13 फरवरी 2026 को क्या है?
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13 फरवरी 2026 को क्या है? | 13 February 2026 Ko Kya Hai

जानिए इस दिन का पंचांग, व्रत-त्योहार, शुभ-अशुभ मुहूर्त, ग्रह-नक्षत्र और धार्मिक दृष्टि से इस तिथि का महत्व।

आज के दिन के बारे में

13 फरवरी 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस दिन फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है, जिससे फाल्गुन माह की शुरुआत होती है। यह तिथि नए संकल्प और आध्यात्मिक चिंतन के लिए शुभ मानी जाती है। इस लेख में जानिए 13 फरवरी 2026 को क्या है और इससे जुड़ी मुख्य जानकारियाँ।

13 फरवरी 2026 को क्या है?

क्या आप जानना चाहते हैं कि 13 फरवरी 2026 को कौन-कौन से व्रत और त्योहार हैं और यह दिन धार्मिक दृष्टि से क्यों विशेष माना जाता है? 13 फरवरी 2026, शुक्रवार को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। इस दिन विजया एकादशी का व्रत रखा जाता है, साथ ही कुंभ संक्रांति का पर्व भी मनाया जाता है। यह दिन व्रत, संयम, दान और भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

पंचांग विवरण

  • तिथि: कृष्ण पक्ष एकादशी – दोपहर 2:27 PM तक
  • वार: शुक्रवार
  • नक्षत्र: मूल – शाम 4:13 PM तक
  • योग: वज्र – रात 3:23 AM तक
  • करण: बालव – दोपहर 2:23 PM तक
  • मास (अमांत): माघ
  • मास (पूर्णिमांत): फाल्गुन
  • विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त)
  • शक संवत: 1947 (विश्ववासु)
  • सूर्य राशि: कुंभ
  • चंद्र राशि: धनु
  • ऋतु: शिशिर
  • अयन: उत्तरायण
  • दिशाशूल: पश्चिम
  • चंद्र निवास: पूर्व

त्योहार व पर्व

1. विजया एकादशी

विजया एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत पुण्यदायी व्रत है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से जीवन की बाधाओं पर विजय प्राप्त होती है और कार्यों में सफलता मिलती है। इस एकादशी का व्रत विशेष रूप से विजय, साहस और आत्मबल प्रदान करता है।

2. कुंभ संक्रांति

इस दिन सूर्य देव मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं। कुंभ संक्रांति पर दान-पुण्य, स्नान और सूर्य उपासना का विशेष महत्व होता है। यह दिन नए परिवर्तन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

शुभ-अशुभ समय

  • शुभ मुहूर्त: 11:51 AM से 12:35 PM
  • राहुकाल: 10:49 AM से 12:13 PM
  • गुलिक काल: 8:00 AM से 9:24 AM
  • यमघंट काल: 3:02 PM से 4:27 PM

सूर्य और चंद्र विवरण

  • सूर्योदय: 6:35 AM
  • सूर्यास्त: 5:51 PM
  • चंद्रोदय: 3:32 AM
  • चंद्रास्त: 1:56 PM

पूजा-व्रत विधि

  • प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  • भगवान विष्णु की पूजा कर विजया एकादशी व्रत का संकल्प लें।

  • विष्णु सहस्रनाम या एकादशी कथा का पाठ करें।

  • कुंभ संक्रांति पर सूर्य देव को जल अर्पित करें।

  • अन्न, वस्त्र या धन का दान करें और सात्त्विक आहार ग्रहण करें।

निष्कर्ष

13 फरवरी 2026 का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। विजया एकादशी और कुंभ संक्रांति का संयोग इस दिन को विशेष फलदायी बनाता है। श्रद्धा, व्रत और दान के साथ किया गया पूजन जीवन में सफलता, शांति और सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला माना जाता है।

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Published by Sri Mandir·February 13, 2026

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