अधिक विनायक चतुर्थी 2026 कब है?
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अधिक विनायक चतुर्थी 2026 कब है? | Adhik Vinayak Chaturthi Kab Hai 2026

इस लेख में जानिए 2026 में अधिक विनायक चतुर्थी की तिथि, पूजा विधि, धार्मिक महत्व और इस दिन किए जाने वाले खास उपायों की पूरी जानकारी।

अधिक विनायक चतुर्थी के बारे में

अधिक विनायक चतुर्थी हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और फलदायी मानी जाती है। यह विशेष रूप से अधिक मास में आने वाली चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा, व्रत और विशेष अर्घ्य अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि अधिक विनायक चतुर्थी का व्रत करने से सभी विघ्न दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि तथा सफलता प्राप्त होती है।

अधिक विनायक चतुर्थी 2026 कब है?

हिंदू धर्म में भगवान गणेश की पूजा के लिए चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व होता है। हर महीने आने वाली चतुर्थी को अलग-अलग नामों से जाना जाता है, लेकिन जब अधिक मास (मलमास) में यह चतुर्थी आती है, तो उसे अधिक विनायक चतुर्थी कहा जाता है। यह दिन भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

अधिक विनायक चतुर्थी 2026 तिथि और समय

  • तिथि प्रारम्भ: 3 जून 2026, बुधवार – रात 9:21 बजे
  • तिथि समाप्त: 4 जून 2026, गुरुवार – रात 11:30 बजे संकष्टी चतुर्थी (विभुवन संकष्टी): 3 जून 2026, बुधवार चंद्रोदय (चंद्र दर्शन का समय)
  • 3 जून: रात 10:04 बजे
  • 4 जून: रात 10:43 बजे
  • अवधि: 24 घंटे 39 मिनट चतुर्थी का व्रत मुख्य रूप से 3 जून 2026 (बुधवार) को रखा जाएगा।

अधिक विनायक चतुर्थी क्या होती है?

अधिक विनायक चतुर्थी वह चतुर्थी होती है जो अधिक मास में आती है। अधिक मास को भगवान विष्णु का महीना माना जाता है, लेकिन इस दौरान भगवान गणेश की पूजा भी विशेष फल देती है। इस दिन भगवान गणेश को विघ्नहर्ता (सभी बाधाओं को दूर करने वाले) के रूप में पूजा जाता है। इसलिए यह व्रत जीवन की समस्याओं को दूर करने के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है।

संकष्टी चतुर्थी और अधिक चतुर्थी का संबंध

यह चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी के रूप में भी जानी जाती है, जिसका मतलब होता है “संकटों को दूर करने वाली चतुर्थी”। इस दिन व्रत रखने वाले लोग चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत खोलते हैं। इसे “विभुवन संकष्टी चतुर्थी” भी कहा गया है।जब यह संकष्टी चतुर्थी अधिक मास में आती है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

अधिक विनायक चतुर्थी का धार्मिक महत्व

1. विघ्नों का नाश

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है। इस दिन उनकी पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

2. कार्यों में सफलता

जो लोग किसी नए काम की शुरुआत करना चाहते हैं, उनके लिए यह दिन बहुत शुभ होता है।

3. धन और समृद्धि

इस दिन पूजा करने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

4. मानसिक शांति

व्रत और पूजा से मन शांत रहता है और तनाव कम होता है।

अधिक विनायक चतुर्थी व्रत की पूजा विधि

इस व्रत को करने की विधि बहुत सरल है। आप निम्नलिखित तरीके से पूजा कर सकते हैं:

1. सुबह स्नान करें

व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।

2. व्रत का संकल्प लें

भगवान गणेश के सामने व्रत रखने का संकल्प लें।

3. भगवान गणेश की पूजा करें

गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें उन्हें दूर्वा (घास), मोदक और लड्डू अर्पित करें धूप और दीप जलाएं

4. मंत्र जाप करें

“ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।

5. दिनभर व्रत रखें

पूरा दिन उपवास रखें। फलाहार कर सकते हैं।

6. चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलें

रात को चंद्रमा के दर्शन करें और उसके बाद व्रत खोलें।

चंद्र दर्शन का महत्व

संकष्टी चतुर्थी में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व होता है। इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत पूरा माना जाता है। 2026 में चंद्र दर्शन का समय:

  • 3 जून: 22:04 बजे
  • 4 जून: 22:43 बजे चंद्रमा को जल अर्पित करके ही भोजन करना चाहिए।

क्या करें और क्या न करें

क्या करें:

  • भगवान गणेश का ध्यान करें
  • व्रत पूरी श्रद्धा से रखें
  • गरीबों को दान करें
  • सकारात्मक सोच रखें क्या न करें:
  • झूठ और क्रोध से बचें
  • किसी का अपमान न करें
  • नकारात्मक बातें न करें

अधिक विनायक चतुर्थी के लाभ

इस व्रत को करने से कई लाभ प्राप्त होते हैं:

  • जीवन के संकट दूर होते हैं
  • कार्यों में सफलता मिलती है
  • घर में सुख-शांति आती है
  • धन की वृद्धि होती है
  • स्वास्थ्य अच्छा रहता है

कौन कर सकता है यह व्रत?

यह व्रत कोई भी कर सकता है:

  • पुरुष और महिलाएं
  • विद्यार्थी और नौकरीपेशा लोग
  • व्यवसायी
  • गृहस्थ यह व्रत सभी के लिए लाभकारी है।

विशेष सावधानियां

  • व्रत के नियमों का पालन करें
  • समय का ध्यान रखें
  • चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोलें
  • पूजा में शुद्धता बनाए रखें

निष्कर्ष

अधिक विनायक चतुर्थी एक अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण व्रत है, जो वर्ष 2026 में 3 जून (बुधवार) को पड़ रहा है। चतुर्थी तिथि की शुरुआत 3 जून रात 9:21 बजे से होगी और समाप्ति 4 जून रात 11:30 बजे तक रहेगी। इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। यदि आप इस व्रत को सच्चे मन से करते हैं, तो आपको निश्चित रूप से इसका शुभ फल मिलेगा।

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Published by Sri Mandir·April 23, 2026

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