भालचंद्र संकष्टी कब है 2026
image
downloadDownload
shareShare
ShareWhatsApp

भालचंद्र संकष्टी कब है 2026

क्या आप जानना चाहते हैं कि भालचंद्र संकष्टी 2026 में कब है और इसका धार्मिक महत्व क्या है? इस लेख में जानिए सही तिथि, चंद्रोदय का समय, व्रत-विधि, पूजा नियम और भगवान Ganesha की आराधना से मिलने वाले विघ्नों से मुक्ति के शुभ फल – सब कुछ सरल और स्पष्ट भाषा में।

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के बारे में

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक पवित्र व्रत है। इस दिन भक्त उपवास रखकर विघ्नहर्ता श्री गणेश की पूजा करते हैं। “भालचंद्र” नाम का अर्थ है – जिनके मस्तक पर चंद्र विराजमान हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। रात्रि में चंद्र दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद व्रत पूर्ण किया जाता है।

आपके लिए चुनी गई पूजाएँ

अपने नाम और गोत्र से पूजा करवाएं और अपने परिवार के लिए ईश्वर का आशीर्वाद पाएं।

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कब है?

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है, लेकिन हर माह इसका नाम अलग होता है।

  • साल 2026 में यह व्रत 6 मार्च, शुक्रवार को रखा जाएगा। इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है और रात में चंद्रमा के दर्शन करने के बाद व्रत पूरा किया जाता है।

मुहूर्त: चतुर्थी तिथि 6 मार्च, शुक्रवार को 5:53 PM से शुरू होगी और 7 मार्च 2026 को 7:17 PM तक रहेगी। इसलिए व्रत और पूजा का मुख्य दिन 4 मार्च माना जाएगा।

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का महत्व

  • इस दिन भगवान गणेश के भालचंद्र रूप की पूजा की जाती है, जिससे जीवन की बाधाएं दूर होने की मान्यता है।
  • यह व्रत मन को शांत और संतुलित रखने में सहायक माना जाता है।
  • मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से व्रत रखने पर कष्ट कम होते हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
  • यह दिन बुद्धि और सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने के लिए भी खास माना जाता है।
  • रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलना मन की शुद्धता और संतुलन का प्रतीक होता है।

पूजन सामग्री और आराधना विधि

पूजन सामग्री

इस दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए निम्न चीजें रखें:

  • गणेश जी की मूर्ति या चित्र
  • लाल या पीला कपड़ा
  • रोली, कुमकुम और अक्षत (चावल)
  • दूर्वा घास
  • ताजे फूल और माला
  • धूप और दीपक
  • मोदक या लड्डू (भोग के लिए)
  • नारियल
  • फल और मिठाई
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
  • गंगाजल
  • पान और सुपारी

पूजा विधि

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी की पूजा इस तरह करें:

  • व्रत का संकल्प लें: सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर व्रत का संकल्प करें और दिन भर उपवास रखें।
  • पूजा की तैयारी करें: किसी साफ जगह पर कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें।
  • पूजा शुरू करें: गंगाजल छिड़ककर गणेश जी का ध्यान करें और पूजा आरंभ करें।
  • अर्पण करें: रोली, अक्षत, फूल और दूर्वा चढ़ाएं, धूप-दीप जलाएं और मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
  • मंत्र जप और कथा: “ॐ गण गणपतये नमः” मंत्र का जप करें और व्रत की कथा सुनें या पढ़ें।
  • चंद्र दर्शन करें: शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दें और उनके दर्शन करें।
  • व्रत समाप्त करें: अंत में गणेश जी की आरती करके व्रत पूरा करें।

निष्कर्ष: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत और पूजा सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मन और जीवन को संतुलित रखने का एक अच्छा तरीका भी है। इस दिन भगवान गणेश के भालचंद्र रूप की पूजा करने से नकारात्मक विचार कम होते हैं और सकारात्मक सोच बढ़ती है। यह व्रत हमें धैर्य, अनुशासन और आस्था का महत्व समझाता है। साथ ही, चंद्रमा के दर्शन की परंपरा मन की शुद्धता और भावनात्मक संतुलन से जुड़ी मानी जाती है।

divider
Published by Sri Mandir·March 3, 2026

Did you like this article?

आपके लिए लोकप्रिय लेख

और पढ़ेंright_arrow
srimandir-logo

श्री मंदिर ने श्रध्दालुओ, पंडितों, और मंदिरों को जोड़कर भारत में धार्मिक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया है। 100 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के साथ साझेदारी करके, हम विशेषज्ञ पंडितों द्वारा की गई विशेष पूजा और चढ़ावा सेवाएँ प्रदान करते हैं और पूर्ण की गई पूजा विधि का वीडियो शेयर करते हैं।

हमारा पता

फर्स्टप्रिंसिपल ऐप्सफॉरभारत प्रा. लि. 2nd फ्लोर, अर्बन वॉल्ट, नं. 29/1, 27वीं मेन रोड, सोमसुंदरपल्या, HSR पोस्ट, बैंगलोर, कर्नाटक - 560102
YoutubeInstagramLinkedinWhatsappTwitterFacebook