
क्या आप जानते हैं इसे पढ़ने के चमत्कारिक लाभ? जानें सही जाप और शक्ति पाने का तरीका।
तारक मंत्र का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। यह मंत्र जीवन के अंत समय में मोक्ष और आत्मशांति का मार्ग प्रशस्त करने वाला बताया गया है। शास्त्रों में इसे कल्याणकारी और उद्धारक मंत्र माना गया है। इस लेख में जानिए तारक मंत्र क्या है और इसका महत्व।
तारक मंत्र का अर्थ है, मोक्ष या तारण कराने वाला मंत्र। संस्कृत में ‘तारक’ शब्द ‘तारण’ से बना है, जिसका अर्थ होता है पार लगाना यानी जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाना। इसलिए तारक मंत्र को ऐसा मंत्र माना जाता है, जो साधक को दुख-सागर से पार कराता है और परम शांति व मोक्ष की प्राप्ति कराता है।
शिव पुराण और अन्य धर्मग्रंथों में तारक मंत्र का खास उल्लेख मिलता है। माना जाता है कि भगवान शिव का यह पवित्र मंत्र मृत्यु के समय इंसान को मोक्ष दिलाता है। इसे ‘तारक’ इसलिए कहा गया है क्योंकि यह आत्मा को जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त कर शिव लोक तक पहुँचाता है। कहते हैं कि भगवान शिव ने यह मंत्र ऋषि मार्कण्डेय को बताया था। उस समय वे मृत्यु के भय से बहुत परेशान थे। शिवजी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि इस मंत्र का सच्चे मन से जाप करने वाला इंसान सभी दुखों और बंधनों से मुक्त हो जाएगा।
वाराणसी के बारे में भी मान्यता है कि जो लोग मणिकर्णिका घाट पर तारक मंत्र सुनते हैं, उन्हें सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है और वे शिव लोक चले जाते हैं। इसी कारण वाराणसी को ‘मोक्ष की नगरी’ और भगवान शिव का निवास माना जाता है।
तारक मंत्र को जीवन के सागर को पार कराने वाली एक नाव माना जाता है। यह मंत्र भगवान राम के भक्तों में बहुत लोकप्रिय है। तारक मंत्र को त्रयोदशाक्षरी मंत्र कहा जाता है क्योंकि इसमें 13 अक्षर होते हैं। इसके नाम से ही स्पष्ट है कि यह मंत्र मनुष्य को जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाता है। माना जाता है कि सबसे पहले भगवान शिव ने यह पवित्र मंत्र देवी पार्वती को बताया था। उन्होंने कहा था कि तारक मंत्र का जाप करना भगवान विष्णु के सहस्रनाम (1000 नामों) के जाप के बराबर है।
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