
ज्येष्ठ पूर्णिमा 2025 की तिथि, महत्व और पूजन विधि के साथ जानिए इस पावन दिन का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व।
ज्येष्ठ पूर्णिमा हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह की अंतिम तिथि होती है। इस दिन व्रत, स्नान और दान का विशेष महत्व होता है। कई स्थानों पर भगवान विष्णु और सत्यनारायण की पूजा की जाती है।
वर्ष भर में कई ऐसी तिथियां, कई ऐसे दिन आते हैं, जिनका हिंदू धर्म में बहुत महत्व होता है। उनमें से पूर्णिमा तिथि अति विशेष मानी जाती है।
| मुहूर्त | समय |
| ब्रह्म मुहूर्त | 03:44 ए एम से 04:26 ए एम |
| प्रातः सन्ध्या | 04:05 ए एम से 05:07 ए एम |
| अभिजित मुहूर्त | 11:30 ए एम से 12:25 पी एम |
| विजय मुहूर्त | 02:14 पी एम से 03:09 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:47 पी एम से 07:08 पी एम |
| सायाह्न सन्ध्या | 06:48 पी एम से 07:50 पी एम |
| अमृत काल | 06:32 ए एम से 08:18 ए एम |
| निशिता मुहूर्त | 11:37 पी एम से 12:18 ए एम, जून 11 |
| रवि योग | 05:07 ए एम से 06:02 पी एम |
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार हर माह के शुक्ल पक्ष के पंद्रहवे दिन को पूर्णिमा तिथि के नाम से जाना जाता है। इस तिथि पर रात के समय चन्द्रमा अपनी सोलह कलाओं को पूर्ण करके अपने सम्पूर्ण रूप में आकाश में प्रकाशमान होता है।
हमारे पुराणों में पूर्णिमा तिथि और इस दिन व्रत करने का महात्म्य बहुत अधिक है। एक ओर जहां चन्द्रमा की श्वेतिमा हमें इस दिन की दिव्यता का अनुभव करवाती है। वहीं इस दिन किसी भी तीर्थ स्थल पर स्नान के लिए उमड़ी भक्तों की भीड़ हमें बताती है कि पूर्णिमा पर तीर्थ स्नान, दान और व्रत करना कितना महत्वपूर्ण होता है।
कहते हैं कि पूर्णिमा के दिन व्रत करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट होते हैं और उन्हें पुण्यफल की प्राप्ति होती है। मान्यताएं हैं कि पूर्णिमा के दिन व्रत और स्नान-दान आदि करने से घर में सुख-समृद्धि निवास करते हैं, तथा सभी क्लेशों का नाश होता है।
भगवान विष्णु
माँ लक्ष्मी
चंद्र देव
गंगा माँ (विशेषकर अगर यह गंगा दशहरा के आसपास हो)
पूर्णिमा एक ऐसी पावन तिथि है, जिस दिन जातक स्नान-दान, जप-तप आदि धार्मिक कार्य करके अपने पिछले सभी पापों के प्रभाव को नष्ट कर सकते हैं, साथ ही आने वाले जीवन को सुख-समृद्धि से भर सकते हैं। इसके अलावा भी कई ऐसे अद्भुत लाभ हैं, जो आपको पूर्णिमा तिथि पर मिलते हैं, चलिए उनके बारे में जानते हैं।
पूर्णिमा पर किसी ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को दान देने से भगवान विष्णु अत्यधिक प्रसन्न होते हैं, और जातक को अपनी कृपा का पात्र बनाकर उन्हें सुख-सौभाग्य, धन-संतान आदि का सुख प्रदान करते हैं।
इस दिन गंगा नदी तट पर दीप दान करने से देवी लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती हैं, और अपने आशीर्वाद स्वरूप, भक्तों का भंडार धन-धान्य से भर देती हैं।
पूर्णिमा की रात में चंद्रमा की पूजा करने से चंद्र दोष नष्ट होता है, और चंद्र देव को खीर का भोग अर्पित करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे आर्थिक तंगी व असाध्य रोगों से छुटकारा मिलता है।
माना जाता है कि पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ हनुमान जी की पूजा करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, और आस-पास की बुरी आत्माओं का प्रभाव दूर हो जाता है।
पूर्णिमा तिथि पर पितरों की शांति के लिए गंगा घाट पर तिल, कंबल, कपास, गुड़, घी और फल आदि का दान कर तर्पण करने से उनका आशीर्वाद मिलता है, और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
तो दोस्तों, ये थे इस पूर्णिमा तिथि पर मिलने वाले कुछ विशेष लाभ।
हम अपने 'श्री मंदिर' के पाठकों को सलाह देते हैं कि पूर्णिमा पर व्रत करें, स्नान के बाद घर के पूजा स्थल में दीप जलाकर अपने पितरों का स्मरण करें, एवं श्री सत्यनारायण भगवान की कथा सुनें, इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी और आपको भगवान लक्ष्मीनारायण का आशीष प्राप्त होगा
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