
केदार गौरी व्रत 2025: कब है ये पावन व्रत? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस व्रत से मिलने वाले अद्भुत लाभ, जो दिलाएं शिव-गौरी की असीम कृपा।
केदार गौरी व्रत, जिसे 'केदारेश्वर व्रत' भी कहा जाता है, सनातन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र अनुष्ठानों में से एक है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है और दक्षिण भारत में विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। 21 दिनों तक चलने वाला यह व्रत कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी से शुरू होकर दिवाली के दिन अमावस्या को समाप्त होता है। तमिल कैलेंडर के अनुसार ये पर्व पुरत्तसी महीने में मनाया जाता है, जो कि तमिल हिंदू कैलेंडर का छठा महीना है।
मुहूर्त | समय |
ब्रह्म मुहूर्त | 04:23 ए एम से 05:14 ए एम |
प्रातः सन्ध्या | 04:48 ए एम से 06:04 ए एम |
अभिजित मुहूर्त | 11:23 ए एम से 12:08 पी एम |
विजय मुहूर्त | 01:39 पी एम से 02:25 पी एम |
गोधूलि मुहूर्त | 05:27 पी एम से 05:52 पी एम |
सायाह्न सन्ध्या | 05:27 पी एम से 06:43 पी एम |
अमृत काल | 03:51 पी एम से 05:38 पी एम |
निशिता मुहूर्त | 11:21 पी एम से 12:11 ए एम, अक्टूबर 22 |
केदार गौरी व्रत से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा है, जिसके अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव के शरीर का अंश बनने के लिए 21 दिनों तक कठोर तप किया था। कथा के अनुसार, माता पार्वती का एक भक्त था, जो कुछ समय बाद पार्वती जी की उपासना करना छोड़कर भगवान शिव की भक्ति करने लगा। इससे माता पार्वती नाराज हो गईं, और उन्होंने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए ऋषि गौतम की तपस्या की।
ऋषि गौतम ने उन्हें 21 दिन तक व्रत रखने का निर्देश दिया। 21 दिनों तक कठोर व्रत का पालन करने के बाद भगवान शिव ने प्रसन्न होकर अपने शरीर का बायां अंश माता पार्वती को समर्पित किया, जिससे उन्हें अर्धनारीश्वर के रूप में जाना गया। तभी से इस व्रत की महिमा प्रचलित हुई।
मान्यता है कि इस व्रत का पालन करने से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा होती है, और भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि व सौभाग्य का आगमन होता है।
केदार गौरी व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। इस व्रत को पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक करना चाहिए। व्रत का पालन कार्तिक शुक्ल अष्टमी से दीपावली के दिन अमावस्या तक 21 दिन तक किया जाता है।
व्रत के दौरान भक्त भगवान शिव और माता गौरी की आराधना करते हैं। पूजा विधि इस प्रकार है-
तो ये थी विशेष जानकारी ‘केदार गौरी व्रत’ के बारे में, जो भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने का एक पवित्र और प्रभावी अनुष्ठान है। ये व्रत करने से शिव पार्वती प्रसन्न होते हैं, और अपने भक्तों को सांसारिक सुख, धन-धान्य, स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। हमारी कामना है ये व्रत रखने वाले सभी भक्तों को जीवन में खुशहाली, सौभाग्य और शांति मिले। ऐसी ही धार्मिक जानकारियों के लिए जुड़े रहिए ‘श्री मंदिर’ पर।
मांसाहार और शराब – व्रत के दौरान मांस, मछली और मद्यपान से बचें। गंदगी और अपवित्रता – घर या पूजा स्थल को गंदा न छोड़ें। झूठ और वाद-विवाद – झूठ बोलने और अनावश्यक विवाद में न पड़ें। अशुद्ध आहार – तेल- मसाले वाले और भारी भोजन से परहेज करें। कामकाजी मानसिकता – व्रत के समय ध्यान और भक्ति से भटकने वाले कार्य न करें।
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