
जानें इसे पढ़ने के अद्भुत लाभ और सही जाप का तरीका। जीवन में धन, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा लाने का सरल उपाय।
रत्न मंत्र का ज्योतिष और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। यह मंत्र रत्नों की ऊर्जा को जाग्रत कर जीवन में सकारात्मकता, संतुलन और शुभ फल बढ़ाने से जुड़ा होता है। श्रद्धा के साथ इसका जाप लाभकारी माना जाता है। इस लेख में जानिए रत्न मंत्र क्या है और इसका धार्मिक व ज्योतिषीय महत्व।
ज्योतिष में अलग-अलग समस्याओं के लिए और ग्रहों को शांत करने के लिए व्यक्ति को रत्न पहनने की सलाह दी जाती है। आमतौर पर कुंडली में ग्रहों के दोष को कम करने के लिए रत्न धारण किया जाता है। इसे पहनने के कुछ खास नियम बताए गए हैं। ज्योतिष मान्यता है कि रत्न धारण करने से पहले उसका विधिवत पूजन और प्राण प्रतिष्ठा करना आवश्यक होता है।
ज्योतिष के अनुसार नवरत्न नौ ग्रहों का प्रतीक माने जाते हैं। हर रत्न को व्यक्ति की राशि और ग्रह स्थिति के अनुसार पहनने की सलाह दी जाती है। इन्हें धारण करने से ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि प्राप्त होती है। इन्हें पहनने के कई नियम होते हैं और रत्न पहनने के समय कुछ मंत्रों का जाप किया जाना भी जरूरी होता है जिससे इनकी शक्ति बढ़ती है।
1. माणिक (सूर्य का रत्न)
मंत्र: "ॐ घृणि सूर्याय नमः" अर्थ: हे सूर्यदेव, आपकी कृपा से जीवन में ऊर्जा, आत्मविश्वास और सफलता प्राप्त हो।
2. मोती (चंद्र का रत्न)
मंत्र: "ॐ चंद्राय नमः" अर्थ: हे चंद्रदेव, कृपया मेरे मन को शांति, स्थिरता और भावनात्मक संतुलन प्रदान करें।
3. पन्ना (बुध का रत्न)
मंत्र: "ॐ बुं बुधाय नमः" अर्थ: हे बुधदेव, मुझे ज्ञान, विवेक और वाणी में मधुरता का आशीर्वाद दें।
4. पुखराज (बृहस्पति का रत्न)
मंत्र: "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" अर्थ: हे बृहस्पति देव, धन, समृद्धि और जीवन में शुभ अवसर प्रदान करें।
5. हीरा (शुक्र का रत्न)
मंत्र: "ॐ शुक्राय नमः" अर्थ: हे शुक्रदेव, कृपया मुझे आकर्षण, वैवाहिक सुख और सौंदर्य का वरदान दें।
6. नीलम (शनि का रत्न)
मंत्र: "ॐ शं शनैश्चराय नमः" अर्थ: हे शनिदेव, मेरे दुख-दर्द और जीवन की रुकावटों को दूर कर स्थिरता दें।
7. गोमेद (राहु का रत्न)
मंत्र: "ॐ रां राहवे नमः" अर्थ: हे राहु देव, मुझे भय, शंका और जीवन की उलझनों से मुक्ति प्रदान करें।
8. लहसुनिया (केतु का रत्न)
मंत्र: "ॐ कें केतवे नमः" अर्थ: हे केतु देव, कृपया छिपे हुए संकटों और बाधाओं से मेरी रक्षा करें।
9. गार्नेट (मंगल से जुड़ा रत्न)
मंत्र: "ॐ क्रां क्रौं सः भौमाय नमः" अर्थ: हे मंगल देव, मुझे साहस, उत्साह और दृढ़ निश्चय प्रदान करें।
10. लाल मूंगा (मंगल का रत्न)
मंत्र: "ॐ अं अंगारकाय नमः" अर्थ: हे मंगल देव, मुझे शक्ति, पराक्रम और रोगों से मुक्ति प्रदान करें।
1.माणिक (सूर्य से जुड़ा रत्न)
2. मोती (चंद्र से जुड़ा रत्न)
3. पन्ना (बुध से जुड़ा रत्न)
4. पुखराज (बृहस्पति से जुड़ा रत्न)
5. हीरा (शुक्र से जुड़ा रत्न)
6. नीलम (शनि से जुड़ा रत्न)
7. गोमेद (राहु से जुड़ा रत्न)
8. लहसुनिया (केतु से जुड़ा रत्न)
9. गार्नेट (मंगल से जुड़ा रत्न)
10. लाल मूंगा (मंगल से जुड़ा रत्न)
रत्न ग्रहों की शक्तियों को संतुलित करने में मदद करते हैं। सही रत्न पहनने से जीवन में सुख, शांति और आर्थिक समृद्धि मिलती है। ये मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को भी सुधारते हैं। ज्योतिष के अनुसार, रत्नों का उपयोग भाग्य और सफलता बढ़ाने के लिए किया जाता है।
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