियर और समृद्धि: मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से काम-धंधे में तरक्की होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

बुध ग्रह की मजबूती: ज्योतिष के अनुसार, इस व्रत से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है।

चंद्रोदय के बाद व्रत पूरा: यह व्रत सूर्योदय से शुरू होता है और शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद ही खोला जाता है।

हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी का आध्यात्मिक महत्व

मन और आत्मा की पवित्रता: इस दिन व्रत और पूजा करने से मन साफ होता है और आत्मा को शांति मिलती है।

साहस और आत्मविश्वास: हेरंब गणेश जी की आराधना से डर कम होता है और व्यक्ति के अंदर हिम्मत और भरोसा बढ़ता है।

परेशानियों से राहत: यह व्रत जीवन की मुश्किलों और रुकावटों को दूर करने में सहायक माना जाता है।

धैर्य और सकारात्मकता: यह दिन हमें शांत रहने और अच्छी सोच बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

भक्ति और आत्मचिंतन: इस पावन अवसर पर व्यक्ति भक्ति करता है और अपने जीवन के बारे में सोचकर सही रास्ते पर आगे बढ़ने की कोशिश करता है।

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Published by Sri Mandir·June 22, 2026

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