अधिक कालाष्टमी 2026 कब है?
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अधिक कालाष्टमी 2026 कब है? | Adhik Kalashtami 2026 Kab Hai

इस लेख में जानिए 2026 में अधिक कालाष्टमी की तिथि, इसका धार्मिक महत्व, पूजा विधि और इस दिन किए जाने वाले खास उपायों की संपूर्ण जानकारी।

अधिक कालाष्टमी के बारे में

अधिक कालाष्टमी हिंदू धर्म में भगवान काल भैरव की पूजा से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र व्रत माना जाता है। यह विशेष रूप से अधिक मास में आने के कारण और भी अधिक फलदायी माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान काल भैरव की विधि-विधान से पूजा करते हैं और उनसे भय, संकट तथा नकारात्मक शक्तियों से रक्षा की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और व्यक्ति को साहस, सुरक्षा तथा सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

अधिक कालाष्टमी 2026 कब है?

हिंदू धर्म में कालाष्टमी का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि यह दिन भगवान काल भैरव को समर्पित होता है, जो भगवान शिव का उग्र और रक्षक रूप हैं। जब यह तिथि अधिक मास (मलमास) में आती है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है, जिसे अधिक कालाष्टमी कहा जाता है। साल 2026 में अधिक कालाष्टमी 8 जून, सोमवार को पड़ेगी। इस दिन भक्त व्रत रखकर खासतौर पर रात के समय भगवान काल भैरव की पूजा करते हैं और उनसे जीवन की बाधाएं दूर करने की प्रार्थना करते हैं।

अधिक कालाष्टमी 2026 कब है?

अधिक कालाष्टमी – 08 जून 2026, सोमवार यह तिथि कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है और विशेष रूप से रात के समय भगवान काल भैरव की पूजा की जाती है।

कालाष्टमी क्या होती है?

कालाष्टमी हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र स्वरूप काल भैरव की पूजा की जाती है। “काल” का अर्थ है समय “अष्टमी” का अर्थ है आठवीं तिथि मान्यता है कि इस दिन भगवान काल भैरव का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इसे अत्यंत शक्तिशाली और रहस्यमयी तिथि माना जाता है।

अधिक कालाष्टमी का विशेष महत्व

अधिक मास में आने वाली कालाष्टमी को बहुत ही पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन किए गए व्रत, जाप और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन का महत्व:

  • नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है
  • शत्रुओं का नाश होता है
  • भय और चिंता दूर होती है
  • जीवन में साहस और आत्मबल बढ़ता है
  • पापों का नाश होता है अधिक कालाष्टमी पर भगवान भैरव की पूजा करने से शनि और राहु के दोष भी शांत होते हैं

भगवान काल भैरव का महत्व

भगवान काल भैरव को समय का स्वामी और रक्षक देवता माना जाता है। वे काशी (वाराणसी) के कोतवाल भी कहे जाते हैं।

  • वे भक्तों की रक्षा करते हैं
  • दुष्ट शक्तियों का नाश करते हैं
  • जीवन में अनुशासन और नियंत्रण लाते हैं जो व्यक्ति सच्चे मन से काल भैरव की पूजा करता है, उसके जीवन से भय समाप्त हो जाता है।

अधिक कालाष्टमी व्रत की पूजा विधि

इस दिन व्रत और पूजा करने के लिए निम्नलिखित विधि अपनानी चाहिए: 1. सुबह स्नान और संकल्प

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
  • साफ कपड़े पहनें
  • व्रत का संकल्प लें 2. भगवान शिव और भैरव की पूजा
  • सबसे पहले भगवान शिव का जलाभिषेक करें
  • इसके बाद काल भैरव की पूजा करें 3. पूजा सामग्री सरसों का तेल काले तिल काले कपड़े फूल और धूप नारियल और मिठाई 4. दीपक जलाएं सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है 5. मंत्र जाप मंत्र: ॐ काल भैरवाय नमः इस मंत्र का 108 बार जाप करें 6. रात्रि पूजा
  • कालाष्टमी की पूजा विशेष रूप से रात में की जाती है
  • इस समय ध्यान और साधना करना अत्यंत फलदायी होता है

कुत्ते को भोजन कराना क्यों जरूरी है?

भगवान काल भैरव का वाहन कुत्ता माना जाता है। इसलिए इस दिन कुत्तों को भोजन कराना बहुत शुभ होता है। इससे:

  • भैरव देव प्रसन्न होते हैं
  • पापों का नाश होता है
  • जीवन की बाधाएं दूर होती हैं

अधिक कालाष्टमी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। तब भगवान शिव ने अपने क्रोध से काल भैरव को उत्पन्न किया। काल भैरव ने ब्रह्मा के अहंकार को समाप्त करने के लिए उनका एक सिर काट दिया। इस कारण उन्हें ब्रह्महत्या का दोष लगा। बाद में उन्होंने काशी में तपस्या की और वहां उन्हें इस दोष से मुक्ति मिली। तभी से काशी में काल भैरव को नगर रक्षक माना जाता है। इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि अहंकार का नाश अवश्य होता है और भगवान भैरव न्याय के देवता हैं।

क्या करें और क्या न करें

इस दिन क्या करें (Do’s)

  • भैरव बाबा की पूजा करें
  • कुत्तों को भोजन कराएं
  • गरीबों को दान दें
  • रात में जागरण और भजन करें
  • मंत्र जाप करें

इस दिन क्या न करें (Don’ts)

  • मांस और शराब का सेवन न करें
  • किसी का अपमान न करें
  • झूठ और छल से बचें
  • क्रोध न करें

अधिक कालाष्टमी के उपाय

1. शत्रु बाधा दूर करने के लिए भैरव मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं 2. भय दूर करने के लिए “ॐ काल भैरवाय नमः” मंत्र का रोज जाप करें 3. धन लाभ के लिए काले तिल और कंबल का दान करें

अधिक कालाष्टमी के लाभ

इस व्रत को करने से व्यक्ति को कई प्रकार के लाभ मिलते हैं:

  • जीवन से भय समाप्त होता है
  • नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
  • शत्रुओं से रक्षा होती है
  • मानसिक शांति मिलती है
  • आत्मविश्वास बढ़ता है

आध्यात्मिक महत्व

अधिक कालाष्टमी केवल व्रत और पूजा का दिन नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन और साधना का भी समय है। यह दिन हमें अपने अंदर के भय और कमजोरियों को दूर करने की प्रेरणा देता है

  • ध्यान और साधना से मन को शांति मिलती है
  • आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है

निष्कर्ष

अधिक कालाष्टमी 2026, 08 जून (सोमवार) को मनाई जाएगी। यह दिन भगवान काल भैरव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ है। इस दिन व्रत, पूजा, मंत्र जाप और दान करने से जीवन की समस्याएं दूर होती हैं और सुख-शांति प्राप्त होती है। विशेष रूप से अधिक मास में आने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। यदि आप जीवन में भय, बाधाओं या नकारात्मकता से परेशान हैं, तो अधिक कालाष्टमी का व्रत जरूर करें और भगवान काल भैरव की पूजा करें।

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Published by Sri Mandir·May 13, 2026

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