ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 कब है?
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ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 कब है? | Jyeshtha Purnima 2026 Kab Hai

इस लेख में जानिए 2026 में ज्येष्ठ पूर्णिमा की तिथि, इसका धार्मिक महत्व, गंगा स्नान, पूजा विधि और इस दिन किए जाने वाले खास उपायों की संपूर्ण जानकारी।

ज्येष्ठ पूर्णिमा के बारे में

ज्येष्ठ पूर्णिमा विशेष रूप से चन्द्रदेव और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने तथा जीवन में शांति, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का एक अत्यंत पवित्र अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से चन्द्रमा को अर्घ्य देने, स्नान-दान करने और भगवान विष्णु की पूजा करने से मानसिक तनाव दूर होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। ज्येष्ठ पूर्णिमा को आध्यात्मिक साधना, दान और आत्मचिंतन का विशेष दिन माना जाता है, जो व्यक्ति को आंतरिक शांति और संतुलन प्रदान करता है। इस दिन किया गया जप, तप और सेवा अत्यंत फलदायी होता है, जिससे जीवन में उन्नति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 कब है?

हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है और हर महीने आने वाली पूर्णिमा को पवित्र माना जाता है। लेकिन ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा, जिसे ज्येष्ठ पूर्णिमा कहा जाता है, का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। इस दिन व्रत, पूजा, दान और पवित्र स्नान करने से विशेष पुण्य मिलता है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून, सोमवार को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि 28 जून को 27:06+ बजे से शुरू होकर 29 जून को 29:26+ बजे तक रहेगी, जबकि चन्द्रोदय शाम 7:16 बजे होगा।

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 तिथि और समय

वर्ष 2026 में ज्येष्ठ पूर्णिमा इस प्रकार रहेगी:

  • तिथि: 29 जून 2026, सोमवार
  • पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ: 28 जून 2026 को 27:06+ बजे
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 29 जून 2026 को 29:26+ बजे

चन्द्रोदय समय:

  • चन्द्रोदय: 29 जून 2026 को शाम 07:16 बजे
  • उदया तिथि के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून 2026 को मनाई जाएगी।

ज्येष्ठ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

ज्येष्ठ पूर्णिमा का दिन विशेष रूप से चन्द्रदेव, भगवान विष्णु और पितरों की पूजा के लिए समर्पित होता है। इस दिन चन्द्रमा अपनी पूर्ण कला में होता है, जिससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

इस दिन का महत्व:

  • चन्द्रदेव को अर्घ्य देने से मानसिक शांति मिलती है
  • भगवान विष्णु की पूजा से सुख-समृद्धि आती है
  • पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है
  • व्रत रखने से पापों का नाश होता है

ज्येष्ठ पूर्णिमा क्यों है खास?

ज्येष्ठ मास साल का सबसे गर्म समय होता है। इस दौरान शरीर और मन दोनों पर गर्मी का प्रभाव पड़ता है। ऐसे में पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा की शीतल किरणें मानसिक और शारीरिक संतुलन प्रदान करती हैं।

  • चन्द्रमा शीतलता का प्रतीक है
  • इस दिन ध्यान और साधना विशेष फल देती है
  • जलदान और सेवा का महत्व बढ़ जाता है

पौराणिक मान्यताएं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा पूर्ण रूप में होता है और उसकी किरणें सकारात्मक ऊर्जा देती हैं। इस दिन चन्द्रदेव की पूजा करने से मन शांत रहता है और जीवन में संतुलन बना रहता है। कई स्थानों पर इस दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन स्नान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा पूजा विधि

1. सुबह की तैयारी

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठें
  • स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें
  • व्रत का संकल्प लें

2. भगवान की पूजा

  • घर के मंदिर में भगवान विष्णु की पूजा करें
  • फूल, धूप और दीप अर्पित करें

3. चन्द्रमा को अर्घ्य

  • शाम को चन्द्रमा निकलने के बाद अर्घ्य दें
  • जल या दूध से अर्घ्य देना शुभ माना जाता है

4. मंत्र जाप

  • “ॐ सोमाय नमः” मंत्र का जाप करें
  • विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें

5. दान और सेवा

  • जल, फल और वस्त्र का दान करें
  • गरीबों की सहायता करें

दान का महत्व

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है, खासकर गर्मी के मौसम में:

  • जल से भरे घड़े का दान
  • छाता और पंखा दान करना
  • फल और अन्न का दान
  • जरूरतमंदों को सहायता दान करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

व्रत के नियम

  • दिनभर व्रत रखें या फलाहार करें
  • सात्विक भोजन करें
  • क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें
  • भगवान का ध्यान करें

ज्येष्ठ पूर्णिमा कैसे मनाई जाती है?

भारत के विभिन्न जगह पर ज्येष्ठ पूर्णिमा अलग-अलग तरीकों से मनाई जाती है:

  • मंदिरों में विशेष पूजा
  • गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान
  • भजन-कीर्तन
  • दान-पुण्य और सेवा कार्य

ज्येष्ठ पूर्णिमा के लाभ

  • मानसिक शांति मिलती है
  • स्वास्थ्य में सुधार होता है
  • आर्थिक स्थिति बेहतर होती है
  • पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है

आध्यात्मिक संदेश

ज्येष्ठ पूर्णिमा हमें यह सिखाती है:

  • जीवन में संतुलन बनाए रखना जरूरी है
  • सेवा और दान का महत्व समझना चाहिए
  • मन को शांत रखना चाहिए
  • ईश्वर में विश्वास रखना चाहिए

रोचक तथ्य

  • पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा पूरी तरह दिखाई देता है
  • यह दिन ध्यान और साधना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है
  • जलदान का विशेष महत्व होता है
  • चन्द्रदेव की पूजा से मानसिक तनाव कम होता है

निष्कर्ष

ज्येष्ठ पूर्णिमा एक पवित्र और शुभ दिन है, जो व्यक्ति को मानसिक शांति, सुख और समृद्धि प्रदान करता है। यह दिन हमें भक्ति, दान और संतुलन का महत्व सिखाता है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून, सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से चन्द्रदेव और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। यदि आप अपने जीवन में शांति और सकारात्मक ऊर्जा चाहते हैं, तो ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन व्रत और पूजा अवश्य करें।

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Published by Sri Mandir·May 14, 2026

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