
जानिए तिथि और समय, पूजा सामग्री, विधि, और इस पवित्र पर्व के लाभ।
हिंदू धर्म में नवरात्रि के 9 दिनों का विशेष महत्व होता है। इस दौरान मां दुर्गा नौ अलग अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। यूं तो हर तिथि का अपना अलग महत्व है, लेकिन महा अष्टमी तिथि विशेष महत्वपूर्ण मानी गई है। नवरात्रि के आठवें दिन को महा अष्टमी या दुर्गा अष्टमी कहा जाता है। यह दिन माता दुर्गा के आठवें स्वरूप माता महागौरी को समर्पित होता है।
मुहूर्त | समय |
ब्रह्म मुहूर्त | 04:13 ए एम से 05:01 ए एम तक |
प्रातः सन्ध्या | 04:37 ए एम से 05:50 ए एम तक |
अभिजित मुहूर्त | 11:24 ए एम से 12:12 पी एम तक |
विजय मुहूर्त | 01:47 पी एम से 02:35 पी एम तक |
गोधूलि मुहूर्त | 05:46 पी एम से 06:10 पी एम तक |
सायाह्न सन्ध्या | 05:46 पी एम से 06:58 पी एम तक |
अमृत काल | 02:56 ए एम, अक्टूबर 01 से 04:40 ए एम, अक्टूबर 01 तक |
निशिता मुहूर्त | 11:24 पी एम से 12:12 ए एम, अक्टूबर 01 तक |
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के अंतिम 2 दिन विशेष माने जाते हैं, क्योंकि अष्टमी के दिन देवी दुर्गा ने चंद और मुंड का वध किया था, और नवमी के दिन महिषासुर का संहार कर संसार की रक्षा की थी।
ये भी कहा जाता है कि यदि कोई भक्त नवरात्रि में पूरे नौ दिन का व्रत न रख सके तो अष्टमी और नवमी के दिन उपवास रखकर माता दुर्गा की पूजा करने से उसे नवरात्रि व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त हो सकता है।
मान्यता है अष्टमी तिथि पर माता महागौरी की आराधना करने से जातक की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही माता अपने भक्तों तो निर्भयता, आरोग्य व रूप-सौंदर्य का वरदान देती हैं। इसके अलावा, देवी महागौरी की कृपा से व्यक्ति को जीवन के हर क्षेत्र में सुख-समृद्धि मिलती है।
मां महागौरी की मूर्ति, लाल कपड़ा, लाल चुनरी या साड़ी, कपूर, धूप, घी, रोली, सिंदूर, अक्षत, फूल, फल, मिष्ठान, गंगाजल, नारियल, सिंगार का सामान, हल्दी की गांठ, लौंग, सुपारी आदि।
यदि आप छात्र हैं और मेहनत के बावजूद सफलता नहीं मिल रही है तो माता दुर्गा को कपूर व 12 लौंग चढ़ाएं। इसके बाद इस मंत्र का जाप करें- "या देवी सर्व भूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।"
यदि आप लंबे समय से किसी स्वास्थ्य समस्या से परेशान हैं और उससे छुटकारा पाना चाहते हैं, तो दुर्गा अष्टमी के दिन माता दुर्गा को कपूर के साथ 6 लौंग अर्पित करें। इसके अलावा 21 बार इस मंत्र का जाप करें- “देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि मे परमं सुखम्। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि”।
अगर आप अपने करियर में तरक्की चाहते हैं, तो अष्टमी के दिन माता दुर्गा के सम्मुख घी का दीपक जलाएं, और 11 बार मंत्र का जाप करें- "सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।"
जो लोग जीवन में धन समृद्धि प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें दुर्गा अष्टमी के दिन माता दुर्गा को खोया का भोग लगाना चाहिए। इसके बाद 108 बार इस मंत्र का जाप करें- “सर्वा बाधा विनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः”।
अगर आप पर कर्ज़ का बोझ है, और इससे मुक्ति पाना चाहते हैं, तो अष्टमी के दिन 5 सफेद कौड़ियां लेकर उन्हें लाल कपड़े में बांध लें, और इसे पूजा के दौरान माता के मंदिर में रखें। पूजा के बाद इस कपड़े को घर ले आएं, और तिजोरी में रख लें। इससे शीघ्र ही कर्ज़ से छुटकारा मिलेगा।
यदि आप पारिवारिक कलह से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो दुर्गा अष्टमी के दिन माता को लाल चुनरी चढ़ाएं, और इस मंत्र का 11 बार जाप करें- "सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते”।
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