जया पार्वती व्रत 2026 कब है?
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जया पार्वती व्रत 2026 कब है? | Jaya Parvati Vrat 2026 Kab Hai

इस लेख में जानिए 2026 में जया पार्वती व्रत की तिथि, इसका धार्मिक महत्व, माता पार्वती की पूजा-विधि, व्रत नियम और इस दिन किए जाने वाले खास उपायों की संपूर्ण जानकारी।

जया पार्वती व्रत के बारे में

जया पार्वती व्रत विशेष रूप से माता पार्वती और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने तथा वैवाहिक जीवन में सुख, सौभाग्य और समृद्धि पाने का एक अत्यंत पवित्र अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने से विवाह योग्य कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है और विवाहित महिलाओं के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इस दौरान किया गया जप, तप, व्रत और पूजा अत्यंत फलदायी होता है, जिससे जीवन में खुशहाली, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

जया पार्वती व्रत 2026 कब शुरू होगा?

जया पार्वती व्रत वर्ष 2026 में 27 जुलाई, सोमवार से प्रारम्भ होगा। यह व्रत मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है। साथ ही, इससे पहले गौरी व्रत की शुरुआत 25 जुलाई 2026 (शनिवार) से होती है, जो 29 जुलाई 2026 (बुधवार) को समाप्त होता है।

जया पार्वती व्रत 2026 तिथि और समय

  • गौरी व्रत प्रारम्भ: 25 जुलाई 2026, शनिवार
  • जया पार्वती व्रत प्रारम्भ: 27 जुलाई 2026, सोमवार
  • गौरी व्रत समाप्त: 29 जुलाई 2026, बुधवार

तिथि विवरण:

  • एकादशी तिथि प्रारम्भ: 24 जुलाई 2026 को 09:12 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 25 जुलाई 2026 को 11:34 बजे

जया पार्वती व्रत क्या है?

जया पार्वती व्रत हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण और पवित्र व्रत है, जो विशेष रूप से देवी पार्वती को समर्पित है। इस व्रत में महिलाएं माता पार्वती की पूजा करती हैं और उनसे सुखी दांपत्य जीवन, अच्छे पति और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। यह व्रत गुजरात और पश्चिम भारत में अधिक लोकप्रिय है, लेकिन अब पूरे भारत में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

जया पार्वती व्रत का धार्मिक महत्व

इस व्रत का महत्व अत्यंत गहरा है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से:

  • मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है
  • विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं
  • वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है
  • पति की आयु लंबी होती है
  • परिवार में प्रेम और समृद्धि बढ़ती है

देवी पार्वती ने स्वयं भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, इसलिए यह व्रत उनकी उसी तपस्या का प्रतीक माना जाता है।

जया पार्वती व्रत और गौरी व्रत का संबंध

गौरी व्रत और जया पार्वती व्रत आपस में जुड़े हुए हैं। गौरी व्रत की शुरुआत पहले होती है और फिर जया पार्वती व्रत का पालन किया जाता है। इस दौरान महिलाएं माता पार्वती (गौरी) की पूजा करती हैं और उनसे सुखी जीवन का आशीर्वाद मांगती हैं।

पूजा विधि

1. व्रत का संकल्प

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।

2. पूजा स्थल तैयार करें

  • घर के मंदिर में साफ स्थान पर माता पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें।

3. पूजा सामग्री

  • फल और फूल
  • धूप और दीप
  • रोली और चावल
  • नारियल
  • मिठाई

4. पूजा प्रक्रिया

  • सबसे पहले दीपक जलाएं
  • माता पार्वती और भगवान शिव को जल अर्पित करें
  • फूल और भोग अर्पित करें
  • आरती करें

5. व्रत नियम

  • इस व्रत में महिलाएं कई जगह नमक रहित भोजन (निर्जला या फलाहार) करती हैं।

जया पार्वती व्रत की कथा

पुराणों के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। उनकी भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी कारण यह व्रत महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। जो महिलाएं इस व्रत को श्रद्धा से करती हैं, उन्हें मनचाहा वर और सुखी वैवाहिक जीवन मिलता है।

व्रत के दौरान क्या करें और क्या न करें

क्या करें:

  • माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करें
  • व्रत के नियमों का पालन करें
  • सकारात्मक सोच रखें
  • गरीबों को दान करें

क्या न करें:

  • तामसिक भोजन न करें
  • झूठ और क्रोध से दूर रहें
  • किसी का अपमान न करें

जया पार्वती व्रत के लाभ

इस व्रत को करने से व्यक्ति को कई लाभ प्राप्त होते हैं:

  • विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं
  • दांपत्य जीवन सुखमय बनता है
  • मानसिक शांति मिलती है
  • परिवार में खुशहाली आती है
  • देवी पार्वती का आशीर्वाद मिलता है

भगवान शिव और माता पार्वती का महत्व

इस व्रत में भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा का विशेष महत्व होता है। ये दोनों आदर्श दांपत्य जीवन के प्रतीक माने जाते हैं। इनकी पूजा करने से पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और समझ बढ़ती है।

निष्कर्ष

जया पार्वती व्रत एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण व्रत है, जो विशेष रूप से महिलाओं के लिए फलदायी माना जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत 27 जुलाई, सोमवार से शुरू होगा, जबकि गौरी व्रत 25 जुलाई से 29 जुलाई तक चलेगा। यदि इस व्रत को पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक किया जाए, तो जीवन में सुख, शांति और समृद्धि अवश्य प्राप्त होती है।

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Published by Sri Mandir·May 27, 2026

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