image
downloadDownload
shareShare
ShareWhatsApp

यज्ञोपवित मंत्र | Yagyopavit Mantra

जानें इसे पढ़ने के अद्भुत लाभ और सही जाप का तरीका। जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और नकारात्मकता से मुक्ति पाने का सरल उपाय।

यज्ञोपवीत मंत्र के बारे में

यज्ञोपवीत मंत्र का सनातन धर्म में विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह मंत्र संस्कार, शुद्धता और आध्यात्मिक अनुशासन का प्रतीक है, जिसका संबंध ब्रह्मचर्य और विद्या से जुड़ा होता है। श्रद्धा के साथ इसके उच्चारण से आत्मिक चेतना जाग्रत होती है। इस लेख में जानिए यज्ञोपवीत मंत्र का अर्थ, महत्व और धार्मिक उपयोग।

यज्ञोपवीत मंत्र क्या है?

सनातन धर्म में संस्कारों को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। धर्मशास्त्रों में कुल 16 संस्कार बताए गए हैं, जिनमें से एक उपनयन संस्कार है। यह संस्कार आमतौर पर बच्चे की दसवीं उम्र में कराया जाता है। इस अवसर पर तीन धागों वाला पवित्र यज्ञोपवीत पहनाया जाता है, जो सूत से बना होता है।

इसे पहनने वाले व्यक्ति को कई नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। यह वस्त्र अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसके साथ जुड़ी कई शिष्टियां निर्धारित हैं। किसी भी बालक का यज्ञोपवीत तभी कराया जाना चाहिए जब वह इन नियमों को समझकर उनका पालन करने में सक्षम हो। यह संस्कार विशेष रूप से उपनयन संस्कार के समय बच्चों और युवाओं को दिया जाता है।

यज्ञोपवीत मंत्र

1. ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं, प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्। आयुष्यमग्रं प्रतिमुञ्च शुभ्रं, यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः

अर्थ: यह यज्ञोपवीत अत्यंत पवित्र है, जिसे प्रजापति ने स्वाभाविक रूप से पूर्व दिशा की ओर स्थापित किया। यह आयु, शक्ति, शुभता, शुद्धता और तेज से युक्त है।

2. ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्

सरल अर्थ

ॐ भूर्भुवः स्वः यह तीनों लोकों (भूमि, अंतरिक्ष और आकाश) का प्रतीक है।

तत्सवितुर्वरेण्यं उस सर्वोच्च और आदर्श सूर्य की पूजा करें।

भर्गो देवस्य धीमहि उस दिव्य प्रकाश और शक्ति का ध्यान करें।

धियो यो नः प्रचोदयात् हमारी बुद्धि को सही दिशा और ज्ञान देने की प्रार्थना करें।

3. बीज मंत्र

ॐ भूर्भुवः स्वः

ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि

ॐ धियो यो नः प्रचोदयात्

4. यज्ञोपवीत धारण मंत्र

ॐ इदं जनेऊ मम परमाणं शुभं भवतु

अर्थ: यह जनेऊ मेरे लिए पवित्र और शुभ हो।

यज्ञोपवीत मंत्र के नियम

1. स्वच्छता और स्नान

मंत्र जपने से पहले स्नान करना और साफ कपड़े पहनना जरूरी है। मानसिक रूप से भी शुद्ध रहना आवश्यक है।

2. पूर्व दिशा की ओर मुख

यज्ञोपवीत पहनते या मंत्र जपते समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ माना जाता है।

3. संकल्प लेना

मंत्र का जाप शुरू करने से पहले संकल्प लें कि आप नियम और श्रद्धा के साथ मंत्र का पालन करेंगे।

4. यज्ञोपवीत की पवित्रता

धारण से पहले यज्ञोपवीत को दूध, घी, मिश्री और पुष्पों से शुद्ध करें और केवल पवित्र स्थान पर पहनें।

5. सही उच्चारण

मंत्र का उच्चारण सही और स्पष्ट होना चाहिए। गलत उच्चारण से मंत्र का प्रभाव कम हो सकता है।

6. सही समय

मंत्र का जाप सुबह या शुभ समय में करना सर्वोत्तम माना जाता है।

7. मन की एकाग्रता

जप के दौरान मन को शांत और एकाग्र रखना आवश्यक है। विचलित मन से मंत्र का प्रभाव कमजोर पड़ सकता है।

8. गुरु या ज्योतिष की सलाह

मंत्र और यज्ञोपवीत धारण करते समय ग्रह और कुंडली के अनुसार किसी योग्य गुरु या ज्योतिष की सलाह लेना लाभकारी है।

9. भक्ति और श्रद्धा

मंत्र का जप केवल लाभ के लिए नहीं, बल्कि श्रद्धा और भक्ति के साथ करना चाहिए।

10. नियमित अभ्यास

मंत्र का नियमित जप और यज्ञोपवीत का सही पालन जीवन में स्थायी सकारात्मक प्रभाव लाता है।

यज्ञोपवीत मंत्र के फायदे

1. बुद्धि में वृद्धि: यज्ञोपवीत मंत्र का नियमित जाप व्यक्ति की समझ और सोचने की क्षमता को बढ़ाता है।

2. सकारात्मक ऊर्जा का संचार: इस मंत्र से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और चेतना का विकास होता है।

3. साहस और आत्मविश्वास: मन और शरीर में साहस और आत्मविश्वास को मजबूत करता है।

4. ध्यान और एकाग्रता: मंत्र का जाप ध्यान शक्ति और मानसिक एकाग्रता को बढ़ाता है।

5. आध्यात्मिक उन्नति: यह मंत्र व्यक्ति को आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने में मदद करता है।

6. मानसिक शांति: मन को स्थिरता, शांति और संतुलन प्रदान करता है।

7. शिक्षा और अध्ययन में लाभ: विद्यार्थियों और ज्ञानियों के लिए यह मंत्र अध्ययन और सीखने में सफलता लाने वाला है।

8. सकारात्मक वातावरण का निर्माण: मंत्र का जाप घर और कार्यस्थल में शुभ और सकारात्मक वातावरण बनाता है।

9. गुरु और देवताओं का आशीर्वाद: यह मंत्र उच्चारण से गुरु, देवताओं और ब्रह्मांडीय शक्तियों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

10. संपूर्ण जीवन में सफलता: यज्ञोपवीत मंत्र जीवन में संतुलन, समृद्धि और सफलता की दिशा प्रदान करता है।

निष्कर्ष

यह मंत्र उपनयन संस्कार और यज्ञोपवीत धारण के समय जपा जाता है, जिससे व्यक्ति को ज्ञान, समझ और सही मार्गदर्शन प्राप्त होता है। मंत्र मन और बुद्धि को शुद्ध करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है। नियमित जाप से ध्यान, एकाग्रता और आध्यात्मिक विकास में मदद मिलती है।

divider
Published by Sri Mandir·February 10, 2026

Did you like this article?

srimandir-logo

श्री मंदिर ने श्रध्दालुओ, पंडितों, और मंदिरों को जोड़कर भारत में धार्मिक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया है। 100 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के साथ साझेदारी करके, हम विशेषज्ञ पंडितों द्वारा की गई विशेष पूजा और चढ़ावा सेवाएँ प्रदान करते हैं और पूर्ण की गई पूजा विधि का वीडियो शेयर करते हैं।

हमारा पता

फर्स्टप्रिंसिपल ऐप्सफॉरभारत प्रा. लि. 2nd फ्लोर, अर्बन वॉल्ट, नं. 29/1, 27वीं मेन रोड, सोमसुंदरपल्या, HSR पोस्ट, बैंगलोर, कर्नाटक - 560102
YoutubeInstagramLinkedinWhatsappTwitterFacebook