
राम लक्ष्मण द्वादशी 2025 के दिन करें श्रीराम और लक्ष्मण की विधिपूर्वक पूजा। जानें व्रत का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त धार्मिक लाभ के लिए जरूर पढ़ें।
राम लक्ष्मण द्वादशी एक पावन हिंदू पर्व है, जो भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को समर्पित है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और श्रीराम-लक्ष्मण की पूजा कर उनकी कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं। यह दिन पुण्यदायी होता है।
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को राम लक्ष्मण द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। इस विशेष दिन भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम व शेषनाग के अवतार श्री लक्ष्मण की विधिवत् पूजा की जाती है। इसके अलावा इस दिन भगवान गोविंद विट्ठलनाथजी की भी उपासना करने का विधान है।
| मुहूर्त | समय |
| ब्रह्म मुहूर्त | 03:44 ए एम से 04:26 ए एम तक |
| प्रातः सन्ध्या | 04:05 ए एम से 05:07 ए एम तक |
| अभिजित मुहूर्त | 11:30 ए एम से 12:24 पी एम तक |
| विजय मुहूर्त | 02:14 पी एम से 03:08 पी एम तक |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:46 पी एम से 07:06 पी एम तक |
| सायाह्न सन्ध्या | 06:47 पी एम से 07:49 पी एम तक |
| अमृत काल | 02:47 ए एम, जून 08 से 04:35 ए एम, जून 08 तक |
| निशिता मुहूर्त | 11:36 पी एम से 12:18 ए एम, जून 08 तक |
| मुहूर्त | समय |
| द्विपुष्कर योग | 05:07 ए एम से 09:40 ए एम तक |
| सर्वार्थ सिद्धि योग | 09:40 ए एम से 05:07 ए एम, जून 08 तक |
राम लक्ष्मण द्वादशी के अवसर पर भगवान गोविंद विट्ठलनाथजी यानि श्रीकृष्ण की भी उपासना की जाती है। भगवान कृष्ण को चंपा के पुष्प अति प्रिय हैं, इसलिए इस विशेष दिन उनके पूजन व श्रृंगार में चंपा के फूलों का प्रयोग किया जाता है। यही कारण है कि राम लक्ष्मण द्वादशी को चंपक द्वादशी भी कहा जाता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि जितना महत्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी, अर्थात् निर्जला एकादशी का है, उतना ही महत्वपूर्ण राम लक्ष्मण द्वादशी भी है। यह दिन इस लिए भी विशेष माना जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान राम, लक्ष्मण और श्री कृष्ण तीनों की ही एक साथ उपासना की जाती है। इस अवसर पा भक्त भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम, शेषनाग के अवतार श्री लक्ष्मण एवं श्रीगोविंद विट्ठलनाथजी की प्रतिमा की विधि विधान से पूजा करते हैं।
राम लक्ष्मण द्वादशी को लेकर एक मान्यता ऐसी भी है, कि त्रेता युग में महाराज दशरथ ने संतान प्राप्ति के लिए इसी द्वादशी तिथि का व्रत किया था, जिसके प्रभाव के कारण ही उन्हें राम लक्ष्मण जैसी संतानों की प्राप्ति हुई थी।
तो भक्तों ये तो थी राम लक्ष्मण द्वादशी से जुड़ी संपूर्ण जानकारी। हमारी कामना है कि इस अवसर पर आपकी आराधना सफल हो और आप पर भगवान राम, लक्ष्मण, श्री कृष्ण तीनों की कृपा सदैव बनी रहे। ऐसे ही व्रत, त्यौहार व अन्य धार्मिक जानकारियों के लिए जुड़े रहिए श्री मंदिर पर।
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