12 सितंबर 2025 को क्या है?
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12 सितंबर 2025 को क्या है?

12 सितंबर 2025 को क्या है? जानिए इस दिन का पंचांग, आश्विन कृष्ण पंचमी, महाभारणी श्राद्ध और नाग पंचमी व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

आज के दिन के बारे में

12 सितंबर 2025 का दिन धार्मिक दृष्टि से खास महत्व रखता है। इस दिन कौन-कौन से व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे, इनके पीछे की पौराणिक मान्यताएं क्या हैं और कौन से शुभ मुहूर्त आपके कार्यों के लिए शुभ रहेंगे, यह जानना रोचक होगा। इस लेख में जानिए 12 सितंबर 2025 से जुड़ी पूरी और महत्वपूर्ण जानकारी, जो इस दिन को खास बनाती है।

12 सितंबर 2025 को क्या है?

क्या आप जानना चाहते हैं कि 12 सितंबर 2025 को कौन-सा व्रत और पर्व है तथा यह दिन धार्मिक दृष्टि से क्यों खास है?

12 सितंबर 2025 शुक्रवार का दिन है और यह भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि है। इस दिन षष्ठी श्राद्ध मनाया जाएगा। पितृ पक्ष में किए जाने वाले इस श्राद्ध का विशेष महत्व है क्योंकि यह उन पितरों की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है जिनकी मृत्यु षष्ठी तिथि को हुई हो। इसे छठ श्राद्ध भी कहा जाता है।

पंचांग विवरण

  • तिथि प्रारंभ: षष्ठी तिथि – 12 सितंबर, सुबह 9:58 बजे से

  • तिथि समाप्त: 13 सितंबर, सुबह 7:23 बजे तक

  • नक्षत्र: रेवती नक्षत्र – 11:28 AM तक, इसके बाद अश्विनी नक्षत्र

  • योग: शुभ योग – 12:49 PM तक, इसके बाद शुक्ल योग

  • करण: वणिज – 10:37 AM तक, इसके बाद विष्टि करण

  • वार: शुक्रवार (माता लक्ष्मी और देवताओं की कृपा का दिन)

शुभ-अशुभ समय

  • कुतुप मुहूर्त: 11:52 AM से 12:42 PM

  • रौहिण मुहूर्त: 12:42 PM से 1:32 PM

  • अपराह्न काल: 1:32 PM से 4:01 PM

  • अभिजीत मुहूर्त: आज उपलब्ध नहीं

  • राहुकाल: 10:44 AM से 12:18 PM

  • गुलिक काल: 7:10 AM से 8:44 AM

  • यमघंट काल: 3:26 PM से 5:00 PM

सूर्योदय और सूर्यास्त

  • सूर्योदय: 5:41 AM

  • सूर्यास्त: 6:07 PM

  • चंद्रोदय: 10:16 PM

  • चंद्रास्त: 11:20 AM (अगले दिन)

ग्रह और राशि

  • सूर्य राशि: सिंह

  • चंद्र राशि: मेष (दिन में)

  • दिशाशूल: पश्चिम दिशा

  • ऋतु: वर्षा

  • आयन: दक्षिणायन

षष्ठी श्राद्ध का महत्व

षष्ठी श्राद्ध पितृ पक्ष का एक प्रमुख दिन है। इस दिन परिवार के वे सदस्य जिनकी मृत्यु षष्ठी तिथि को हुई हो, उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है।

  • इसे छठ श्राद्ध भी कहा जाता है।

  • शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और परिवार को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

  • श्राद्ध के अंत में तर्पण और ब्राह्मण भोज करवाना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।

निष्कर्ष

12 सितंबर 2025 का दिन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन षष्ठी श्राद्ध मनाया जाएगा। पितृ पक्ष में किए जाने वाले श्राद्ध कर्म पितरों को संतुष्ट करने और उनके आशीर्वाद को प्राप्त करने का सर्वोत्तम अवसर होते हैं। इस दिन विधि-विधान से श्राद्ध करने से परिवार में सुख-समृद्धि, शांति और पितृ कृपा की प्राप्ति होती है।

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Published by Sri Mandir·September 11, 2025

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