
इस लेख में जानिए 2026 में वट पूर्णिमा व्रत की तिथि, इसका धार्मिक महत्व, पूजा विधि, व्रत कथा और इस दिन किए जाने वाले खास उपायों की संपूर्ण जानकारी।
वट पूर्णिमा व्रत विशेष रूप से माता सावित्री और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने तथा वैवाहिक जीवन में सुख, सौभाग्य और दीर्घायु की कामना के लिए एक अत्यंत पवित्र अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से वट वृक्ष की पूजा, व्रत और कथा सुनने से पति की आयु लंबी होती है और दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। वट पूर्णिमा व्रत पति-पत्नी के अटूट प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन किया गया जप, तप, दान और पूजा अत्यंत फलदायी होता है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि, स्थिरता और पारिवारिक खुशहाली का संचार होता है।
वट पूर्णिमा व्रत हिंदू धर्म में विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र व्रत माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की समृद्धि के लिए रखा जाता है। इस दिन महिलाएं वट (बरगद) वृक्ष की पूजा करती हैं और माता सावित्री तथा सत्यवान की कथा सुनती हैं।
वर्ष 2026 में वट पूर्णिमा व्रत इस प्रकार मनाया जाएगा:
उदया तिथि के अनुसार वट पूर्णिमा व्रत 29 जून 2026 को रखा जाएगा।
संबंधित व्रत:
वट पूर्णिमा व्रत का संबंध माता सावित्री और उनके पति सत्यवान की कथा से जुड़ा है। यह व्रत पति की दीर्घायु और वैवाहिक सुख के लिए किया जाता है। वट (बरगद) वृक्ष को इस दिन विशेष रूप से पूजा जाता है, क्योंकि इसे अमरत्व और स्थायित्व का प्रतीक माना जाता है।
वट (बरगद) का वृक्ष हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसे त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप माना जाता है।
वट पूर्णिमा से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा सावित्री और सत्यवान की है। प्राचीन समय में सावित्री नाम की एक पतिव्रता स्त्री थी, जिनका विवाह सत्यवान नाम के राजकुमार से हुआ था। एक दिन यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए। सावित्री ने अपने तप, भक्ति और बुद्धिमत्ता से यमराज को प्रसन्न किया और अपने पति के प्राण वापस ले लिए। इस प्रकार उन्होंने अपने पति को मृत्यु से बचा लिया। तभी से यह व्रत महिलाओं के लिए पति की दीर्घायु के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
वट पूर्णिमा व्रत हमें यह सिखाता है:
वट पूर्णिमा व्रत एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण व्रत है, जो पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाने और परिवार में सुख-शांति लाने का प्रतीक है। यह व्रत महिलाओं के अटूट प्रेम, समर्पण और विश्वास को दर्शाता है। वर्ष 2026 में वट पूर्णिमा व्रत 29 जून, सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से माता सावित्री का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
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